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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Monday, December 7, 2015

बुलशिट कथगा दिन चल सकुद ?

Very Short Garhwali Stories  ;  Modern  Folk Stories

       बुलशिट कथगा दिन चल सकुद ?
(  गढ़वाली लघुकथा श्रृंखला -6  , Garhwali Very Short Stories -6   ) 
                         कथा , कथा रूपांतर   -- भीष्म कुकरेती 
एक मुर्गा अर बुल याने बल्द मा गाढ़ु दगुड़ थौ।  द्वी खुस रौंद था। 
एक दिन मुर्गान ब्वाल बल - मि  ऊंचाई पर चढ़न चांदो। 
बल्दन ब्वाल - अरे तू म्यार मोळ खा , तेपर अप्रतिम ऊर्जा ऐ जाली अर  तू ऊंचाई पर चढ़ जैली। 
मुर्गान बल्दो मोळ खाई अर वै का शरीर मा ऊर्जा ऐ गे।  मुर्गा वैदिन एक फौन्टी मा चौड़ गे। 
दुसर दिन मुर्गान फिर से मोळ खाई अर डाळक मथ्याक फौन्टी ,आ चढ़ गे। 
अब रोज मुर्गा बल्दौ मोळ खाओ अर डाळक  और मथ्याक फौंटी मा चढ़दो  गे। 
अंत मा एक दिन मोळ खैक मुर्गा डाळक चुप्पा मा बैठ गे। 
तबी एक बन्दुक्या की नजर मुर्गा पर पोड अर वैन बंदूक चलाइ अर मृत मुर्गा भीम पोड़ि गे। 
प्रबंध सूत्र - मोळ याने बुलशिट से तुम ऊंचा पद अवश्य पै जैल्या पर मोळ /बुलशिट का भरोसा हमेशा वे   ऊंचा पद पर नि रै सकदा। 

5/12 /2015 Copyright @ Bhishma Kukreti 


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