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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Monday, December 26, 2011

छै जनमों क भूक

छै जनमों क भूक
               कथा : भीष्म कुकरेती
 
जू सात जन्मों से समधी समदण बणणो को तर्सणा छन
हम द्वी वी जमन माँ हिरन आर हिरनी छया. व अपड़ी चांठी माँ में अपुड़ डाँडो माँ एक दुसर तै प्यार से टक लगैक दिखणा रौंदा छया .भेमाता (ब्रम्हा ) तैं यु मंजूर नि थौ की हम एक हैंका का सुवा हुवां .
भेमता न हम तैं हैंक जनम माँ मनिख रूप माँ प्रेमी -सुवा बणणो की जगा गढ़वाल माँ समधी समधन बणणो वरदान दे द्याई .
पैलो जनम लुठेरूं को जोग:

हमर पैलो जनम टिहरी जिनां गंगा को छाल फर ह्वे थौ. मेरी बेटी आर वींका नौन्याल की माँगन बड़ी धूम धाम से ह्वै. आज बी अडगें (क्षेत्र, इलाका ) माँ वीं माँगण की छवीं लगदन.हम द्वी खुस छाया, पुळयाणा  छया बल बस एक इ मनिख जनम उपरांत हम तैं मोक्ष मिल जालो . पण इन नि ह्वाई. ब्वौ से पेल सिपै जात का लोकुं का एक जुंटा रात डकैती डाळणो  आई अर मेरी बेटी तै उठाई का ल्हीगैन . इन सुणन माँ आई बल उनो मेरी बेटी तैं देस माँ गुड़ को संटवरो बंट्वरो (barter) माँ बेची दे . वै जनम माँ हम समधी-समधन नि बौण सक्वां.
दुसर जनम बडो-छुटो बामण जात को नाम :
हैंको जनम माँ हम दुयुं को जनम बामण जाती माँ ह्वै. वींको जनम अर ब्वौ सरयूळ बामण जात माँ ह्वै म्यार जनम छुटी बामण जात माँ ह्वै . सर्युलों न हमारू बेटी बेटा को रिश्ता नि होणी दे . ये जनम माँ बि हम तैं मोक्ष नि मील
तिस्रो जनम तैं खश्या - बामण की लडाई -बीमारी खाई गे :
तिस्रो जनम बि सुफल नि ह्वै . वींको जनम राजपूत जात माँ ह्वै अर म्यारो जनम बामण को घर ह्वै . तीन सौ साल पैली क्या आज बि गढ़वाली समाज माँ राजपूत बमाणु ब्यौ तै सामाजिक मंजूरी नि मिलदी त वी उबारी वै जनम माँ बामण जज्मानूं को आपस माँ ब्वौ की सामाजिक मंजूरी कनकैकी मिलनी छे . हम वै जनम माँ बि निरसै का ही मोर्वाँ.
चौथो जनम मातबरी अर गरीबी को अर्पण :
हमारो चौथो जनम शिल्पकार जाती माँ ह्वै . ए जनम माँ ता हमारो समधी अर समधन बणणो पुरो अवसर थौ पण शिल्पकार जात माँ जनम ल्हेकी बि हम समधी समधन नि बण सक्वां . वा सुनारूं की ब्वारी छे अर मी पुंगड़ोहीण/खेतहीन जात का छौ जू रोज बिठो इख मजदूरी करण वाल शिल्पकार छौ. म्यार नौनो बि मजदूरी कर्रदार छ्याई. वा मातबर घर की छे में अर म्यार नौनु गरीब गुरबा घरानों का छया . कोर कोसिस करण पपर बि हम समधी -समधन नि बौण सक्वां . ऊ जनम बि बेकार ही ग्याई.
पंचों जनम क्षिक्षा अर नि-शिक्षा को भेद बीच माँ आई :पंचों जनम माँ हम समधी -समधन बौणि सकदा छया.पण मेरी नौनी (बेटी) अनपढ़ छे अर वींको नौन्याल (बेटा) ऍम ए पास छायो त शिक्सा अर ni-शिक्सा का भेद हमारी गाणी, हमारी इच्छा , हमारी आकांशा की दुसमन बौणि गे .हम दुयुं को पंचों जनम बि तन्नी ग्याई.
छठो जनम बच्चों की गाणी/स्याणी/आकन्क्षा की भेंट :
छठो जनम माँ त हमारो समधी समधन बणणो  पुरो अवसर छौ . खानदान, जात, गरीबी-मातबरी , नौनु -नौन्याली की शिक्षा , स्टैण्डर्ड ऑफ़ लिविंग ko क्वी भेद नि थौ,पण तबी बि हम समधी-समधन नि बौनी सक्वां
कारण ---हमारा बच्चों न साफ़ बोली दे , " हम अपड़ी जिदगी का मालिक खुद छवां, माँ बाप तैं क्वी अधिकार नि च की हमारी जिन्दगी का खास निर्णय ल्ह्यावन..We shall take our decision for our own marriage "
और हमारा नौनी नौन्याल न अंतरजातीय विवाह/ब्यौ कौरी अर सौब कुछ ठीक होई पण फिर बि हम तैं समधी-समदण नि बणन द्याई
अब हम सातों जनम की जग्वाळ मा छवां बल सैत च ...

