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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Tuesday, April 26, 2011

Saabri Mantra साबरी मन्त्र (बुरी नजर /हाकडाक से बचने का मन्त्र )

Garhwali Folk Literature
Saabri Mantra साबरी मन्त्र (बुरी नजर /हाकडाक से बचने का मन्त्र )
Presented by Bhishma Kukreti
When a person is effected by wicked thought of enemy /other person, the Sabari reads the following mantra . In this mantra, Sabari takes the names of female desciples of Great Guru Gurokhnath and Guru Gorakhnath is very powerful to finish the bad Oman on the person (Pashva)
ऊनमो आदेस गुरु को आदेस बाबोड़ी को आदेस
जोगी को आदेस अच्लानात सूब को आदेस
काउर देस ते आय सक्य महा महाघोर
डैणी जोगणी को लेषवार , नाटक चेटवार को फेरवार
मण भर षतड़ी, मण भर गुदडी लुवा की टोपी बज्र की षन्ता
हरब षोलु पूरब षोलु षोलु ल़ूणी डोमणी की हंकार षोलु
राड़ी बामणी को हंकार षोलु, खसणी को जैकार षोलु
बरमा की मुंडी हंकार षोलु , भूत प्रेत का बाण षोलु
जोगी को नरसी उषेलु , भात को कलबू उषेलु
डोम को अघोरनाथ भैरों उषेलु , सन्यासी को कच्छइया उषेलु
हाक टेक लगे तो सकती पातळ जावे
हीर्र हीर्र हीर्र हीर्र हीर्र फटे सुबाहा फुर्र मन्तर इश्वरोवाच :
Abodh Bandhu Bahuguna named these poems as Adi Pady or Adigady (Original poems or prose). However, these cant be original Garhwali because the language is completely Braj language and it is know fact that the Gorakhnathi preachers used to create Mantra in Braj or Rajasthani dialects
ष = ख
स्रोत्र अबोध बंधु बहुगुणा : धुंयाळ

Regards
Bhishma Kukreti
The Expert of Pratiyogita Dharma