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Thursday, March 23, 2017

2017 का विधानसभा चुनाव का जोक्स , हॉंसोड्या छौंका

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2017 का विधानसभा चुनाव का जोक्स , हॉंसोड्या छौंका 
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  चबोड़ , चखन्यौ , चचराट अनुवाद  :::   भीष्म कुकरेती    
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भाजपा की जोरदार , शानदार जीत से उपज्यां कुछ जोक्स इंटरनेट माँ इना ऊना फुळयां छन -
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अखिलेशन राहुल गांधी दगड़ गठबंधन कौरिक हुस्यारी दिखाई।  अब अखिलेश हार का वास्ता  राहुल गाँधी पर भगार लगै सकुद अर लोग सत्य बि मानि ल्याला  (सर जडेजा )
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कांग्रेस की आत्मनिरिक्षण बैठक माँ -
राहुल गाँधी पंजाब की जीत का जुम्मेबार छन किन्तु उत्तर प्रदेश माँ हार का कारण कांग्रेसी कार्यकर्ता जुम्मेवार छन , सब कार्यकर्ताओं तै टा जिंदगी  कांग्रेस से भैर करे जावो (भीष्म कुकरेती )
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एक खबर अनुसार -पंजाब का कांग्रेसी नेताअरमिंदरन राहुल गांधी तै फूलों गुच्छा भेजी बल धन्यवाद जो आप चुनावी कैमपेयन मा पंजाब नि ऐन। (लोआ कुट्टीमा )
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राहुल गांधी की सक्यात का बारा  मा अब कै तैं संशय ,कन्फ्यूजन ,  घँघतोळ नि रै गे बल राहुल गांधी भाजपा तै जितै सकदन।  पता नि सोनिया जी पर क्या बितणी ह्वेल धौं। (केतन भाटे )
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केजरीवालन फिर से अपणी हार  का जुम्मेदार प्रधान मंत्री तै ठहराई , मोदी जीन जुम्मेवारी स्वीकार कार 
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Copyright@ चोरिक माल च जी  , Mumbai India ,  13 /3 / 2017 
*लेख की   घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख में  कथाएँ चरित्र , स्थान केवल हौंस , हौंसारथ , खिकताट , व्यंग्य रचने  हेतु उपयोग किये गए हैं।

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चुनाव हारण पर भगार , दोषारोपण , बहानेबाजी का गुर

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चुनाव हारण पर भगार , दोषारोपण , बहानेबाजी का गुर 

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  चबोड़ , चखन्यौ , चचराट :::   भीष्म कुकरेती    
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यदि आप चुनाव हार गेवां तो तौळs कै  बि कारण से छुटकारा पाए जै सक्यांद -
१- जनता की समझ मा हमर बात नि ऐ कि हमन  कथगा कार उन्कुण 
२-विरोधी पार्टीन हमसे ज्यादा , बिंडी , भौत बिंडी झूठा आश्वासन देन 
३- हमर ईख शब्दकोश नि छौ  तो हम नया नया आश्वाशन नि दे  सक्यां 
४- विरोध्यूंन झूठी अफवाह फैलाई कि हमन गुंडों तै टिकेट देन 
५- हमन दिल्ली मा इथगा काम कार अर विज्ञापन  गोआ अर पंजाब मा बि देन पर ईं  अनपढ़ जनतान  हमर झूठ विज्ञापनों पर विश्वास ही नि कार 
६-जितण वळी पार्टिन  धन अर बाहुबल को प्रयोग हम से अधिक कार 
७- उंका ज्यादा मंत्री चुनावी कैम्पैन मा छा 
८- प्रधान मंत्रीन गैर पारम्परिक ढंग से रैली करिन 
९- जातिवाद का खेल चल 
१० - हमर विरोधी EVM मशीन की सहायता से चुनाव जीत 
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Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai India ,  13 मार्च 2017 
*लेख की   घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख में  कथाएँ चरित्र , स्थान केवल हौंस , हौंसारथ , खिकताट , व्यंग्य रचने  हेतु उपयोग किये गए हैं।

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सभी को फूलदेई की शुभकामनायें।