ZWOLFTE LEKTION: TWELFTH LESSON: BARON PATH: बारों पाठ


आवा गढ़वाली शिकला 
LET US LEARN GARHWALI THROUGH GERMAN  AND  ENGLISH 

ZWOLFTE LEKTION: TWELFTH LESSON: BARON PATH:  बारों पाठ 
 
 
                                                                By:   Khushal Singh Rawat Mumbai
continue from page 1.
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Ich will es gern an die Tafel schreiben,aber ich kann die Kreide nicht finden .
I will gladly write it  on the blackboard, but I cannot find the chalk.
Mi  yethai patee ma khushi wheki lekhi deuloo, par mithai  khadiya ni milnoo cha. 
मि येथे पाटी म ख़ुशी व्हे कि लेखी  द्वलु , पर मि थै  खड़िया नि मिल्नू च.

Der Lehrer schreibt den Satz an die Tefel.
The teacher writes the sentence on the blackboard.
Mastar saab wakya patee ma lyakhand.
मास्टर साब पाटी (बोर्ड) मा ल्यखंद 


Der Schuler versteht es immer noch nicht.
The scholar even yet does not understand it.
Padhunu waloo abhi tak ye tai ni samujhu.
पढ़णु वलू अभी अभी तक ए तै नि समुझु . 

Er sagt: " Ich verstehe diesen Satz nicht. Wollen Sie ihn mir bitte erklaren"
He says: " I don't understand this sentence, will you please explain it to me"
Wu bwanooch: "me tai yu wakya samajh ma ni anoo ch, tum mithai samajha dela"
वू ब्व नू च: " मि तै यु वाक्य समझ म नि अणु च, तुम मि थै समझा देला "
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Ich kann das nicht tun. Konnen Sie es fur mich tun ?
I can not do that. Can you do it for me ?
Me woo ni kairi sakdu. kya tum mikhni kairi sakdawa ?
मि वू नि कैरि सकदु. क्या तुम मिखणि   कैरि सक्दावा ?

Er kann nicht kommen. Sie konnen uns nicht verstehen.
He cannot come. They cannot understand us.
Wu ni ayee sakdoo. Wu ham tai ni samajhi sakda.
वू नि आई सक्दू वू हम तै नि समझि सकदा . 

Ich will einen Brief schreiben. Wollen Sie rauchen ?
I want to write a letter. Do you want to smoke ?
me yek chithi lyakhnu chandu.  Kya tum tamakhu peen chaana chhawa ?
मि एक चिठि ल्याख्णु  चान्दु . क्या तुम तमाखू पीण चाणा छावा ? 

Er will es nicht tun. Sie wollen morgen kommen.
He does not want to do it. They want to come tomorrow.
Wu ye thai  ni karan chanoo cha. Wu parbaat aan chanaa chhan.
वू ए थै नि करण चाणू चा. वू परबात आण चाणा छन . 

Ich muss jetzt gehen. Sie mussen bald wieder kommen.
I must go now. You must soon come again.
Mit ab jaroor laagu. Tum jarroor pheeri aiyaa.
मित अब जरूर लागू . तुम जरूर फिरी ऐंयाँ
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Ich kann diesen Hut nicht tragen. Er ist zu gross fur mich.
I cannot wear this hat . It is too big for me.
Me ye twapla तै ni pairee sakdu. Yu meekhani bhout badoo cha.
मि ए ट्वापला तै नि पैरी सकदु . यु मिखनी भौत बडू चा. 

Marie kann das neue Kleid nicht tragen. Es ist zu lang fur sie.
Mary can not wear the new dress. it is too long for her.
Mary nai kapdaa ni pairee sakdi. Ya ween khunee bhout lambi cha.
मैरी  नै कपडा नि पैरी सकदी. या वीं खुणी भौत लम्बी चा.

Die  Katze will hinaus, aber die Tur ist zu.
The cat wants to get out, but the door is shut.
Biralee bhair jaan chani cha, par darajoo band cha.
बिरली भैर जाण चाणि चा. पर दरजू बंद चा.

