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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Monday, July 20, 2009

कभी तो वो दिन आयेगा

कभी तो वो दिन आयेगा
मेरे उत्तराखंड के सुने पड़े घरों में
रौनक लौट आएगी
बंजर पड़े खेतों में
फिर से फसलें लहरायेंगी

कभी तो वो दिन आयेगा
जब पलायन थम जायेगा
जंगलों में फिर कोई
बांसुरी की मधुर धुन बजायेगा
घसियारी के गीतों से
डंडी - कंठी रंगमत हो जायेगी

कभी तो वो दिन आयेगा
जब कोई ग्वाला जंगलों में जायेगा
अपने गाय - बैलों चरायेगा
रंगमत हो के खुदेड़ गीत गायेगा

कभी तो वो दिन आयेगा
होली के महीने सब
एक रंग में रंग जायेंगे
औजी के ढोल पर सब रंगमत हो जायेंगे

कभी तो वो दिन आयेगा
जब मेरे पहाड़ से
जाती - पांति का भेद मिट जायेगा
भाईचारा लौट आएगा
फिर उत्तराखंड स्वर्ग से महान कहलायेगा

विपिन पंवार "निशान"
नयी दिल्ली , १५/०७/२००९