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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Tuesday, August 26, 2014

ट्रांसफर याने डंड्याणो (दंड ) एक नायब माध्यम !

घपरोळया , हंसोड्या , चुनगेर ,चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती      
                     
(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )

 ट्रांसफर सद्यनि बटें कै तैं उत्साहित करणो या डंड्याणो (दंड दीण ) नायब माध्यम च। 
एक पार्टीक सरकार जांद अर हैंक पार्टीक सरकार आंद त थोक भावुं मा अधिकार्युं ट्रांसफर हूंद।  मतबल अधिकार्युं राजनीतिकरण हुयुं रौंद।  यदि सरकारी अधिकार्युं राजनीतिकरण नी बि हुयूं हो त ट्रांसफर नीति से चट्टेलिक  अधिकार्युं राजनीतिकरण करे जांद अर ट्रांसफर का बाद मुख्यमंत्री एक सर्कुलर बि भेजदु कि सबि अधिकार्युं तैं राजनैतिक दखलंदाजी से दूर रौण चयेंद।  
अधिकार्युं ट्रांसफर या अधिकारी ट्रांसफर दुनिया तैं दिखाणो एक जरिया बि च कि सरकार चुस्त च।
कबि कै प्रदेश जन कि उत्तर प्रदेश मा अपराध बढ़ जावन अर प्रेस वाळ या विरोधी पार्टीक सियां नेता बिजी जावन तो मुख्यमंत्री थोक मा पुलिस कॉन्स्टेबलूँ ट्रांसफर करिक बतांद बल अब अपराध पर काबू पाये जाल याने अधिकार्युं ट्रांसफर सरकार का वास्ता छवि चमकाणो  पॉलिश  बि च। ट्रांसफर छवि मंजाणो पुत्या च , ट्रांसफर मंजन बि च।  
कखि अपण पार्टीका कार्यकर्ताओं द्वारा जवानी का जोश माँ बलात्कार ह्वे जावो  तो सबसे पैल थाना कु सिपाही कु ट्रांसफर करे जांद अर जताए जांद कि सरकार की मंशा बलात्कार्युं तैं बचाणै नी च।  इनमा ट्रांसफर अपण गू हैंक पर चिपकाणो काम ऐ जांद। 
जब उत्तराखंड उत्तरप्रदेश मा छौ तो पहाड़ी क्षेत्र अधिकार्युं तैं पनिशमेंट भुगणो बड़ो शांत क्षेत्र माने जांद छौ।  तब हत्या , बलात्कार , भ्रष्टाचार , स्त्री अत्याचार का दोषी कर्मिक या अधिकारी जौं पर कार्यालय या कोर्ट मा इन्क्वारी चलणि रौंद छे ऊं तैं डंड दीणो सरल तरीका छौ कि ऊंक ट्रांसफर पहाडूं मा करे जावो। 
ट्रांसफर राजनीतिग्युं कुण राजनीतिक  चौसर  खिलणो एक तरीका च जखमा कर्मिक अर अधिकारी कौड़ी छन,  बट्टा छन । 
उत्तराखंड मा अध्यापकों ट्रांसफर कै बि सरकार का वास्ता गौळै हड्डी च।  अध्यापक नाराज ह्वे जावन तो शर्तिया सरकारी दल चुनाव हारी जांद।  इलैइ उत्तराखंड मा आज तक क्वी बि सरकार अध्यापकुं  वास्ता क्वी बि ट्रांसफर नीति लागू नि कौर साक।  पहाड़ों मा अध्यापक राजनीतिक कार्यकर्ताओं से अधिक कारगर छन। पहाड़ूं मा अध्यापक चिमल्ठूं पेथण छन अर चिमल्ठूं पेथण पर हथ लगाणो मतबल अफु तैं अफिक चिमल्ठूं से तड़कवाण ! 
अच्काल ट्रांसफर राजयपालों तैं दंगळयाणो एक जरिया बण गे। 
यूपीए सरकार की मेहरबानी याने सोनिया गांधी परिवार का स्वामी भक्त नेता अर रिटायर्ड अधिकार्युं तैं  राज्यपाल बणये गे छौ पर यी लोग जब भाजपा का आणो बाद बि राज्यपाल की कुर्सी छुड़णो तयार नि ह्वेन तो भाजपा सरकारन सदाबहार ट्रांसफर नीति अपणै याने बड़ा प्रदेश का राज्यपाल कु ट्रांसफर मिजोरम जन प्रदेश मा करी दे। इनमा राज्यपाल  अपण बेज्जती समजिक राज्यपाल की गद्दी छोड़ी दींद या कमला बेनवाल जन हठी गुजारत बिटेन मिजोरम जाणो तयार बि ह्वे जांद।  खैर एबगतां राज्यपालुं  ट्रांसफर नीति राज्यपालों तैं रपटाणो नीति का अलावा कुछ नी च।
अजकाल ट्रांसफर डंड्याणो एक नायब तरीका च।   