Ich kann das Brot nicht schneiden. Warum nicht ? Well ich kein Messer habe.
I can not cut the bread. Why not ? Because I have no knife.
Me roti ni kati sakdu. Kilai na ?Kilai ki meem chakoo neech.
मि रोटि नी काटि सकदु. किलै ना ? किलै की मीम चकू नीच.  

Warum konnen Sie den Hut nicht tragen?
Why can't you wear the hat ?
Tum twapla kilai ni pairi sakda ?
तुम ट्वापला किलै नी पैरी सकदा  ? 

Warum kann Frau X den Hut nicht kaufen ?
Why cannot Mrs X buy the hat ?
Misej X twapla kilai ni le sakdee ?
मिसेज x ट्वा पला किलै नी ले सकदी?

Warum kann Marie das neue Kleid nicht tragen ?
Why can't Mary wear the new dress ?
Mary kilai nai kapda ni pairee sakdee ?
मैरी किलै नै कपडा नी पैरी सकदी ? 

Was will die Katze ? Was will Frau X kaufen ?
What does the cat want ? What does Mrs X want to buy ?
Biralee tai kya chaand ? Misej X kya kharidna chaand ?
बिरली तै क्या चांद ?   मिसेज X  क्या ख़रीदन चांद.?
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END OF CHAPTER  12. CONTINUE ON LESSON THIRTEENTH.

Work in Lok Sabha !लोकसभा मा क्य काम-काज हूंद भै ?


लोकसभा मा क्य काम-काज हूंद भै ?
 
