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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Thursday, May 28, 2009

गढ़वाळी गीतुन

गढ़वाळ का गीतुन,
धीत नि भरेणी,
छोया ढुंग्यौं कू पाणी पीक,
तीस नि बुझेणी.

सम्दोळा कू गीत सुणि,
समधणी दिखेणी,
डिडांळि मा बैठि अफु,
ह्वक्का छ पेणी.

गढ़वाळ की धरती प्यारी,
सुपन्यौं मा दिखेणी,
क्वी भग्यान भ्वीं मा बैठि,
ठण्डु पाणी पेणी.

घौर बिटि आज अयुं,
कैमु यू सवाल,
घौर बोड़ि ऐजा चुचा,
खुदयुं छ गढ़वाल.

हाथुन व्हिस्की पेणा,
माना छन फाळ,
हाथ हाथ आज छयुं,
उत्तराखंड गढ़वाल.

मंगतु दिदा आज देखा,
भंगलोड़ा पड़युं छ,
हाडगौं कू बण्युं पिना,
भ्वीं मा रड़्युं छ.

डांडी कांठ्यौं सी ज्यादा आज,
दारू चमकणी छ,
ब्यौ बारात घौ घरात,
कनि खण खणि छ.

सर्वाधिकार सुरक्षित,उद्धरण, प्रकाशन के लिए कवि की अनुमति लेना वांछनीय है)
जगमोहन सिंह जयाड़ा "जिग्यांसु"
ग्राम: बागी नौसा, पट्टी. चन्द्रबदनी,
टेहरी गढ़वाल-२४९१२२ २६.५.२००९