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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

उत्तराखंडी ई-पत्रिका

Monday, July 27, 2009

तस्वीर बसी सिर्फ अब मन में

सुन्दर मनमोहक गाँव में बसा
एक सुन्दर सा घर था जिसका
खेती-पाती कर पढ़ना-लिखना ही
उस वक्त मुख्य लक्ष्य था जिसका
खेलने-कूदने की फुर्सत कहाँ उसे
वह तो नित अपने काम में लगा रहता
कभी तो होगी खुशियों भरी जिंदगी
यही हरघडी बैठ सोचा करता
हंसी-ख़ुशी से नित काम करता वह
कभी दुखी होता था नहीं
तस्वीर बसी सिर्फ अब उसके मन में
वह भटक रहा शहर में जहाँ-कहीं

गाँव में चारों ओर आच्छादित सुन्दर वन
जो हिलते-डुलते दिल झकझोर कर देते थे
मनमोहक छटा बिखेरने लगते खेत-खेत
जब हरियाली से भरे लहराते थे
फल-फूलों से लकझक हर डाली-डाली
उसपर चहकती चिडियाँ होकर मतवाली
बड़ा सुकूं से था वह उस वक्त
कभी अशांत रहता था नहीं
तस्वीर बसी सिर्फ अब उसके मन में
वह भटक रहा शहर में जहाँ-कहीं

गाँव में नदी-नहर हर वक्त बहती-रहती
जो सींचती खेत-खेत और डाली-डाली
खुशियों भरा चमन था हर जगह
हरतरफ फैली दिखती खुशहाली
हिम पड़ते नदी-नाले, खेत-पहाड़ मन भाते
और हिम से जब पेड़-पौधे झुक जाते
फिर लगता जैसे ये सब भी खुश होकर
शांतिपूर्ण गाँव को नमन हों करते
इतना मनमोहक गाँव छोड़ चला वह
अब शहर में व्यथा कोई सुनता नहीं
तस्वीर बसी सिर्फ अब उसके मन में
वह भटक रहा शहर में जहाँ-कहीं

कविता रावत
भोपाल