( Garhwali Satire, Garhwal Humorous essays, Satire in Uttarakahndi Languages, Himalayan Languages Satire and Humour )
                       Bhishm Kukreti
                अच्काल पार्लियामेंट मा रोज इथगा हंगामा/घ्याळ होंद बल लोकसभा या राज्यसभा खुल्दा नीन
अर दुसर दिनों बान मुल्तबी/ 'ऐडजौर्नड फॉर द डे' करे जान्दन. बस याँ से पारिलियामेंट सदस्य बिसरी गेन , भूलि गेन
की लोक सभा या राज्य सभा मा काम काज क्य हूंद ? एम् पीयूँ तैं अब पता इ नी च बल लोक सभा या राज्य सभा सदस्यों मा क्वी कम
बि होंद.
             अब सी पर्स्या की त बात च . परसी मि अपुण एम्.पी (राज्य सभा सदस्य) दगड्या कु इख ग्यों बल मि बि ज़रा पार्लियामेंट
देखूं अर उख क्य क्य होणु च वांको जायजा बि ल्हीयूँ. अब जन कि मेरो दगड्या बिना बातौ अहिंसक मनिख च
त वै तैं कमांडो की सेक्युरिटी त छ्वाड़ो एम् पी होंउस कुणि एक चौकीदार बि णि मील. म्यार दगडया एम्. पी. न
बीस पचीस माख मारिन, दस पन्दरा मूस पकड़ीन अर पिंजरा मा बन्द कौरिन अर औथेरिटयूँ तैं बि दिखाई
तबी बि मेरो दगडया तैं जेड त छ्वाड़ो ए सेक्युरिटी बि नि मील उलटां एक चौकीदार छौ वै तैं बि के हैंक
नगर पालिका सेवक को इख भेजी दे . त मै तैं दगड्या एम् पी क इख जाण मा क्वी अट्टवांस/दिक्कत/ बेरियर
नि होंदी , जब जाओ ज़ब आओ . उन अच्काल इन मुस्किल ही होंद पण गांधी जी क सचा च्याला हों त ह्व़े बि जांद .
म्यार दगड्या अहिंसक एम् पी. ईं बगत बि जंग्या अर बन्याण मा पुराणो मर्फी कलर टेलीविजन (यू मीन भेंट मा दे छौ)
          मा हिस्टरी चैन्नेल मा क्वी इतिहासौ सीरियल देखणु छौ. विचारू अहिसक गाँधी बादी एम् पी अबि बि माणदो बल 'हिस्टरी रीपीट्स इटसेल्फ़ बेकौज
नो बडी लर्न्स फ्रॉम हिस्ट्री .'
           मीन ब्वाल ," हे! भै एम् पी ! काम पर नि जाण ?"
           अहिंसक गांधी बादी एम् पी न पूछ, " यू काम क्य हूंद ?"
        " हैं ! पार्लियामेंट मा कथगा इ काम होंदन. जन कि जु तुम सरकारी पार्टी मा छवां त मंत्री जी क बोल्यां पर ताळी बजाण अर मेज थपथप्याण
ही काम होंद. " मीन ब्वाल
           अहिंसक गांधी बादी एम् पी न पूछ, : अछा ! अर हौर काम ?"
           मीन अहिंसक गांधी बादी एम् पी तैं याद दिलाई , " अर जु तुम विरोधी पार्टी क एम्. पी. छवां त बस जब बि सरकारी एम् पी या मंत्री अपण बयान
दीण बिस्याई कि घ्याळ करण बिसे जाण . कुछ नी त शेम शेम बुलण बिसे जाण."
                  " बस य़ी काम च ? " अहिंसक गांधी बादी एम् पी न फिर पूछ
           " नही हौर काम बि छन जं कि कबि कबि टी वी कैमरा उना नि हो त जरा सी ऊँगी बि ल्याओ ." मीन खुलासा कार
          अहिंसक गांधी बादी एम् पी न ब्वाल , " ए मेरी ब्व़े ! और अच्छा उख उंगण बि पड़दो? हौर ..?"
    मीन फिर से याद दिलाणे पुट्ठ्या जोर लगाणे/ कोशिश करी , " नै जु पार्लियामेंट मा हो हल्ला , घ्याळ, घपरोळ नि होणु राउ
त एम्. पी. सरकारी मंत्री से सवाल बि पूछी लीन्दन अर मन मारिक मंत्री जीयूं तैं सवालू जबाब बि दीणी पड़दन ."
          " हे नागराजा ! हे ग्विल्ल! बस / य़ी काम ! पण क्य क्वी बि एम् पी कुछ बि सवाल पूछी सकद ?" अहिंसक गांधी बादी एम् पी न पूछ
            "  ना क्वी बि एम् पी अफिक सवाल नि पूछी सकद . एम् पी तैं वैकी पार्टी टैम दींद अर तबी एम् पी सवाल कौरी सकद ."मीन खुलासा कार
           अहिंसक गांधी बादी एम् पी न अगनै पूछ, " त अच्काल क्य हो णु च उख ..?"
          मीन बथाइ,' अच्काल त द्वीइ याने राज्य सभा अर लोक सभा मा कुछ नि होणु च बस सभा अध्यक्ष खुर्सी मा जनी बैठदन तन्नी पार्लियामेंट
मा घ्याळ/ घपरोळ होण बिसे जांद. स्पीकर सब्युं तैं शांत हूणे सल्ला दीन्दन पण ना त हल्ला ना ही घ्याळ अर ना ही घपरोळ बन्द होंद अर स्पीकर
 पार्लियामेंट तैं दुसर दिनु खुणि अडजोर्न करी दीन्दन . अच्काल बस ई होंद .."
              " य़ी स्पीकर क्य होंद? क्या यूंक काम बुलणों क काम हूंद .", अहिंसक गांधी बादी एम् पी न टक्क लगैक पूछ
             मीन बिंगाणों कोशिश कार," ना ! ना ! स्पीकर का मतबल स्पीक करण नी च मतबल स्पीकर इख सुणदो च , बुळणों काम त एम् पीज. या मंत्र्युं क होंद.
पारिल्यामेंट मा स्पीकर स्कूल कु क्लास मोनिटर जन होंद "
अहिंसक गांधी बादी एम् पी न इन पूछ जन बुल्यां कै हैंको प्लैनेट बिटेन अयूँ ह्वाऊ , " एक बात त बतादी कि य़ी राज्य सभा, लोक सभा या पार्लियामेंट क्य होंदन भै?"
             अब मि क्य बथों बल लोक सभा, राज्य सभा या पार्लियामेंट क्य होंद. जै देस कु पार्लियामेंट मा रोज/हर घड़ी अडजोर्न पर अडजोर्न ही होणा राल त उखाक
एम्.पी एक दिन बिसरी ही जाल बल पार्लियामेंट क्य होंद! अर पार्लियामेंट मा क्य काम काज होंदन
Garhwali Satire, Garhwal Humorous essays, Satire in Uttarakahndi Languages, Himalayan Languages Satire and Humour
to be continued in next issue.....
Copyright@ Bhishm Kukreti , Mumbai 

Sunday, December 25, 2011

SatyDev Dubey: A Tribute सत्यदेव दुबे :दुन्या का एक महानतम स्वांगकार /नाटककार


 सत्यदेव दुबे : दुन्या का एक महानतम स्वांगकार /नाटककार
 
        (Tribute To Great Dramtist , महान नाटककार तै पश्त्यौ )
 