फूल देई-छम्मा देई, दैंणि द्वार- भर भकार,
यौ देळी  कैं बार-बार नमस्कार।
      एक लोक गीत         
           फूलदेई -फूलदेई -फूल                 संग्रान्द   
           सुफल करी नयो साल तुमको श्रीभगवान
            रंगीला सजीला फूल फूल ऐगी , डाल़ा बोटाल़ा  हर्या ह्व़ेगीं
              पौन पन्छ , दौड़ी गेन, डाल्युं फूल हंसदा ऐन ,
                तुमारा भण्डार भर्यान, अन्न  धन बरकत ह्वेन 
               औंद राउ ऋतू मॉस , होंद राउ सबकू संगरांद 
               बच्यां रौला तुम हम त फिर होली फूल संगरांद 
               फूलदेई -फूलदेई -फूल                 संग्रान्द   
फूल संगरांद का यह दिन आज उत्तराखंड में कन्याओं द्वारा प्रसन्नता के साथ मान्या जाता है कन्याएं बैसाखी तक रोज सुबह सुबह देहरी में फूल डालती हैं 
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 आभार स्व श्री शिवा नन्द नौटियाल (लोकगीत )
        एवम श्री कैलाश पांडे 

सतपाल महाराज जी ! नै कज्याणि बिगरौ मा पुराणि कज्याण नि बिसरि जैन हाँ !

चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती 
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(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )
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                 अचकाल क्या बरसों से रिवाज च बल नै नै कज्याणि बिगरौ मा मरद पैलाक कज्याण बिसरि जांद।  पौड़ी क्षेत्रौ सांसद सतपाल महाराज जी का बि इनि हाल दिखेणा छन।  पुराणा जमाना मा हरम संस्कृति मा पुराणि राणि तैं नबाब  साबौ दर्शन कर्याँ दसियों साल ह्वे जांद छा अर नबाब साब हर साल नै नै खवानीस दुल्हन तैं हरम जोग करदु छौ।  तथाकथित रेल पुरुष की फोटो दिखुद अर मि तैं यि नबाबजादा याद ऐ जांदन जु पुराणि घरवळिक हिफाजत त करदा नि छा अर नै नै कज्याण्युं कुण नै महल , नै बौड़ी बणान्दा छा । पुराणि कज्याण कुठड़ि पुटुक सड़णि ह्वावो , दम तोड़णि ह्वावो अर बुड्या   नै कज्याण लाणो विचार सरा गां वाळ तैं बताणु कि मीन नै बिगरैलि बांद लाणाइ।  सतपाल महाराज की याद करदु अर मि तैं इतिहास का उ दिन याद ऐ जांदन जब पैल रणिवास मा दस दस कज्याण सालों से राजा प्रतीक्षा करणा रौंदि छे कि राजा आवो त राजकुमार -राजकुमारी पैदा ह्वावन पण राजा च कि अपण नपुंसकता  छुपाणो बान , अपणि इम्पोटेंसी लुकाणो वास्ता हर साल दस नई दुल्हन लांदो छौ। सौ राण्युं नपुंसक पति महाराज  दुनिया मा बुलणु रौंद छौ मि  परजा तैं राजकुमार दीणो बान दूर देस से नई राणि लाणु छौं।  सतपाल महाराज की फोटो देखिक मि तै वै कजे याद ऐ जांद जु छौंद भूख -तीस से बेहाल बच्चों देख भाळ करणम असमर्थ ह्वावो पण चौथु ब्यौ त्यारी मा व्यस्त रावो।
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  सतपाल जी यदि महाराज नि हूंद छा त सचमुच मा म्यार मुखान कुजाण क्या क्या गाळी -लाब -काब ऐ जाण छौ धौं। 
सतपाल महाराज जी तताकथित रेल पुरुष नि हूंद छा त मीन सतपाल जीक बांठै धरण छे कि असभ्य से असभ्य गाळी बि शरमा मारन मूक लुकै दींदि !
सतपाल महाराज जीन गढवाळम आश्रम नि खोल्यां हूंदा त मीन सतपाल महाराज जी  तैं इन इन गंदी से गंदी उपमा दीण छे कि केजरीवाल की आप पार्टी मि तैं उत्तराखंड ना सै पण गढ़वाल का पार्टी अध्यक्ष अवश्य बणै  दींदी। 
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सतपाल माहाराज जी एक दैं हम लोगुं तैं भरमाणो वास्ता ही सै लोकसभा मा स्थानीय भाषाओं तैं संविधान की आठवीं सूची मा रखणो प्रस्ताव नि लांदा छा त मीन सतपाल जी तैं  खूनी  खजर , खूनी मंजर  , खूनी खंद्वार जन बेहयाई पदवी  देक भाजपा सम्राट से गुजरात रत्न की पदवी त  लेइ  लीण छे।   