Copyright@  Bhishma Kukreti  25 /8/ 2014       
*लेख में  घटनाएँ , स्थान व नाम काल्पनिक हैं । 


  
Garhwali Humor in Garhwali Language, Himalayan Satire in Garhwali Language , Uttarakhandi Wit in Garhwali Language , North Indian Spoof in Garhwali Language , Regional Language Lampoon in Garhwali Language , Ridicule in Garhwali Language  , Mockery in Garhwali Language, Send-up in Garhwali Language, Disdain in Garhwali Language, Hilarity in Garhwali Language, Cheerfulness in Garhwali Language; Garhwali Humor in Garhwali Language from Pauri Garhwal; Himalayan Satire in Garhwali Language from Rudraprayag Garhwal; Uttarakhandi Wit in Garhwali Language from Chamoli Garhwal; North Indian Spoof in Garhwali Language from Tehri Garhwal; , Regional Language Lampoon in Garhwali Language from Uttarkashi Garhwal; Ridicule in Garhwali Language from Bhabhar Garhwal; Mockery  in Garhwali Language from Lansdowne Garhwal; Hilarity in Garhwali Language from Kotdwara Garhwal; Cheerfulness in Garhwali Language from Haridwar;

कुछ इनै उनै बटें कट्ठा कर्यां विचार अर धारणा

घपरोळया , हंसोड्या , चुनगेर ,चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती      
                     
(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )

  ऐतवारौ कुण म्यार मन मा कुछ बिंडी इ विचार आंदन।  
अब जन कि नरेंद्र मोदीन शौचालय पर बहस छिड़वै दे त सब जगह शौचालय की छ्वीं लगणा छन।  
हमन बि गांव मा एक सँजैत शौचालय बणाइ।  किन्तु चाची वै शौचालय तैं साल भर मा एक दैं बि प्रयोग नि करदि।  चचिक बुलण च बल रोज झाड़ा करिक शौचालय गंदु ह्वे जांद।  फिर झाड़ा करण मा बल जु मजा गदन आंद उ मजा शौचालय मा नि आंद। 
कलावती बोडि कुण बि भैजिन ट्वाइलेट बणयुं च अर बोडिन वै ट्वाइलेट पुटुक लखड़ धर्यां छन। बोडिक  बुलण च बल ट्वाइलेट की गंध बर्दास्त नि हूँदि। 
प्रधान जीन एक सार्वजानिक शौचालय बि बणवयूं  च किंतु पाणी व्यवस्था करद बिसरी गेन त वु शौचालय बणदि बांज पौड़ी गे। 
अब जन कि नरेंद्र मोदी बुलणा छन कि बिजली बचाओ अर देशभक्त बणो  त परिवार वाळु बुलण पर मि रात ना त पौड़ सकुद ना इ लेखि सकुद।   म्यार परिवारो बुलण च बल गढ़वाली या गढ़वाली मुतालिक लिखण -पढ़न से कुछ मिल्दु त नी च उल्टां बिजली खर्चा फोकट मा हूंद। नरेंद्र मोदिका असर म्यार परिवार पर बि पोड़ी गे। 
 इंदिरा गांधी का बाद नरेंद्र मोदी ही इन प्रधानमंत्री ह्वे जैक बुल्युं पर लोग ध्यान दीणा छन।  जगा जगा 100 स्मार्ट सिटी की बात हुणि छन।  खबर  च बल राहुल गांधी बि 100 स्मार्ट सिटी की बात करणा रौंदन बल 100 स्मार्ट सिटी की शुरुवात तो कॉंग्रेसन करी छे।  व्है सकुद च राहुल गांधी सही ह्वावन।  मेरी राहुल गांधी तैं पॉलिटिकल मार्केटिंग सलाह च कि 100 स्मार्ट सिटी की बात कतै नि कारो अर 10,0000 स्मार्ट विलेज की बात कारो। 
उत्तराखंड सरकार तैं गैरसैण तैं स्मार्ट सिटी बणाण चयेंद। 
आप पार्टी तैं स्मार्ट व्यक्ति की बात करण चयेंद तो समाजवादी पार्टी तैं स्मार्ट राजनैतिक परिवारवाद की बात करण चयेंद। 
हरीश रावत जी जब तलक चीफ मिनिस्टर नि बौण छा तो बुले जांद छौ कि उत्तराखंड तैं हरीश रावत मुख्यमंत्री चयाणु च किंतु अब लोग बुलणा छन कि डा रमेश निशंक अर हरीश रावत मा कुछ बि फरक नी च बल रावत जी बि डा निशंक का तरां घोषणा ही करणा रौंदन। 
ढांगू-उदयपुर (यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र ) मा ए साल गदन /भळक ऐन पर हमन विधायका श्रीमती विजया बड़थ्वाल की क्वी न्यूज नि पौढ़। 