 
                          भीष्म कुकरेती
        
 
                      जु गढ़वाळी -कुमाउनी भासौ साहित्यकार, स्वांगकार (रंगकर्मी) अर फ़िल्मकारूं मकसद
कुमाउनी-गढवाळी भाषौ विकास करण च त यूँ तैं कुछ इन करण पोड़ल की जु भैर वाळ बि गढ़वाळी-कुमाउनी
साहित्य/स्वांग/फिलम की छ्वीं लगावन मतबल भैरवाळ बि गढ़वाळी-कुमाउनी की बात कौरन.
अर यांखुणि कुमाउनी -गढवाळी साहित्य कर्मी , रंगकर्मी , फिलमकारुं को भग्यान सत्य देव दुबे क काम काज को
छाण निराळ/ निरीक्षण करण जरोरी च . किलैकि महान मनिखुं छ्वीं प्रेरणा बान भौत काम की बात होंदिन.
यो ठीक च सत्य देव दुबे क काम क्लासिक स्वांग या फिलम बणोऊण मा च पण हम तैं टक्क लगाण चयेंद
बल क्लासिक/नया ढर्रा क साहित्य/स्वांग से इ मास साहित्य अर मास स्वांगूं /फिल्मों निर्माण होंद .गढवाळी -कुमाउनी
भाषौ अन्दाळ/परेशानी या च बल यूँ भाषों मा क्लासिक स्वांग या फिल्मों बारा मा घड़ये/सुचे ही नि जांद.हाँ कबि जब
भगवान् स्वरुप ढौंडियाल का 'अदालत' अर 'मंगतू बौळया' या राजेन्द्र धषमाणा क 'अर्ध ग्रामेश्वर' स्वांग खिले ग्याई छ्या
त बात इ कुछ हौरी छे
             अच्काल अनुज जोशी क 'बाघ' देखिक बुले सक्यांद बल फिल्म कर्मी बि नया ढर्रा की सार्थक फिलम बणाणे कोशिश त करणा इ छन भै!
कुमाउनी-गढवाळी जन भाषों क साहित्यकार/रंगकर्मी/फिलम कर्म्युं तैं सत्य देव दुबे से प्रेरणा ल़ीण जरोरी च .
              सत्य देव दुबे (१९३६-२०११) क्या नि छौ वो एक थियेटर कर्मी, स्वांग लिख्वार; स्वांग करदार / कलाकार; स्वांग निर्माता, फिल्म
लिख्वार, फिल्म स्क्रीन-प्ले लिख्वार; फिलम करदार/कलाकार छयो.
                  बिलासपुर मा जन्म्युं सत्यदेव मुंबई आई त यांक बान छौ बल क्रिकेटर बौणल . क्रिकेट मा सत्यदेव दुबे न क्वी चौका-छक्का
त नि लगेन पण नात्कुं मा खूब धूम मचाई .
              इब्राहिम अलका जी दगड मुंबई मा रंगकर्मी राई अर जब अलका जी दिल्ली ऐ गे त सत्य देव दुबे न अलका जी क
थियेटर ग्रुप से कथगा इ नाटक मंचित करीन.
                सत्यदेव दुबे न गिरीश कर्नाड क ययाति अर हयबदन , मोहन राकेश को आधे अधूरे; विजय तेंदुलकर क लिख्युं खामोश अदालत जारी है , बादल सरकार को एबंग इन्द्रजीत,
पगला घोडा, चन्द्रसेखर कु और तोता बोला अर कत्ति विदेशी भाषाओं क नाटक निर्माण करीन
सत्य देव दुबे क कारण ही धर्म वीर भर्ती कु अंधा युग मचित ह्व़े अर यू नाटक हिंदी टकूं मा एक मील स्तम्भ च.
                    सत्य देव दुबे न मराठी फिल्म 'शांतता कोर्ट चालु आहे ' अर द्वी छ्वटि फिलम अपिरचित विन्ध्याचल अर तंग इन चीक फिलम बि बणेन
सत्यदेव दुबे न निशांत, जूनून अर कलयुग हिंदी फिल्मों का डायलौग लेखिन. अंकुर, भूमिका अर विजेता हिंदी फिल्मुं डायलौग अर पटकथा लेखिन. दुबे न मंडी क पटकथा बि लेखी .
           सत्य देव दुबे तैं पदम भूषण पुरुष्कार बि मील
दुबे तैं कथगा इ हौर सरकारी अर गैर सरकारी पुरुष्कार जन बेस्ट स्क्रीनप्ले , बेस्ट डायलौग अवार्ड बि मिलेन
                   हिंदी क मामला मा दुबे साफ़ छौ की यदि हिंदी राष्ट्रीय भाषा च त हिंदी क ढौळ यूं पी अर एम् पी की ढौळ नि होण चएंद तबी त
सत्य देव दुबे की नाटकूं हिंदी भाषा मा अडगें की/क्षेत्रीय भाषाओं क पुट होंद थौ .
                 अंगरेजी भाषा क मामला मा बि दुबे साफ़ छौ बल अंग्रेजी अब हिंदुस्तान की बिभाशा च त अंग्रेजी मा बि साहित्य/ड्रामा उनि प्रेम से , बौळ(हवस) से
रचे जाण चएंदन जन हम हिंदी, मराठी, कन्नड़ी कन्नादी साहित्य/ड्रामा रचदवां . गिरीश कर्नाड को बुलण छ बल इलै त सत्य दुबे ण अंगरेजी स्वांगु/
नाटकूं निर्माण बि करी
               सत्यदेव दुबे कथगा इ कलाकारून तैं स्वन्गुन मा जनम दे या यूँ नाटककार /कलाकारूं तैं नयो जनम दे जन की अमोल पालेकर,
अमरीश पुरी, सोनाली कुलकर्णी , गोविन्द निहलानी, हिदायत स्वामी आदि .
कत्ति नाटककारूं बुळण छौ बल सत्य देव दुबे अंग्रेज निर्देशक जोआन लिट्टलवूड जन संज्ञान दीन्दन पण दुबे का प्रेमी बुल्दन बल सत्य देव दुबे त बस सत्य देव दुबे छौ
                सत्य देव दुबे तैं पशत्यौ (मरणोपरांत श्रधांजलि) दींद दें हम तै दुन्या क महान नाटक कारुं जन अयेससाइलस, गुआन हँगिंग शेक्सपियर, इस्बन, कालदीरों, लोप वेगा, बर्नाड शौ,
अगस्त विल्सन, बक्केट, चेखव, इस्बन, टेनिसी विलियम्स , एडवार्ड अल्वी , युजिन नील, कैरल चर्चिल, लॉसन, डा टेश ओन्यूइ, भवानी दत्त थपलियाल, स्वरुप ढौंडियाल तैं बि पश्त्यौ (श्रधांजलि) दीण इ चएंद.
  
