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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Tuesday, April 26, 2011

घटथापना : गढवाळी लोक साहित्य में आध्यात्म का उदाहरण

Garhwali Folk Literature
गढवाळी लोक साहित्य
घटथापना : गढवाळी लोक साहित्य में आध्यात्म का उदाहरण
इंटरनेट प्रस्तुति : भीष्म कुकरेती
(श्री विष्णु दत्त कुकरेती कि पुस्तक नाथ पन्थ : गढवाल के परिपेक्ष में
मूल पाण्डुलिपि : पंडित मणि राम गोदाल कोठी वाले )
१- अतः घड थापना लेषीणते . श्री गनेसाएंम : श्री जल बन्धनी : जल बंदनी जुग पंच पयाल : स्मपति जुग रंची रे स्वामी : जुग बार, : मन्स्यादेवी अर्दंगे : रुड माला पैरंती जुग ते रं : नीवारनी , वर पैरन्ति, जुग सुल : जुग सौल : आसण बैसण प्राणमंत अंत काले कु जुग बीस : आसण बैसण जुग छतीस : ऊं उंकार ल़े ल़े रे स्वामी स्वर्ग मंच पाताल : रात्री न दीन : समुद्र ना प्रर्थ में सूं तोला : विवर्जित : अंत का उद्पना
२- भेल रे स्वामी : श्री अप्रम प्रनाथ : मधे ल़े रे स्वामी : परम्सुन परमसून मधे रे स्वामी :परमहंस : परमहंस मधे रे स्वामी : चेतना चेतना मधे रे स्वामी उद्पना : गोदर ब्रह्मा जोजनी तीन थानम : ॐ अं डं नं डं डं नं : प्रगारेत नंग सैत नंग : श्रीकृष्ण इजईती : उद्पना भैले रे स्वामी : श्री इश्वर आदिनाथ :कमनघट : नीरघट : षीरघट : रजघट : ब्रिजघट : वाईघट : ये पंच घट : थापंती जतीर सती : बाला ब्रह्मचारी : जटा
३- सौरी वळी ब्रह्मचारी : श्री गुरुगोरषजती : कानन सुणि वातन्ता : षोजंती थावरे जक्र मेवा : एक ब्रह्मा न विश्णु इंद्र नंग : चन्द्र नंग वाई न श्रिश्थी : न दीपक : कोपालंक : कस्य ध्यानम मुरती : वेद न चारि होम न यग्य : दान न :देते : जीत न काला : नाद न वेद : ये घट मेवा : ये घट औग्रा दंग : दीन दाई दीनचारी : नीना औरषवंग : करता पुर्क्म आकासंग आकासेघट : ब्रह्मा पाताले घट ; वीषनुघट मदेघट ; महेसुर सोनाघट :पारवती त्रीयोदेवा एक मुरती : ब्रह्मा विशनु महेसुर ; नाना भा :
४- बाती :मन हो रे जोगी : बसपति पातालम : सम्पति पातालं : ऊपरी सत : सत उपरी जत : जत उपरी धरम : धरम ऊपरी कुरम : कुरम उपरी बासुगी : बासुगी ऊपरी अगनि : : अगनि उपरी क्रीती मही : क्रीती मही उपरी मही क्रीती : मही क्रीती उपरी राहू : राहू उपरी सम्पति गज : सम्पति गज उपरी धज : धज उपरी सम्पति समोदर : सम्पति समोदर उपरी : कमन कमन समोदर : बोली जै रे स्वामी : एक समोदर उपरी सोल समोदर : सोर समोदर उपरी : तालुका समोदर : तालुका
५- समोद्र उपरी ; भालू का समोदर ; उपरी खारी समोद्र उपरी : रतनाग्री समोद्र रतनाग्री समोद्र उपरी : दुधा समोद्र : दुधा समोद्र ऊपरी डालु समोद्र ; डालु समोद्र उपरी मही दुधि समोद्र : मि समोद्र उपरी मही समोद्र ; मही समोद्र ये ससत समोद्र की वार्ता बोली जै रे स्वामी : कमन कमन दीप बोली जै रे स्वामी ; एक दीप : एक दीप उपरी सात दीप सास ; दीप उपरी सजवो दी :
६- प जवो दीप उपरी : जजणी दीप : जजणी दीप उपरी : बासुकणी दीप : बासुकणी दीप उपरी अहोड़ दीप : उपरी थमरी दीप उपरी नेपाली बासमती दीप ; नेपाली भस्मती प उपरी : कणीक दीप : कणीक दीप उपरी : ये सात दीप बोली जै रे स्वामी : नौ खंड वार्ता बोली जै रे स्वामी : कमन कमन षंड वेक षंड : एक षंड : एक षंड उपरी हरी षंड ; हरी षंड उपरी भरत षंड : भरत षंड उपरी आला भरत षंड : भरत षंड उपरी बुद्धि का मंडल : बुद्धि का (षंड = खंड )
७- मंडल उपरी झैल षंड ब्र्न्हंड :झैलषंड :ब्रह्मंड उपरी :ब्रह्मापुरी ब्रह्मापुरी उपरी :सीवपुरी : सीवपुरी उपरी : आनन्द पुरी : आनन्द पुरी उपरी : उपरी ते ल का तला : तेल पी डा : ब्रह्म उपरी तत : अवुर जन वु त कु मारी जा :घातुक मारी जा : मही मंडल : सूरज घट मधे उद्पना वर राशी का घट :मधे उद्पना वार मा से घट : मधे उद्पना त्र्यष्ठ षंड : ये नौ षंड :बोली जा रे स्वामी
८- ये नौ षंड उपरी : वाये मंडल वा ये मंडल उपरी छाया मंडल : छाया मंडल उपरी गगन मंडल : गगन मंडल उपरी मेघ मंडल : मेघ मंडल उपरी : सूरज मंडल : सूरज मंडल उपरी चंदर मंडल : चंदर मंडल उपरी :तारा मंडल : तारा मदनल उपरी :दूधी मंडल : छाय कोटि मेघ माला : वार मा से घट : घट मधे उद्पना : वार रासी का घट :घट मधे उद्पना : अठार वार वणसापती : घट मधे उद्पना ताल
९- बेताल : घट मधे उद्पना काल वे का ल : घट मधे उद्पना : नौ करोड़ घट : घट रहे थीर : घट थापंती : श्री अनादी नाथ बुद बीर भैरो : गौ हंडी पृथवी प्रथमे सोढ़ी कीया : जल अयिले : ऋष बाहन चढ़े : राजा हंस आई ल़े : गरुड वाहन चढ़े : राजा गणेष आयिले मुसा वा हान चढ़े : गंगा गौरिज्या आई ल़े मंगला पिंगोला वाहन चढ़े : अनं
१० - त सीधा : मिलकर कै बैठा ध्यान : घट थापन्ति : कमन कमन थान : श्री हं समती म्समती माई : श्री घटथापंती कमन कमन थानं : सती जुग मध्ये ल़े रे स्वामी : श्री यसुर आदिनाथ : आचार जगै : अरदगै गौरिजा देवी : षीर ब्रिष गजा कटार : आसण बैसण सींगासण : छत्र : पत्र : डंडा ड़वौरु : सती जुग मधे ल़े रे स्वामी : कीतने ताल पुरषा : कीतने ताल अस्त्री : कीतने ब्रस की मणस्वात की औस्या बोली जै रे स्वामी सती जुग मध्ये ल़े रे स्वामी : बतीस ताल
......... बाकी आगे है