Copyright@  Bhishma Kukreti  24 /8/ 2014       
*लेख में  घटनाएँ , स्थान व नाम काल्पनिक हैं । 


  
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कुछ इनै उनै बटें कट्ठा कर्यां विचार अर धारणा

घपरोळया , हंसोड्या , चुनगेर ,चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती      
                     
(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )

  ऐतवारौ कुण म्यार मन मा कुछ बिंडी इ विचार आंदन।  
अब जन कि नरेंद्र मोदीन शौचालय पर बहस छिड़वै दे त सब जगह शौचालय की छ्वीं लगणा छन।  
हमन बि गांव मा एक सँजैत शौचालय बणाइ।  किन्तु चाची वै शौचालय तैं साल भर मा एक दैं बि प्रयोग नि करदि।  चचिक बुलण च बल रोज झाड़ा करिक शौचालय गंदु ह्वे जांद।  फिर झाड़ा करण मा बल जु मजा गदन आंद उ मजा शौचालय मा नि आंद। 
कलावती बोडि कुण बि भैजिन ट्वाइलेट बणयुं च अर बोडिन वै ट्वाइलेट पुटुक लखड़ धर्यां छन। बोडिक  बुलण च बल ट्वाइलेट की गंध बर्दास्त नि हूँदि। 
प्रधान जीन एक सार्वजानिक शौचालय बि बणवयूं  च किंतु पाणी व्यवस्था करद बिसरी गेन त वु शौचालय बणदि बांज पौड़ी गे। 
अब जन कि नरेंद्र मोदी बुलणा छन कि बिजली बचाओ अर देशभक्त बणो  त परिवार वाळु बुलण पर मि रात ना त पौड़ सकुद ना इ लेखि सकुद।   म्यार परिवारो बुलण च बल गढ़वाली या गढ़वाली मुतालिक लिखण -पढ़न से कुछ मिल्दु त नी च उल्टां बिजली खर्चा फोकट मा हूंद। नरेंद्र मोदिका असर म्यार परिवार पर बि पोड़ी गे। 
 इंदिरा गांधी का बाद नरेंद्र मोदी ही इन प्रधानमंत्री ह्वे जैक बुल्युं पर लोग ध्यान दीणा छन।  जगा जगा 100 स्मार्ट सिटी की बात हुणि छन।  खबर  च बल राहुल गांधी बि 100 स्मार्ट सिटी की बात करणा रौंदन बल 100 स्मार्ट सिटी की शुरुवात तो कॉंग्रेसन करी छे।  व्है सकुद च राहुल गांधी सही ह्वावन।  मेरी राहुल गांधी तैं पॉलिटिकल मार्केटिंग सलाह च कि 100 स्मार्ट सिटी की बात कतै नि कारो अर 10,0000 स्मार्ट विलेज की बात कारो। 
उत्तराखंड सरकार तैं गैरसैण तैं स्मार्ट सिटी बणाण चयेंद। 
आप पार्टी तैं स्मार्ट व्यक्ति की बात करण चयेंद तो समाजवादी पार्टी तैं स्मार्ट राजनैतिक परिवारवाद की बात करण चयेंद। 
हरीश रावत जी जब तलक चीफ मिनिस्टर नि बौण छा तो बुले जांद छौ कि उत्तराखंड तैं हरीश रावत मुख्यमंत्री चयाणु च किंतु अब लोग बुलणा छन कि डा रमेश निशंक अर हरीश रावत मा कुछ बि फरक नी च बल रावत जी बि डा निशंक का तरां घोषणा ही करणा रौंदन। 
ढांगू-उदयपुर (यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र ) मा ए साल गदन /भळक ऐन पर हमन विधायका श्रीमती विजया बड़थ्वाल की क्वी न्यूज नि पौढ़। 



Copyright@  Bhishma Kukreti  24 /8/ 2014       
*लेख में  घटनाएँ , स्थान व नाम काल्पनिक हैं । 


