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Monday, October 26, 2015

मंगलेश डबराल की तरह मै भी अपना साहित्यिक सम्मान लौटा दूंगा

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                    मंगलेश डबराल की तरह मै भी अपना साहित्यिक  सम्मान लौटा दूंगा 
                  
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                        चबोड़ , चखन्यौ , चचराट   :::   भीष्म कुकरेती    
-
भुंदरा बौ -हैलो हैलो ! 
मि -हैलो ! हैलो ! रविशंकर प्रसाद जथगा जोर  से कॉल ड्रॉप विरुद्ध धमकी दींदो , शोर मचांदो मोबाईल वळुक    उथगा खराब रिसेप्सेसन शुरू ह्वे जांदो। 
भुंदरा बौ -हैलो    .... हैलो 
मि -हैलो हे बौ , हे बौ , भुंदरा बौ !
भुंदरा बौ -हैलो।  चलो अब सुण्याणु  च।  अज्काल क्या करणु छे तू ?
मि -कुछ ना। बस अचकाल न्यूज दिखणु रौंद कि कु साहित्यकार अपण सम्मान लौटान्दो धौं ?
भुंदरा बौ -अरे सूण तू अपण साहित्यिक सम्मान किलै नि लौटै दींदो ?
मि -वां से क्या ह्वालो ?
भुंदरा बौ -अरे सुबेर बिटेन स्याम तक त्यार नाम टीवी चैनलों मा आणु राल अर क्या। जथगा  नाम त्यार साहित्य रचण से नि ह्वे उथ्गा ज्यादा तो सम्मान लौटाण से ह्वे जालो।
मि -अच्छा ?
भुंदरा बौ -त्यार सौं सम्मान लौटाण से  अधिक नाम हूणु च।
मि -पर    …
भुंदरा बौ -पर क्या।  लगा लात तै सम्मान पर।  अर मुन्नबर राणा तरां सम्मान तै कै  बि टीवी चैनेल मा लौटाइक ऐ जा।
मि -मुन्नबर राणा की बात मेरी समज मा नि आई सम्मान द्याई साहित्य अकादमीन अर राणान सम्मान लौटाई एबीपी न्यूज चैनेल तै। 
भुंदरा बौ -यी सब साहित्यकार बि नौटंकीबाज छन अर कै ना कै राजनीतिक दल का बंध्या     …त्ता छन।
मि -नै नै    … 
भुंदरा बौ -खैर तू बि अपण सम्मान कै टीवी चैनेल मा जैक वापस करिक ऐ जा।
मि -इच्छा तो मेरी बि हूणि च कि नाम कमाणो बान सम्मान वापस कौर द्यूं
भुंदरा बौ -कनो द्युराण ना बुलणी च ?
मि -वीं तै विश्वास  बि नी च कि मि सम्मान लैक साहित्यकार छौं।
भुंदरा बौ -तो बच्चा लोग मना करणा छन ?
मि -नै नै बच्चों तै पड़ीं बि नी च कि गढ़वळि का क्या ह्वालो।
भुंदरा बौ -तो फिर डौर क्यांक च ? लौटा अपणो साहित्यिक सम्मान अर नाम कमा।
मि  ब्वाल नी -इच्छा तो मेरी बि च कि साहित्यिक सम्मान लौटैक उधम मचौं , हल्ला करूँ , अपण नाम कमौं।
भुंदरा बौ -अरे सम्मान लौटाणम अड़चन क्या च ?
मि -भौत बड़ी अड़चन च।
भुंदरा बौ -क्या ?
मि -क्या च कि।  क्या च कि
भुंदरा बौ -क्या च कि क्या च कि  अरे छ क्या च ?
मि -मि तै अबि तक सम्मान नि मील।
भुंदरा बौ -हैं इथगा लिखणो बाद बि सम्मान नि मील ?
मि -हाँ मि अबि तक असम्मानित छौं।
भुंदरा बौ -सच्ची ?
मि -त्यारि सौं मि अबि बि सम्मानहीन छौं।
भुंदरा बौ -मीन तो सूण कि ते से बि कम लिखण वाळु तै उत्तराखंड भाषा संस्थानन सम्मानित कार छौ।
मि -हाँ।  पर मि तब बि असम्मानित ही रौं।
भुंदरा बौ -मतलब तब बि तू अपमानित ही ह्वे ?
मि -ना ना अपमानित ना।  सैत च भाषा संस्थान मा कमेटी वळु तै गढ़वळि साहित्य का ज्ञान नि रै होलु।
भुंदरा बौ -ए मेरी ब्वै ? जब सरकारी सम्मान ही नी मील तो वापस क्या ख़ाक करिल तू।
मि -वै त समस्या च कि मी बि मंगलेश डबरालौ तरां सरकारी सम्मान लौटाण  चांदो किन्तु सम्मान लौटै नि सकुद। 
भुंदरा बौ -तो एक काम कौर।
मि -क्या ?
भुंदरा बौ -तू पैल सरकारी सम्मान पाणो इंतजाम कौर।
मि -सरकारी सम्मान पाणो इंतजाम ? इंतजाम ?
भुंदरा बौ -हाँ भाई भतीजाबाद , घूस देकि , पेच लगैक  पैल तो तू सरकारी सम्मान पा।
मि -भाई भतीजाबाद , घूस देकि , पेच लगैक  सरकारी सम्मान ?
भुंदरा बौ -हाँ अचकाल क्या शिवाजी का टैम पर बि राजाओं की चमचागिरी करिक ही कवियों , चित्रकारों , गायकों तैं राजकीय सम्मान मिल्दो छौ।  चमचागिरी , घूस पेच , तोड़ फोड़ ही  सम्मान पाणो एक तरीका च।  तू पैल राजकीय सम्मान प्राप्त कर।
मि -अर फिर सम्मान लौटाए जाए ?
भुंदरा बौ - हाँ आजकाल यु ही फैसन च कि सम्मान प्राप्ति का साधन ख्वाजो अर फिर सम्मान लौटाओ ।

 22 / 10  /15 ,Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai India 
*लेख की   घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख में  कथाएँ चरित्र , स्थान केवल व्यंग्य रचने  हेतु उपयोग किये गए हैं।
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