Copyright@ Bhishm Kukreti 
 

Am I Old ? क्य मि बुढे गयों ?

क्य मि बुढे गयों ?
                           
                भीष्म कुकरेती
 
(Ggarhwali Satire, Uttarakhandi Satire, Himalayan satire)
        फिर बि मै इन लगद मि बुढे गयों!
          ना ना मि अबि बि दु दु सीढ़ी फळआंग लगैक चढदु . कुद्दी मारण मा अबि बि मिंडक में से जळदा छन.
फाळ मारण मा मि बांदरूं से कम नि छौं . काची मुंगरी मि अबि बि बुकै जान्दो अर रिक अपण
नै साखी/न्यू जनिरेशन तैं बथान्दन बल काची मुंगरी कन बुकाण सिखणाइ त भीसम मांगन सीखो.
कुखड़ , मुर्गा हर समय खाण मा म्यार दगड क्या सकासौरी कारल धौं! बल्द जन बुसुड़ बिटेन
भैर नि आण चांदो मि रुस्वड़ मा इ सेंदु जां से टैम कुटैम खाणो इ रौं . दंत ! बाघ का या कुत्ता का
इन पैना दांत नि ह्वाल जन म्यार छन . इना गिच मा रान म्यार दान्तुं बीच मा आई ना कि रान को बुगचा
बौणि जांद . अचकालौ जवान लौड़ उसयाँ बुखण /खाजा बि बुकावन त ऊँ तैं कचै , डीसेंटरी ह्व़े जांद.
अर मि अबि बि अध्भड़यीं लुतकी , अध्काचू अंदड़-पिंदड़ पचै जांदू. म्यार अंदड़ अर जंदरौ पाट भै भुला लगदन.
पण फिर बि मै इन लगद मि बुढे गयों!
 