  
Garhwali Humor in Garhwali Language, Himalayan Satire in Garhwali Language , Uttarakhandi Wit in Garhwali Language , North Indian Spoof in Garhwali Language , Regional Language Lampoon in Garhwali Language , Ridicule in Garhwali Language  , Mockery in Garhwali Language, Send-up in Garhwali Language, Disdain in Garhwali Language, Hilarity in Garhwali Language, Cheerfulness in Garhwali Language; Garhwali Humor in Garhwali Language from Pauri Garhwal; Himalayan Satire in Garhwali Language from Rudraprayag Garhwal; Uttarakhandi Wit in Garhwali Language from Chamoli Garhwal; North Indian Spoof in Garhwali Language from Tehri Garhwal; , Regional Language Lampoon in Garhwali Language from Uttarkashi Garhwal; Ridicule in Garhwali Language from Bhabhar Garhwal; Mockery  in Garhwali Language from Lansdowne Garhwal; Hilarity in Garhwali Language from Kotdwara Garhwal; Cheerfulness in Garhwali Language from Haridwar;

Music Script, Music Notation of a Garhwali Folk Dance Song- Dalyon ke Geet

Characteristics of Garhwali Folk Dramas, Folk Theater/Rituals and Traditional Plays part -207           
Classical Rag Ragini, Tal, Bol, Music Beats, Music Notations or Music Scripts in Garhwali Folk Songs and Folk Music part -36   

 गढ़वाली लोक नृत्यगीत- संगीत (गढ़वाली लोक नाटकों में शास्त्रीयसंगीत स्वर लिपि, तालराग रागिनी-37
                             
                     Presented by Bhishma Kukreti (Folk Literature Research Scholar)

डळयों का लोकनृत्य -गीत की संगीत स्वर लिपि 

स्थाई -
ऋद्धि  को सुमिरों सिद्धि को सुमिरों सुमिरों सारदा माई।
अर  सुमिरों गुरु अविनाशी को सुमिरों कृष्न कनाई।
सहायक
सदा अमर नि रैंदी धरती माता बजर पड़े टूट जाई।
अमर नि रैंदा चंद सुरजि छुचा मेघ घिरे छिप जाई।।१।।  
माता रोये जनम कूं बहिन रोयेबहिन रोये छै मासा।
तिरिया रोये डेढ़ घड़ी कूँ आन करे घर बासा।।२।।
कागज़ पतरी सब कुई बांचे करम नि बांचे कुई।
राज घरों को राजकुंवर बुबा करणी जोग लिखाई।। ३ ।।
सुन रै बेटा गोपीचंद जी बात सुनो चित लाई।
कंचन कया कंचन कामिनी मति कैसे भरमाई।।  ४।।  
 डळयों के गीत खड़ी बोली अथवा ब्रज भाषा में होते हैं।   डळया गुरु एकतारा के साथ बजाते हुए गीत गातें हैं।
एकतारे के बोल इस प्रकार हैं -
               र ।                  
स्थाई -
                  
#रे  रे    रे  मप   ।  रे  म ध  प । म -    प । प प ध प
मरे        ।  प म  म म । मम पम मम मरे । रे  -  -  -

                                                                                 रे
#रे  रे    रे  मप   ।  रे  म ध  प । म -    प । प - ध पम
मरे        ।  प म  म म । मम पम मम मरे । रे  -  -  -
           अंतरा
  रें   रें  रें  । रें  -  रें  - ।  ध   सां  सां  -  । सां - धप मम
  रें      । प -  म प ।  मम  पममम  मरे । र-  - - -
                                                रे
#रे  रे    रे  मप   ।  रे  म ध  प । म -    प । प - ध पम

  रे      ।  प म  म म । मम पम मम मरे । रे  -  -  -
  शेष अंतराएँ ऐसी ही गायी जाएँगी 
s =आधी अ 
@ - नीचे अर्धचन्द्राकार चिन्ह
चिन्ह नीचे बिंदी का है जैसे फ़ारसी  शब्दोँ में लगता हैं
मूल संगीत लिपि -केशव अनुरागी नाद नंदनी (अप्रकाशित )
      संदर्भ - डा शिवा नंद नौटियाल गढ़वाल के लोकनृत्य गीत 
           
इंटरनेट प्रस्तुति - भीष्म कुकरेती


Copyright@ Bhishma Kukreti 23/8/2014 for interpretation notes  
Contact ID -bckukreti@gmail.com
Characteristics of Garhwali Folk Drama, Community Dramas; Folk Theater/Rituals and Traditional to be continued in next chapter
References -
1-Dr Shiva Nand Nautiyal, Garhwal ke Loknritya Geet
2- Keshav Anuragi, Nad Nandani (Unpublished)
3- Dayashankar Bhatt, Divya Sangit (Unpublished)
4- Glossary of Indian Classic Music

दे दे बाबा ! प्रजातंत्र का नाम पर लीडर ऑफ अपोजिसन पद दे दे

घपरोळया , हंसोड्या , चुनगेर ,चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती      
                     
(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )


अचकाल जख जा  चर्चा जोरों पर च बल  कॉंग्रेस भौत जोरूं से लोकसभा मा लीडर ऑफ अपोजिसन पद का बारा मा पुठ्या जोर लगाणी च अर भाजपा , कम्युनिष्ट वाळ बुलणा छन बल कॉंग्रेस भीख मंगणि च।  ब्याळि (22 /0/8/ 2014   )  मि तैं लग बीच चौराहा पर कॉंग्रेस  गरीब जनानी का भेष मा घायल  मल्लिकार्जुन खड़गे तैं टूटीं फूटीं हथ गाड़ी मा बिठैक भीख मगणि च। 
कॉंग्रेस - दे दे बाबा ! वोट ना सै कुछ त दे जा  बाबा !
मर्सडीज कु यात्री -शिट ! अब त पॉलिटिकल पार्टी बीच चौराहा मा चंदा मांगण लग गेन।  ये कॉंग्रेस ! उन त तू 90 करोड़ रुपया यंग इंडिया या नेसनल हेराल्ड तैं खूब दींदी अर भीक मांगणो चौराहा पर खड़ी हूंदी ? क्या लगा रखा है ये ?
कॉंग्रेस - मि चंदा मंगणो थुका खड़ु हुयुं छौं। 
मर्सडीज कु यात्री - तो विधान सभा बान वोट मांगणो यु क्वी तरीका नी च। 
कॉंग्रेस - सेठ जी महाराज !  मि तै पता च कि हमन विधान सभा चुनाव बि हरणी च।  मि वोट नि मांगणु छौं। 
मर्सडीज कु यात्री - वोट बि ना अर नोट बि ना ? फिर बीच चौराहा मा खड़गे जी तैं कोढ़युं लिवास से सजैक  भीक मांगणो क्या तरीका च यु ?
कॉंग्रेस - आपन अबैं दैं भाजपा तैं खूब चंदा दे तो नरेंद्र मोदी तुमर अवश्य सूणल  त जरा मेकुण बि मांगि ले। तू मुझे कुछ दिलाएगा तो भगवान आपको माइनिंग लाइसेंस दिलाएगा ! दिला दे बाबा प्रजातंत्र का नाम पर मै तैं बि दिला दे। 
मर्सडीज कु यात्री - फंड जा भै।  मि नरेंद्र भाई से अफुकुण मांगुल कि त्वै कुण मांगुल ? जा मिडल क्लास से मांग। 
खड़गे जी (कॉंग्रेस का कंदुड़म )- नौ मण नंदुक खावन अर नंदु कौम छांचिक जावन।  ये अपर  क्लास इंडियनन हमारी क्वी सहायता नि करण। 
 कॉंग्रेस - ठीक च मि तै मारुती वाळ से मांगदु। 
कौंग्रेस - ये मारुती कार वाळ मिडल क्लास ! दिला दे बाबा ! मि तैं लोकसभा मा लीडर आफ अपोजिसन पद दिला दे! 
मध्यम वर्गीय  - क्या दिला दे ?
कॉंग्रेस - लोक सभा मा विरोधी दल कु नेता पद दिला दे ! तू मर्सडीज के लायक   भय्ये पर मि तैं लोकसभा मा लीडर आफ अपोजिसन पद दिला दे! 
मध्यम वर्गीय  - केक नाम पर लोकसभा मा लीडर आफ अपोजिसन पद दिला दे ?
कॉंग्रेस - लोकतंत्र का नाम पर।  मि  तंत्र की दुहाई दींदु कि लोकतंत्र बचाणो खातिर मि तैं लीडर ऑफ अपोजिसन पद दिला दे ! 