  नै नै ! जरा ठहरो ! सतपाल महाराज जी अपण श्रीमती अमृता रावत जी छोड़ि दुसर पत्नी नि लाणा छन।  बात कुछ हौर च। 
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 अबि कुछ दिन पैल सतपाल महाराज उप राष्ट्रपति दगड़ लैटिन अमेरिका मा पेरू देस गेन अर सतपाल जीक दिल किनुआ पर ऐ गे।  अर दगड़म उत्तराखंड की उद्यान -बगवान मंत्र्यांणी श्रीमती अमृता रावत को दिल बि पेरू   का किनुआ पर ऐ गे । 
मनुष्य पर दुसरौ कज्याण बिगरैलि  अर दुसरौ कजे कामगति लगणो रोग पुराणो च।  सतपाल महाराज जी अर श्रीमती अमृता रावत तै किनुआ मा उत्तराखंड विकास का वास्ता एक रामबाण   दिखे गे।
किनुआ एक गुलेटिनहीन , उच्च प्रोटीनयुक्त अनाज (स्यूडोसीरल )  च जो कम नमी बलुआ धरती मा बि खूब पैदा ह्वे सकद। 
अब जब सतपाल महाराज जी अर श्रीमती अमृता रावत का दिल किनुआ पर ऐ गे तो इन बुल्याणु च बल पंत नगर कृषि विश्वविद्यालय का वैज्ञानिक पेरू जाला अर निकट भविष्य मा किनुआ की खेती उत्तराखंड मा बि होलि। सतपाल जीक दलील च बल कम कीमत पर उत्तराखंड्युं तैं एक सम्पूर्ण अनाज मिल  जालो।  सतपाल महाराज पेरू का कई रंगीन मुंगर्युं से भि प्रभावित छन अर सतपाल महाराज यूँ मुंगर्युं तैं उत्तराखंड मा लाण चाणा छन।
सतपाल महारज जी ! क्या उत्तराखंड की समस्या नयो  अनाज नि उपजाणौ  च ? 
क्या उत्तराखंड कृषि की समस्या या च कि उत्तराखंड मा रंगीन मुंगरी नि हूँदन ?
क्वादो -झंगोरा की ही खेती पहाड़ मा दुबर शुरू करवावो तो उत्तराखंड तैं किनुआ की जरूरत ही नी  च।  चलो माना नई कज्याण किनुआ पुराणि कज्याण झंगोरा -क्वादो से जादा उपजाऊ च पण  सासत्व सवाल को जबाब कु द्यालो कि पहाड़ों मा खेती करण वाळ कखन आला ? सतपाल महारज जी ! किनुआ की खेती का वास्ता बि त उत्तराखंड -पहाड़ों मा किसाणु जरोरत होलि कि ना ?
सतपाल साब ! किनुआ की कृषि वास्ता बि त गूणी -बांदर -सुंगर से रक्षा बंदोबस्त की जरूरत होलि कि ना ? 
सतपाल साहब ! पहाड़ों की समस्या क्या क्या फसलो खेती करे जावो कतई नी  च बल्कणम असली समस्या त खाली गाँव छन।   आपका संसदीय क्षेत्र का तो नया रिकॉर्ड च कि पौड़ी जिला मा जनसंख्या मा भारी कमी आणि च। 
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सतपाल जी ! पैल इन बतावो कि किनुआ उगाण  असली समस्या को निदान च   क्या ?
पहाड़ों मा अनाज उगाण कदापि बि समस्या निदान नी  च बलकणम समस्या निदान तो बागवानी ही च। 
उत्तराखंड की समस्या किनाउहीन खेती नी च  बलकणम प्रवास्युं द्वारा कृषि मा भागीदारी नि निभाण च।  जब तलक पुंगडूं  असली मालिक प्रवासी कृषि मा भागीदारी नि निभाला तब तलक किनुआ की बात करण फोकटिया सुपिन दिखण च अर शायद प्रवासी बागवानी मा ही भागीदारी निभै सकदन। 
तो सतपाल महाराज जी पैल प्रावास्युं भागीदारी बारा मा समाधान की स्वाचो फिर किनुवा का बारा मा स्वाचो। 
अनाज की खेती मा प्रवास्युं (  खेतों असली मालिक छन ) भागीदारी ह्वैइ नि सकदी तो फिर किनुआ कु उपजालु ? 
अर किनुआ /किनुवा कि खेती इन बि नी  च कि तिल जन ब्वावो अर फिर काटणो ही जावो।  आज यदि इनि जि  फसल उगाण सरल हूंद त पहाड़ी गांवों मा तिल की खेती तैं किले आप बढ़ावा नि दीणा छंवां ?
म्यार सांसद जी ! ऊत्तराखण्ड का पहाड़ों समस्या या नी च कि उख दुनिया का सबसे स्वास्थ्य वर्धक अनाज की खेती नि होंदि ।  पहाड़ों समस्या केवल एकी च कि प्रवासी खेती मा भागीदारी नि निभाणा छन अर प्रवास्यूं भागीदारी बगैर तुम अमृत बी लावो तो खेतिs दशा नि सुधर सकदी ! मेरी दरख्वास्त च बल किनुआ तैं प्रवास्युं भागीदारी से ज्वाड़ो तबि किनुआ का बारा मा ब्वालो 