                         अब  द्याखो ना जख पैलि लोग मै से मिल्दा था त हाई ! हेल्लो! हाउ डू यू डू? कैरिक सिवा बर्जद छया अच्काल जब
बिटेन मि रिटायर होंऊ त लोग बाग़ हाथ मिलाणो जगा पर म्यार खुटुन्द सिवा लगौन्दन. ज्वान, अध् बुधेड़
जनानी खुटुन्द सिवा लगावन त बुरु नि मन्यान्द पण जब बौ की उमरवाळी कज्याण तुम तैं खुटुन्द सिवा
लगाण बिसे जाव त कखी ना कखी मगज मा बात बैठी जांद , मन मा आई जांद बल मि कखी बुड्या त नि ह्व़े ग्येऊँ .
पैल जब क्वी अपण छ्व्ट या बड़ा ज्वान नौंन -नौन्याळी क परिचय करांद छया त बुल्दा छया, " बेटा अंकल को
हाई करो ! हल्लो! करो!" अर अब !!! य़ी लोक बुल्दन , " बेटा ! दादा जी तैं सिवा लगाओ , प्रणाम करो जैसे तुम
अपने ग्रैंड मदर याने नाना नानी को प्रणाम करते हो". अर मै कुण हुकुम बि दीन्दन बल ," कुकरेती जी ! आप अब बुजुर्ग ह्व़े गेवां त
ज़रा बच्चों तैं आशीर्वाद दे दवाओं !'. बस एकी साल मा मि अंकल से ददा ह्व़े गयों ? . रिटायर हूण से पैल अंकल
अर रिटायर हूणो परांत ददा, ग्रेण्ड पा?
इथगा फरक ?
          जब तलक मि रिटायर नि ह्व़े छौ त मि कखी बि भैर देस घुमणो जान्दो छौ त क्या जवान क्या बुड्या मै से टूरीस्ट प्लेस की
पूरी जानकारी लीन्दा छया अर अब ! ये मेरी ब्व़े ! अब त लोक बाग़ मी तैं कख घुमणो जाणो अर कख नि जाणो बारा मा
मै अड़ान्दा छन, सिखांदा छन . अब द्याखो ना रिटायर हूण से पैल मीमा सात आठ इयर लाइन्स की फ्री फ़्लाइंग स्कीम
का टिकेट छया अर मि वांको फैदा अब ल़ीणो इ रौंद. परसि पुण मि फ्री स्कीम मा बैन्कौग अर पटाया ग्यौं. बस जनि कत्ति
पछ्याण वालूं तैं पता चौल बल मि बैन्कौग अर पटाया टूर पर ग्यौं त हरेक मै तैं ना म्यार नौनु अर मेरी नौनू ब्वारी तैं
समझाणा बल भीषम की या उमर च बैन्कौग अर पटाया जाणे की . अरे भीष्म तैं त बदरीनाथ , साईं बाबा , वैष्णो देवी क
जात्रा पर जाण चएंद . अर छै मैना पैलि जब मि नौकरी मा छौ अर मि मकाओ गे छयो त य़ी लोक मकाओ मा छोरी कन होंदन,
मकाओ की वैश्या अर भारत की वेश्याओं मा क्या फरक होंद अर मी जब मकाओ की वैश्याऊँ क नख सिख वर्णन करदो छौ त
बड़ा रौंस/मजा से सुणदा छया अर ज़रा कम वर्णन करदो छौ त कत्ति नराज बि होंदा छया की मि ठीक से वैश्याऊँ वर्णन नि करणों
छौं अर अब य़ी लोक मै त ना म्यार नौनु-ब्वारी तैं सलाह दीणा छन बल भीषम की उमर बद्रीनाथ-केदारनाथ जात्रा की च.छै इ मैना
मा इथगा फरक !
             अब द्याखो ना ! सी पर्सी मि उद्योगपति काल़ा जी क कौकटेल पार्टी मा गयों . बड़ो लौन मा पार्टी छे . भौत ही बढ़िया
इंतजाम छौ. पण यीं दें म्यार दगड कुछ अजीब हे ह्व़े . जु बैरा शराब लेकी पौणु/मैमानू खुणि ट्रे मा शराबौ गिलास
ल्हेकी घुमणा छया वो मै देखीक ही हौर बैरौं तैं भट्यान्दा छया बल , " अरे जौनी ! या अरे पोनी !अंकल के लिए कोल्ड ड्रिंक लाओ".
मतलब बैरा बि ...
        पार्टी मा निखालिस कौकटेल को ख़ास इंतजाम छौ. मेरी इच्छा ह्व़े की मि उख कौकटेल 'ऑन द रौक'
(रल़ो मिसौ वळी शराब अर सिरफ़ बर्फ) पीउं . पण जनी मि कौकटेल कौंटर मा ग्यों क़ि पछ्याणक वल़ा बुलण बिसे गेन बल ,
: कुकरेती जी ! आपक वास्ता कोल्ड ड्रिंक को कौंटर सी प्वार तरफ च .". अर पैलि य़ी लोक मी मांगन कौक्स रिवाइवल, मोड़ी मिस्ता,
कैफ ज्यूरिक , हैंकि पिंकी, बे ब्रीज , ब्लू हवाई जन कौकटेल क़ि पूरी जानकारी लीन्दा छया . अर अब यि लोक बुलणा छन बल " कुकरेती जी ! आपक वास्ता
कोल्ड ड्रिंक को कौंटर सी प्वार तरफ च .."
इथगा फ़रक !
        ड़्यारम बि कुछ इनी हिसाब च . मि बीसेक दिनु बान देहरादून जाणो छौ त मि बाजार बिटेन पछ्याणक दूकान बिटेन नीलो, पिंगल़ो, हूरो, लाल
रंग की चार टी शर्ट लायुं . श्याम तलक मेरी घरवाळी अर ब्वारी दूकान मा गेन अर मटमैल्या , कनफणि सी रंग की टी शर्ट बदली कौरिक ल़े आइन .
जब मि नाराज होऊं त कज्याणिन ब्वारी अगनै करी दे अर नौने ब्वारी बुन बिस्याई, " पापा ! अब इस उमर में आप पर फास्ट कलर की टी शर्टें
सूट नहीं करतीं हैं अब तो आपकी उमर सोबर कलर कपड़ों की है. फास्ट कलर विल नॉट सूट यू ."
मतबल छै सात इ मैना मा मेरी उमर फास्ट कलर (भड़काऊ ) की नी रै गे ! .
      मेरी समज मा नी आणू बल अबि त मि सरैल से तंदुरस्त छौं फिर यि लोक रिटायर हूण तैं बुड्या होणे निसाणी किलै समजणा छन ?
ज़रा तुम इ बथावदि बल क्य मि क्य मि बुढे गयों ?
 