मध्यम वर्गीय  - कनो तब लोकतंत्र कख छौ जब ना तो इंदिरा गांधी ना ही राजीव गांधीन कैं विरोधी दल तैं लीडर ऑफ अपोजिसन पद दिलाई?
कॉंग्रेस - आप समझणा नि तब लोकतंत्र तैं विरोधी दल की आवश्यकता छैं नि छे ना ! आज नरेंद्र मोदी कु एकाधिकारवाद से  लड़णो बान लीडर ऑफ अपोजिसन अवश्य जरूरी ह्वे गे। 
मध्यम वर्गीय  - कनो इंदिरा गांधीक एकाधिकारवाद तैं प्रजातंत्र कु खंभा बुले जालु ?
खड़गे - हे माराज भीख मत दो पर अपने कुत्ते को हम पर तो मत छोडो। हे मध्यम वर्ग ! हम तैं लीडर औफ अपोजिसन पद नि दिलाइ सकदा तो हमर कुत्सित भूतकाल की याद तो नि दिलावो। 
मध्यम वर्गीय  -- जावो जावो आम जनता से लीडर ऑफ अपोजिसन का पद मांगो। 
कॉंग्रेस - ले स्यु मध्यम वर्ग बि धोकाबाज ह्वे गे।  अब आम जनता से ही भीक मांगण पोड़ल। 
कॉंग्रेस - दे दे बाबा प्रजातंत्र का खातिर लीडर ऑफ अपोजिसन पद दिला दे हे जनता !
आम जनता - लीडर ऑफ अपोजिसन पद चयाणु च त लोकसभा अध्यक्ष का पास जावो ना !
कॉंग्रेस - तीन मि तैं कखि जोग लैक नि राख।  लोकसभा अध्यक्षा  न्यायसंहिता अर पुरण रिवाजुं सौगंध लेकि बुलणी  कि कॉंग्रेस अधिकृत विरोधी दल लैक नी च। 
आम जनता - तो कोर्ट मा जावो 
कॉंग्रेस - गे छया पर कोर्ट लोकसभा अध्यक्ष का फैसला मा हस्तक्षेप नि कर सकुद। 
आम जनता - ह्यां पण त्वै तैं लीडर ऑफ अपोजिसन पद क्याकुण चयेणु च ?
कॉंग्रेस - जनसेवा अर प्रजातंत्र की रक्षा का वास्ता मि तैं लीडर ऑफ अपोजिसन का पद चयाणु च।
आम जनता - वाह ! जब सरकार मा छया तो जनसेवा नि कौर सकी  बल्कि स्कैमुँ मा व्यस्त रैई  अर अब जब विरोध मा छे तो त्वै तैं जनसेवा अर प्रजातंत्र याद आई ?
कॉंग्रेस - दे दे हे जनता ! प्रजातंत्र अर जनसेवा  नाम पर कॉंग्रेस तैं लीडर ऑफ अपोजिसन पद दिला दे ! 
आम जनता - जरा हमतैं अच्छे दिन दिखण दे फिर 2019 मा दिखला कि त्वै तैं कु पद दीण। 
कॉंग्रेस - पदविहीन रैक त कॉंग्रेस हमेशा असहाय ह्वे जांद।  
खड़गे -बगैर पद का क्वी बि कॉंग्रेसी ज़िंदा ह्वेक बि मुर्दार ही रौंद। 
कॉंग्रेस - दे दे बाबा ! नेहरू -गांधी खानदान की नाक बचाणो बान मि  तैं लोकसभा मा लीडर ऑफ अपोजिसन पद दिला दो बाबा ! 