Copyright@ Bhishma Kukreti  22/11/2013 

कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव हो रहा है

मजाक मसखरी , खरी खोटी - भीष्म कुकरेती 
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मेरे कांग्रेसी दोस्त  ने कहा - थैंक्स गॉड ऐट लिस्ट राहुल बाबा अंडरस्टूड  आफ्टर सो मेनी डिफीट्स 
मैं -क्या समझे राहुल जी कि मोदी सूट बूट वाला नही बल्कि शत्रुमर्दन वाला है ?
दोस्त -नही नही मोदी कांग्रेस की समस्या नही है 
मैं -तो ?
दोस्त -राहुल जी के हिसाब से संगठन  समस्या है 
मैं -अच्छा तो संगठन परिवर्तन हो रहा है 
दोस्त -हाँ 
मैं -क्या परिवर्तन होने वाला है ?
दोस्त - श्री मोतीलाल बोरा अब कोषाध्यक्षन नही होंगे   .. 
मैं -हैं ऐसे सेवक को कोषाध्यक्ष पड़ से रिटायर ?
दोस्त - जी अब उन्हें वरिष्ठ कोषाध्यक्ष बनाया जाएगा। 
मैं -बहुत सुंदर। 
दोस्त - श्री दिग्विजय सिंग जी को महासचिव के पड़ से बर्खास्त किया जाएगा 
मैं - हैं ? क्या अब दिग्गी बाबू राहुल जी की नजरों से गिर गए हैं।  इतने गिरे हुए भी नही हैं। 
दोस्त -उन्हें मानद  उपाध्यक्ष पद  दिया जा रहा है और उनके लिए एक नया  पद बनाया जा रहा है - 'बहुसंख्यक चिढाओ कोष्ठ ' . अब दिग्गी बाबू पुर्णकालिन रूप से 'बहुसंख्यक चिढाओ कोष्ठ ' के सर्वेसर्वा होंगे। 
मैं -वाह परिवर्तन तो भला है। 
दोस्त -और अशोक चौहान को महाराष्ट्र अध्यक्ष पद से हटाकर नही पश्चिम भारत का अध्यक्ष बनाया जाएगा।  यह एक बड़ा परिवर्तन है कि अब भारत में चार क्षेत्र के नए और  अध्यक्ष होंगे।  