 
Copyright@ Bhishm Kukreti

Needle Folk Dance-Song of Uttarkhand


Syun/ Sui Nach Gan:  A Garhwali Folk Dance-Song of Catching Needle by Mouth and Dancing

(Folk Dance of Garhwal, Traditional Dance of Uttarakhand, Himalayan, Indian Folk Dances)
                                  Bhishm Kukreti
  Syun  Nach Gan or  Needle Dance Song of Garhwal is very artful, entertaining ,crafty and it requires dancing capability ,dancing caliber and dancing competency . For commencing the Syun/Sui/needle dance, the needle or needles are kept on a table of stone above the ground.  The female dancer fist keeps needle on her mouth or on tongue and then keeps on the table or on the stone kept on higher position of ground. While dancing the professional class dancer (Mirasan or Badan) catches Syun/sui/needle by tongue or mouth by keeping her back on ground side. Many times, Miraan or Badan takes a round jug (lutya), glass (gilas) by their teeth too at performing Sui/needle dance.  The body of female dancer requires much flexibility for performing the Syun/Sui/needle dance as the dancer has to bend and dance with caliber.
     The Badi or Mirasi plays musical instrument as Dhulki or Hudkee and sings the song while female dancer dances the needle dance. The dancer catches needle at the time of intermission of song.  The badi/mirasi plays Dholki/Hudki with very slow rhytham while dancer is catching needle by her tongue or mouth.
 There is no fix type of song for the Syun/Sui/needle Garhwali folk dance. However, modst of the songs are agile in nature and entertaining too.
 Here is an example of syun/Sui/Needle Folk dance of Garhwal,
स्यूण/सुई नाच -गाण

हे लठयाळी दादू कैकी बौराण छे ?
धुंवा सी धुपळी , पाणी सी पथळी
केल़ा सी गळखी , नौण सी गुंदकी
दिवा जसी जोत , कैकी बौराण छे ?इनी मेरी होंदी जिकुड़ी मा सेंदी
बादळ सी झडि दुबला सी लड़ी
भ्यूंळ सी सेटकीलाबू सी ठेलकी
नाक मा  तोताजीभ मा क्वील
आखौं मा आगगाळऊँ मा बुरांस .
हूड़की सी कमर , कैकी बौराण छे ?
इनिम्मेरी हुंडी हथकूळी मा सेंदी
बांदू मा की बांद , चांदु मा की चाँद
चीणा जसी झाम , पाळीण्गा सी डाळी
हिसर की सी डॉळी , कैकी बौराण छे ?
घास काटद काटद बणि छे गितांग
स्वामी गें माल चिट्ठी आई नी 
कनू निर्दयी होलू जु बिसरदू ईं तैं
हे लठयाळी दादू कैकी बौराण छे ?

Garhwali Folk Song for Needle Dance

Whose wife is this lady?
(She is as )
Airy as smoke, thin as water
Smooth as banana, soft as butter
Bright as wick light of lamp, whose wife is this lady?
If she were my wife, I would have kept her on my heart.
She is as
Rain of cloud, strand of green grass
Flexible as branches of Bheemal, thelki od leaves
Bud of Fyunli, Whose wife is this lady?
Nose as parrot , tongue as Koyal/cooko
Fire on eyes, cheek as Burans /Rhododendron
Waist is Hudki,   Whose wife is this lady?
If she were my wife, she would be on my palm
Beautiful most of beautiful women, the moon of moons
Ear of Chani cereal, tender as spinach plant
Fruit of Hisar, whose wife is this lady?
She has become a singer by cutting grass or her work has been grass cutting only
Her husband has gone to plains/city, did not post a letter at all
He is cruel that forgotten her  
Whose wife is this lady?
Song Source: Dr Govind Chatak and Dr shiva Nand Nautiyal

Copyright@ Bhishm Kukreti, Mumbai 2011
To be continued- Folk dance of Garhwal, Traditional Folk Dance –Song of Uttarakhand, Himalayan Folk Dance Song series …..