Copyright@  Bhishma Kukreti  23/0/8/ 2014       
*लेख में  घटनाएँ , स्थान व नाम काल्पनिक हैं । 


  
Garhwali Humor in Garhwali Language, Himalayan Satire in Garhwali Language , Uttarakhandi Wit in Garhwali Language , North Indian Spoof in Garhwali Language , Regional Language Lampoon in Garhwali Language , Ridicule in Garhwali Language  , Mockery in Garhwali Language, Send-up in Garhwali Language, Disdain in Garhwali Language, Hilarity in Garhwali Language, Cheerfulness in Garhwali Language; Garhwali Humor in Garhwali Language from Pauri Garhwal; Himalayan Satire in Garhwali Language from Rudraprayag Garhwal; Uttarakhandi Wit in Garhwali Language from Chamoli Garhwal; North Indian Spoof in Garhwali Language from Tehri Garhwal; , Regional Language Lampoon in Garhwali Language from Uttarkashi Garhwal; Ridicule in Garhwali Language from Bhabhar Garhwal; Mockery  in Garhwali Language from Lansdowne Garhwal; Hilarity in Garhwali Language from Kotdwara Garhwal; Cheerfulness in Garhwali Language from Haridwar;

बल ए साल बि गढ़वाळम गदन ऐन , भळक ऐन

चबोड़्या - भीष्म कुकरेती 
s - आधा अ 

 बल टीवी मा द्याख बल हर सालों तरां ,
ए साल बि गढ़वाळम बादल फटिन जोर से सद्यनो तरां 
बल टीवी वाळुंन पुरण क्लिपुं तैं नै हिसाब से बताइ कि  ढांगू -उदैपुर मा जोर का गदन ऐन मतबल   बाढ़ ऐ। 
अखबारुं मा त ना पर फेसबुक मा द्याख बल लंगूर-ढांगू -उदैपुर मा कथगै जगा भळक ऐन मतबल भूस्खलन का पुराणी क्लिप ना असली चित्र देखिन। 
मि नि जाणदु कि जान माल कु कथगा नुकसान ह्वे। अब जब सरकार इ नि बताली त मि तै सुपिन थुका आल कि म्यार गां मा क्या नुकसान ह्वे। 
पर मि जाणदु छौं कि ये साल बि टीवी स्टूडियो मा पॉलिटीसयन, पत्रकार अर पर्यावरण वादी हिमालयी व्यवस्था का वास्ता रोला -पिटला अर  दण दण घड़ियाली आंसू अवश्य बगाला अर फिर हैंक साल की बाढ़ -भूस्खलन की जग्वाळ मा फसोरिक से जाला। 
मि नि जाणदु कि ढांगू -उदैपुर वाळुं तै बाढ़ - भूस्खलन का अंदाजा पैलि लगि गे छौ कि ना। 
किन्तु एक बात  त अवश्य ह्वे होलि कि दिल्ली मा अबै दै  कॉंग्रेसन भाजपा सरकार तैं  उनि गाळी दे होलि जन पोर -परार भाजपान कॉंग्रेस सरकार तैं निठल्ला आपदा प्रबंधन कमिसन का वास्ता दे छौ। कॉंग्रेसन भाजपा की तरां अभियोग लगै होलु कि डिजास्टर मैनेजमेंट एक सफेद हाथी च।  अभियोग मा कॉंग्रेस का गाळयूं शब्द वी ही रै होला जु पोर -परार भाजपा का गाळयूं मा शब्द रयोग ह्वे होला। 
मुख्यमंत्री न अवश्य ही दुःख जतै होलु अर टीवी मा बयान दे होलु कि प्रभावितों तैं हर सम्भव सहायता दिए जाली। अखबार सरकार का विरुद्ध ज्यादा नि ल्याखन की चिंता मुख्यमंत्री तैं ज्यादा ह्वे होलि तो अखबारुं मुख बंद करणो वास्ता अखबारुं तैं सरकारी विज्ञापन याने मुख्यमंत्रीक मुखड़ा दिखाण वाळ विज्ञापनुं भेंट दिए गे होलि। 
इख तक कि भूतपूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणान बि बाढ़ -भूस्खलन पर  सोनिया जी अर राहुल गांधी जीs  तर्फ़ान अत्यंत चिंता व्यक्त करि होलि।
जन कि हूंद च   कि यमकेश्वर क्षेत्र की विधायिका श्रीमती बड़थ्वाल , विरोधी दल की द्वी और नेत्यांणी श्रीमती कैंतुरा अर श्रीमती बिष्ट ये मामला मा उदासीन ही रै होला।
मि नि जाणदु कि जौंक चौक बगी होलु वूंक  चौक का वास्ता सरकारी अनुदान मीलल कि ना किंतु भौत  सा ग्राम प्रधानुं ये साल नया नया चौक अवश्य बौणल। 
मि क्या जनता बि नि जाणदि कि जौंक सनी/गौशाला  उजड़ी होलि वूंक सनिक /गौशालाक क्या ह्वालु किन्तु सब तैं पता च कि भौत सा पंचायत सदस्यों नई छनि /सन्नी /गौशाला सत -प्रतिशत चिणे जालि। 
कै तैं नि पता कि जौंक कूड़ उजड़ वूं तैं सरकार क्या मुवावजा द्याली पर सब तैं पुरू भरवस च कि ये साल ब्लॉक प्रमुखुं नई चकाचक कोठी देहरादून या कोटद्वार मा अवश्य बणन।  
प्रवासी संस्थौन अपण अपण लियाकत से चंदा भिजण। 
बस कुछ दिन बाद सब्युंन दिवाळी -बग्वाळी -मकरैणी - बिखोत का त्यौहारुं मा बौगे जाण अर फिर तबि खौंळेण /आश्चर्य चकित हूण  हैंक साल फिर कै हैंक जगा बाढ़ आली , भूस्खलन होलु।
रघुकुल रीति सदा चली आई का हम शिष्य छंवां  हमन   तबि बिजण जब हमर नुक्सान ह्वे जालु वै से पैल हमन सियुं रौण ! 

Copyright@  Bhishma Kukreti  27  /8/ 2014       
*लेख में  घटनाएँ , स्थान व नाम काल्पनिक हैं । 


  
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History of Garhwal King Lalit Shah part - 1