मैं -ग्रेट थिंकिंग !
दोस्त -हाँ और कपिल सिब्बल को ' उन्हें पटावो कोष्ठ ' का अध्यक्ष बनाने जा रहे हैं हम 
मैं -' उन्हें पटावो कोष्ठ ' 
दोस्त -हाँ जब भी विरोधी दलों जैसे सपा , बसपा , ममता , करुणानिधि अदि को भ्र्ष्टाचार या गुळादँगी के आरोप से छुड़ाने हेतु वकील की जरूरत होगी  कपिल सिब्बल विरोधियों के मुफ्त वकील होंगे 
मैं -व्हाट ए इंन्वेटिव आइडिया। 
दोस्त -जी हाँ।  लालू जी को कांग्रेस का पुर्णकालीन सलाहकार बनाया जाएगा 
मैं -अच्छा 
दोस्त - कुछ प्रचार सचिव को संगठन सचिव व संगठन सचिव को संगठन से हटाकर प्रचार सचिव बना दिए जायेंगे। 
मैं - अदला बदली 
दोस्त -हाँ 
मैं -मधुसूदन मिस्त्री सरीखे विशेष सलाहकार क्या करेंगे ?
दोस्त -उन्हें प्रमोट कर नरेंद्र मोदी के लिए नए नए गाली खोजने का  काम दे दिया जाएगा 
मैं -मस्त विचार 
दोस्त -बस ऐसा कुछ करने के रयूमर्स चल रहे हैं कांग्रेस में 
मैं - लौंग लिव राहुल , लौंग लिव कांग्रेस , लॉन्ग लिव नरेंद्र मोदी 

