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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Wednesday, December 2, 2009

बाबाओ की दूकान ;

घुप्या जनि पैदा ह्वै , पैदा हुदै वेल बोई खाई दे ! सब्युन वे थै ट्व्का ट्व्का बुलण शुरू कैदी ! बुबा कारू भी त, क्या कारू ... खैर जनि कानी कैकी वेल वे थै पाल्ली पोसी बडो कई ! जनि वेल आठ पास कारी , बबल हाथ खडा कैदिनी य बोली की की " बिटा, अब म्यारा बसों नि राइ तेरी अग्वादी की पदाई को खर्च उठाणु ! इन कैर की ,तू भी त्खुन्द जैकी कुछ ध्यली पैसी कामो ! "

घुप्या अब, करू भी त क्या कारू ! .. कख जो? क्या कैरो ? नादाँ उम्र , पदाई लिखाई भी ज्यादा नि छ ! वो कपाल पर हात लगे की बैटीयु छो की तबरी एक बाब आई, वेसी पुछन लेगी .. " बेटा यहाँ पर रीखनी देबी नेगी का घर कहा पर है .." बाबा के साथ चार पांच चेले चांटा भी छाया ! वेल इशारा ल उंकू घोर बताई ! वो बोली " जरा चल वहा तक हमारे साथ " ? जनी वो वाख पोचिनी , घुप्या क्या दिखदा की रिखणी
बोडी लंप तंप कैकी वे बाबा का खुटो माँ पुड़ी गे ! जू नेगी जी खुणी खाणु त खाणु ,, चा तक नि बाणों दी छई , व, वे बाबो खुणी दाल भात, सब्जी , बन बनी का पकवान बाणोंण लगी ! बाबा पर खासी को रोग छो ! हर बगत खप खप कनु छो ! नेग्यण वेकु खंक्हरू तक चै उठोंण पर लगी जैन नेगी का कपड़ा तक णी उठाया !

घुप्या घर ग्या वेल अपना बा से बोली " बुबा ण त मिल अगनै पणई आर ना ही नौकरी कने ! " बबल जब य सुणी त, वेसे बुन बैठी " त क्या करिलू ..
चोरी च्पोरी ?
न -- न -- मी बाबा बनुलू बाबा .. !
त जोगी बणिली .. है ? बबल पूछी !

बड़े प्यार से वेल बाबा थे समझीइ ' अचा एक बात बतो .. ज्यादा पैडी लेखी की , ज्याद से ज्याद ३ ४ लाख साल का मिल्ला ना ? आर जू मी एक ही दिनम
इतका कामे दयुल त ...? बबबॆ की सम्झ्मा बात नि आई

घुप्या रात झणी कबरी सटक .. आज पट २० २५ साल हवे गीनी वे थे हर्च्या ! बुबा बिचरू आदा जाड़ों रैद पुचुणु की कहकी तुमल मेरु घुप्या भी देखि
घुप्या दिखया आज बाबा घुप्यानाथ बणी छ माल लुटूणु ! च्याला चान्तो की मोज ही मोज ! अर अफु क्या टाट बाट .. आबत वेल बाय्कैदा बाबा बाण नै की एक इंस्टीटुयुशंन भी खी याल जख हर साल एक ना की बाबा निकल दी !

पराशर गौर
नमम्बर २८ ०९ सुबह १०.२३