History of Garhwal including Haridwar (1223- 1804 AD) –part -165    

   History of Uttarakhand (Garhwal, Kumaon and Haridwar) -412

                       By: Bhishma Kukreti (A History Research Student)
Name of Lalit Shah- All the lists describe him as Lalit Shah including Maularam. However, his name is engraved as LalitKumarShah in his coin.
          Information Source about Lalit Kumar Shah
There are sources of information about Lalit Shah as-
1-Maularam
2-Coins and inscriptions
3-History accounts of Sikh and Rohillas
4-A Portrait drew by Maularam
                        Ruling Period of Lalit Shah  
There are following suggestions for ruling period of Lalit Shah –
1-Becket and Walton- 1772-1780
2-Raturi- 1780-1791
3-Williams- 1774-1781
 The Deevan of Garhwal informed to Hardwick that Lalit Shah expired in 1781. That is why Williams suggested the death of Lalit Shah in 1781. By reading Gadhrajvanshkavya by Maularam it is obvious that his son Pradyumna Shah did not reach to Kumaon in his father Lalit Shah’s life.  
  Lalit Shah died while he was campaigning for Kumaon win. He caught Malaria and died in August.  
 After death of Lalit Shah, Jaykrit Shah sent Pradyumn Shah to Kumaon. The first copper inscription of Pradyumna Shah (son of Lalit Shah) is 1781. That means Lalit Shah was no more before 1781.Therefore, historians suggested that Lalit Shah died in around 1780.

            Family of Garhwal King Lalit Shah
       Lalit Shah had three queens. He had four sons. The eldest queen of Lalit Shah was princess of Kyunthal. Jai Krit Shah was born from eldest queen of Lalit Shah. Lalit Shah did not have good relation with prince Jaikrit Shah and his mother. Lalit Shah used to shout  on Jai Krit Shah and his eldest queen.
 Second wife of Lalit Shah was daughter of Doti King Kridam Sain. At the time of marriage of Lalit Shah with princess of Doti, Garhwal King had treaty with Kumaon King Duli Chand. The marriage procession of Lalit Shah passed through Kumaon. The marriage of Lalit Shah with Doti prince might have held before 1777.  Mohan Chand (Kumaon King after Duli Chand) was married to daughter of Doti King Deepsain the son of Kridamsain.
  Lalit Shah had heist affection for Doti princess and she was called Doti Rani. Her sons were Pradyuman and Parakram.
 Thrid queen of Lalit shah was daughter of elite from Garhwal called as Thakurani. Her son was Pritam. Perhaps she did not get due regard and importance in kingdom as she was not from king family. Historians do not get much record about prince Pritam. That means Pritam was also ignored by administrators and King.
 The birth years of princess of Lalit Shah are presumed as follows
Jaikrit Shah – 1760
Pradyumn Shah – 1766
Prakram Shah – 1769
Pritam Shah - 1774
                       Management of Badrikashram Temple
    Folklore describes that Shankaracharya handed over the charge of rituals and management of Badrinath temple to his disciple Trotakacharya. The disciples of Trotakachary looked after ritual management till fifteenth century. From fifteenth century till 1776, Dandiswami used to look after rituals and management of Badrinath.
  According to Raturi, a Dandiswami Ram Krishna died in 1776. There was no other Dandiswami available for the ritual performances. There was Gopal a Nambudaripad Brahmin who used to cook food and Prasad in the kitchen. Lalit Shah was also present in Badrinath when Dandiswami ram Krishna died. Lalit Shah handed over the job of Dandiswami to Gopal bu offering him Chhatra, Chanvar, income source etc. Lalit Shah positioned the post as Rawal.
 Gopal requested to the King that after he becomes Rawal his family would not have income source. The King offered Gopal and his family Dimar village and from that day the family members of Gopal Nambudiparad were called Dimri. The king also arranged other source of income for Gopal and his family members as gifts (Vriti) of Lakshmi Mandir.
 From that day, Rawal had been being appointed from Nambudiparad families of Kerala.

                                               Honoring Scholars
          Lalit Shah honored scholars as his predecessors used to honor. He appointed Ram Datt Bahuguna (son of Medhkar Shastri) as Dharmadhikari. The Dharmadhikari post was continued till Devi Prasad Bahuguna of Pokhari village.  
 Bahgunas constructed a library in Pokhari. Kumaoni Pundits took those books at the time of Johsiyani.
Copyright@ Bhishma Kukreti Mumbai, India, bckukreti@gmail.com26/8/2014
History of Garhwal – Kumaon-Haridwar (Uttarakhand, India) to be continued… Part -413
(The History of Garhwal, Kumaon, Haridwar write up is aimed for general readers)
History of Garhwal from 1223-1804 to be continued in next chapter ….
XX                     
Notes on South Asian Early Modern Period  History of Garhwal;  South Asian Early Modern Period   History of Pauri Garhwal; South Asian  Early Modern Period   History of Chamoli Garhwal;  South Asian Early Modern Period  History of Rudraprayag Garhwal;  South Asian Medieval History of Tehri Garhwal;  Medieval History of Uttarkashi Garhwal;  South Asian Early Modern Period   History of Dehradun, Garhwal;  Medieval History of Haridwar ;  South Asian Early Modern Period   History of Manglaur, Haridwar;  South Asian Early Modern Period   History of Rurkee Haridwar ; South Asian Early Modern Period   History of Bahadarpur Haridwar ; South Asian Early Modern Period  History of Haridwar district to be continued