चुनाव हारने पर हार -दर्द नाशक दवाएं

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चुनाव हारने पर हार -दर्द नाशक दवाइयां  
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  चबोड़ , चखन्यौ , ककड़ाट  भावानुवाद  :::   भीष्म कुकरेती    
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एक दैं भूतपूर्व चुनाव आयुक्तन वैकि अम्पायरिंग से दुखी राजनैतिक नेताओं से ब्वाल छौं बल , " मि त तुमर  आइना छौं। मि त वी दिखांदु जु तुम छंवां।  जु अपण मुख पर पिम्पल्स दिखणा छंवां  त मैं पर भगार (लांछन ) नि लगावो बल्कणम क्लियरसिल मल्लम खरीदो। "
पर चुनवा अधिकार्यूं तै पता नी चुनाव हरण कथगा दर्दनाक हूंद , कथगा पीड़ादायक हूंद , कथगा बेज्जती दायक हूंद।  अचकाल तो हारणो पर्यायवाची वास्ता एक नयो  शब्द हिंदी शब्दकोश तै मिल गए - राहुल गांधी. 
चुनाव आयुक्त तै गाळी दीण , चुनाव आयुक्त पर जोर शोर से भगार लगाण , चुनाव आयुक्त की निष्पक्षता पर प्रश्न चिन्ह लगाण भारत मा  चुनाव हारणो दुःख हरणो परम्परागत दवा दारु च।  जब बि भूतकाल मा भाजपा हरदि छै तो वा बि विशुद्ध भारतीय परम्परा निभाणम पैथर कत्तै नि राई अर अपण चुनाव हारणो ठीकरा चुनाव आयुक्त का मुंडम फोड़णम कत्तै नि शरमांदी छै। अबक दै बारी च मायावती , अखिलेश यादव, कजीरवाल  व हारक्षेत्र का सम्राट  राहुल गांधी की पलटन की। 2007म मायावती से हारणो बाद  मुलायम बाडान  चुनाव आयोग का सेक्युरिटी पर ही सवालिया निशान लगै दे छौ। बहिन  मायावती  इंजीनियरिंग मा हमेशा अग्वाड़ी रौंदी तो हार का दुःखभंजन का वास्ता वीन एक नै दवा ख्व्वाज - EVM का अस्तित्व पर सवालिया निशान।  भुला कजीरवालन बि बहिन मायावती की सकासौरी कार अर EVM की जगा कागज पर मुहर लगाणो पैरवी कर दे।  याने जब जब हारो तब तब चुनाव आयोग की ऐसी तैसी अर जब जीतो तब अपणी लाल करो।  तब जब कजीरवाल प्रचण्ड बहुमत से जीत  तो वैन अल्लाह तै शुक्रिया कार अर अब हार गे तो EVM की वजह से हार।  हाँ यदि टी सेशन आज हूंदा तो कागजी वोटिंग  पत्र की दलील पर ऊंन बुलण छौ - अच्छा तो तुम चाँदवां कि मि राजनीतिज्ञों तै डाका डालणो इजाजत दे द्यूँ क्या ? 
ध्रुवीकरण या पोलराइजेसन बि हारणो दुःख -दर्द , डॉ  भुलाणो एक मल्लम च।  जब भाजपा हरदी छै तो मुस्लिम वोटरों पोलराइजेसन भाजपा का वास्ता हार का गम कम करणो दवा छै अब राहुल गांधी ब्रिगेड का वास्ता भाजपा द्वारा पोलराइजेसन चुनावी   हार का कष्टकारी दर्द निवारक , दवा दारु च। 
जब 2012 मा बहिन मायावती हार तो वीन बोली बल सपान जनता तै ख्याली पुलाव से  बहकायी अर अब हार्यूं जुवारी अखिलेश बुलणा छन बल नरेंद्र मोदी का भकलौंणम जनता ऐ गे।  अखिलेश का अनुसार जनतान काम तै ना खोखला भासणो तैं महत्व दे।  उन दबी जुबान म पंजाब का भाजपायाइ -अकाली बि बुलणा छन बल पंजाब की जनता अरमिंदर सिंग की भकलौंण मा ऐ गे अर हमर कर्यां  काम तै बिसरी गे।  दूसरै भकलौंण बि चुनावी हार का दर्द मिटाणो एक मिट्ठी दवा च। 
विरोध्यु पर धनबल , बाहुबल अर दारुबल का अभियोग बि चुनावी हार भुलाणो एक रामबाण च। 
जितीं पार्टी द्वारा खुलेआम आचार संहिता  का उल्लंघन नामक भगार, लांछन , अक्यूजेसन  बि हार  दर्द निवारण की एक दवा च।  
तो आज हम दर्शक नेताओं से चुनावी हार का डीआरएस नाशक नई नई दवाओं का नाम सुणणा छंवाँ अर मजा लीणा छंवां।  

आपन कु कु हौरि दवाओं नाम सूण ?  

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Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai India ,  /19 3 / 2017 
*लेख की   घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख में  कथाएँ चरित्र , स्थान केवल हौंस , हौंसारथ , खिकताट , व्यंग्य रचने  हेतु उपयोग किये गए हैं।

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श्री कुलानन्द भारतीय जी की मृत्यु और गढ़वाली साहित्यकारों द्वारा अपनों की ही अवहेलना

भीष्म कुकरेती 
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               गढ़वाली भाषा के विकास के मध्य युगीन कवि स्व श्री कुलानन्द भारतीय जी का देहावसान 9 जनवरी दिल्ली में हुआ किन्तु मुझे भी कल  ही पता चला की वरिष्ठतम कवि अब इस दुनिया में नही रहे।  उनके मुंडित -कुटुंब की नातिन श्रीमती शोभा कोटनाला ने मुझे यह दुखद समाचार कल मेल से दिया।  
  वास्तव में सन 2009 -10 में मैंने गढ़वाली कवियों के बारे में लिखना शुरू किया तो मैंने इधर उधर से पता लगाया और मुझे उनके बारे में सूचना मिली कि श्री कुलानन्द भारतीय जी अब भग्यान हो गए हैं।  मैंने इंटरनेट में अंग्रेजी लेख में उनके Late  Kulanand  Bhartiya लिख दिया।  श्रीमती शोभा कोटनाला का मेल आया कि श्री भारतीय जी ज़िंदा हैं।  श्रीमती कोटनाला ने ही बताया कि जन्म से वे भारद्वाज थे किन्तु कभी भी उन्होंने जाती नही लिखी। 
और अब इतनी देर बाद हमे पता चला कि सिंह युग के स्तम्भ नही रहे और दुःख यह है कि किसी भी गढ़वाली साहित्यकार को नही पता कि भारतीय जी हमारे मध्य नही रहे।  स्व जग्गू नौडियाल की मृत्यु का समाचार भी किसी गढ़वाली साहित्यकार ने नही दिया था अपितु उनकी मृत्यु के बाद मैंने उनसे contact किया तो सूचना उनके परिवार से मिली। प्रश्न यह उठता है हम नई पीढ़ी के साहित्यकार अपने पुरानी पीढ़ी की अनदेखी क्यों करते हैं 
श्री  कुलानन्द जी को उनके खण्डकाव्य 'डौळया' के लिए गढ़वाली काव्य में जाना जाता है।     
------------------------------22 फरवरी 2017 -------------

Kulanand Bhartiya: A politician and Asian Garhwali Poet of Story oriented long Poetry  

Critical and Chronological History of Modern Garhwali (Asian) Poetry – 40

                    Literature Historian:  Bhishma Kukreti
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           Kulanand Bhardwaj Bhartiya is a multitalented personality. Most of the Garhwalis know late Kulanand Bhartiya as famous Garhwali social worker and politician of Delhi. Kulanand Bhartiya was representing Shaktinagar region of Delhi as politician.
            However, Kulanand Bhartiya has been publishing his poems in regional periodicals. Critics praise his famous storied long poem  (Khand Kavya ) ‘Daulya’ for his story narration and subject of discussion on the so called benefits of migration and to search employment in Garhwal only. 
Kulanand Bhartiya was born in a Himalayan village Jamni, Malla Salt of Kumaon border of Garhwal on 24th May 1926. 
              Kulanad is famous in Garhwali literature for his Khandkavya (storied long poem) ‘Daulya’. The poems are in lyric form and are very pleasure some. The story surrounds two illiterate friends of a Garhwali village who come to Delhi in search of job. One of two takes job in different hotels. Another fellow gets job as butler with a learned professor. This fellow with professor study in night schools and become manger with a private firm after gaining higher education through night schools. Time comes, when the illiterate fellow wants to marry his daughter with the son of his friend but the educated fellow goes to village for marrying his son that there would be link with Garhwal.
           Small epic ‘Daulya’ is effective so many variables between the life of cities and villages, the changing psychology of villagers towards working in the village, the desire of village youth for work in cities and their escaping psychology for easy works available in villages. The poet depicted successfully the life and confusion, confrontation, frustration of villagers and city workers simultaneously in ‘Daulya’.
According Bahuguna (1981) , Kualanand Bhartiya uses imagery tool in depicting geography of Garhwal and simple Salani dialects in his poetry.

काळी  को रैबार 

रचना --कुलानन्द भारतीय (1926 , जामणी सल्ट दुशांत) 

काळी  द्याखनौऴया राम मालुम ह्वेई।  दिल्ली जाम 
दौड़ी दौड़ी वख काळी आई घास काटणु छोड़ आई 
आवाज वींल नौऴया थैं देइ द्यूरा !   ऊँथैं जाणदा ह्वैला। 
दिल्ली  ऊँथैं जरूर पैला म्यारु रैबार भेजी दियां 
भली  समझैक बोली दियां खामू पीमू रमू यख 
द्वी साल ह्वैगे तुम नि आया ब्याऊ कैरीक क्या मिल पाया।  
दिन रात मीत कटदू घास ब्वै बाब तुमरा नि गडदा बाच 
दड़िमा की डाळी फूली ग्याई आमूं की डाळी पर बौर आई 
सरसों खेती फूली ग्याई पर मेरी दुनिया बांजी रै ग्याई। 
द्यूरा ! ऊंमा बोली दियां ये साल घौर जरूर अयाँ 
चिट्ठी पत्री भेजदी रयां खयाँ पियाँ भलीक रयाँ 
कातिग तुम घर अयाँ मंगसिर मिथैं दिल्ली लिजैंयाँ   


साभार --शैलवाणी अंग्वाळ )
Copyright @ Bhishma Kukreti Mumbai, 2016