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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Monday, June 2, 2014

भूतपूर्व कॉंग्रेसी मंत्री से कॉंग्रेस की हार पर बातचीत

घपरोळया , हंसोड्या , चुनगेर ,चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती      

(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )

कॉंग्रेस 2014s  लोकसभा चुनाव हारी त गे पर अबि तलक पता नि चौल कि इथगा बुरी तरां से कॉंग्रेस चुनाव किलै हार । यदि मेरी बातचीत कै भूतपूर्व कॉंग्रेसी मंत्री से हो तो वा बातचीत इन होली। 
मि -ब्याळै मंत्री जी ! या रौंका धौंकि किलै ? 
भूतपूर्व कॉंग्रेसी मंत्री -अरे मंत्री निवास जि छुड़ण पड़णु च तो लोकनिर्माण मंत्री से कनेक्सन जुगाड़ भिडाणु छौं कि सरकारी आवास की सुविधा रावो।
मि -पर दिल्ली मा त आपक आलिशान बंगला छन फिर चिंता क्यांकि ?
भूतपूर्व कॉंग्रेसी मंत्री -म्यार दिमाग खराब हुयुं च जो मि ब्याळै मंत्री ह्वेक अपण बंगला मा रौं। 
मि -हाँ ! या बात त सै च। 
भूतपूर्व कॉंग्रेसी मंत्री -हाथी मर भी जाए तो लाख का होता ही है , मंत्री ना सही हूँ तो नेता ना ? 
मि -कुछ पता बि चौल कि कॉंग्रेसै इन कुगति किलै ह्वे ? 
भूतपूर्व कॉंग्रेसी मंत्री -भै ! सुणन मा आणु च कि राहुल जी  आसपास का लोग खोज मा लग्यां छन।  जैदिन कॉंग्रेस का अधिकृत बयान ऐ जाल मि बि धड़ले से बोली द्योलू कि कॉंग्रेस की हार का क्या कारण छन। 
मि -फिर बि आप का ख़याल से क्या क्या ख़ास कारण रै होला ?
भूतपूर्व कॉंग्रेसी मंत्री -मेरी त पक्की राय च कि कॉंग्रेस संगठनन काम नि कार याने कॉंग्रेसी कार्यकर्ताओंन काम हि नि कार।
मि -कॉंग्रेसी कार्यकर्ताओं से क्या अपेक्षा छे ?
भूतपूर्व कॉंग्रेसी मंत्री -अरे राहुल गांधी जीन बताई त च कि कॉंग्रेस राज मा क्या क्या ह्वाइ। 
मि -पर इख्मा कॉंग्रेसी कार्यकर्ता बीच मा कख आई गेन ?
भूतपूर्व कॉंग्रेसी मंत्री -अरे यूँ अळगसि , लम्पट कार्यकर्ताओंन लोगुं बीच जैक बताइ इ नी च कि कॉंग्रेस सरकार इथगा बड़ा बड़ा काम करणी च।   
मि -पर आप मंत्री लोग बि त जनता तैं बथै सकदा छा कि तुम जनहित मा क्या क्या करणा छा। 
भूतपूर्व कॉंग्रेसी मंत्री -अरे हमन तो विज्ञापन करी त छा कि सरकार क्या क्या करणी च। 
मि -हाँ पर जनता तैं पता इ नि लग कि सरकार बि कुछ करणी च। 
भूतपूर्व कॉंग्रेसी मंत्री -वी त मि बुलणु छौं कि कॉंग्रेस का महामंत्री अर कार्यकर्ता सब बेकार ह्वे गेन यूंन सरकारी विज्ञापन देखिक , पौढ़िक जनता तैं बात पंहुचाई इ नी च।  अब्स्युलेटली कम्युनिकेसन गैप राइ।
मि -आपन अपण महामंत्र्युं तैं समझाई तो ह्वाल कि सरकार क्या क्या काम करणी च। 
भूतपूर्व कॉंग्रेसी मंत्री -साले सब हरामखोर है । यी महामंत्री राहुल जीक आस पास मंडराणा रौंद छा पर कबि बि हम मंत्र्युं पास पुछणो नि ऐन कि सरकार क्या क्या करणी च।  
मि -हाँ या बात च। 
भूतपूर्व कॉंग्रेसी मंत्री -हाँ !यदि कॉंग्रेस का संगठन का लोग हम मंत्र्युं पास आंदा , हम मंत्र्युं तैं पुछदा कि सरकार क्या करणी च अर फिर हमर काम तैं जनता तक पंहुचांदा तो कॉंग्रेस का इथगा बुरा हाल नि होंद।   
मि -पर आप बि त कॉंग्रेस कार्यकर्ताओंमा जैक  बथांदा रै होला कि सरकार क्या क्या काम करणी च ?
भूतपूर्व कॉंग्रेसी मंत्री -फिर वी बात ! भई हम मंत्री छया तो संगठन का लोगुं अर कार्यकर्ताऊं  कर्तव्य छौ कि मंत्र्युं पास आवन।  मंत्र्युं काम थोड़ा हूंद कि कार्यकर्ताऊं पास जावन।  
मि -तो कार्यकर्ता आपक पास आंद ही नि छया ?
भूतपूर्व कॉंग्रेसी मंत्री -आंद किलै नि छया पर सब अफुकुण ठेकादारी लीणो आंद छा।  पिछ्ला पांच सालुं मा मीम जनहित का काम का वास्ता एक बि कार्यकर्ता नि आयि जु बि आयि ठेकेदारी लीणो वास्ता आयि।
मि -पर आप तैं पता ही नि चौल कि लोगुं मा कॉंग्रेस का विरुद्ध इथगा अधिक आक्रोश च?
भूतपूर्व कॉंग्रेसी मंत्री -वी त मि बुलणु छौं कि कॉंग्रेसी कार्यकर्ता इथगा निठ्ठला , निकज्ज ह्वे गेन हम मंत्र्युं तैं पता ही नि चौल कि लोग हमसे नराज छन। अरे यी कॉंग्रेसी कार्यकर्ता जनता का बीच जावन तो यूँ तैं पता चल जांद कि जनता क्या सुचणी च पर यी त बस अपण ब्यापार बढ़ाण मा लग्यां रैन।  सरासर कम्युनिकेसन गैप ह्वे गए छौ। 
मि -जन कि ?
भूतपूर्व कॉंग्रेसी मंत्री -जन कि क्या ? स्यु हमन  बड़ी मुस्किल से चुनाव से ठीक पैलि फ़ूड अधिकार बिल पास कराइ पर हमारा कार्यकर्ता इथगा बेकार , लुंज , अळगसी   ह्वे गेन कि यूंन जनता तैं बताइ इ नी च कि राइट टु फ़ूड बिल क्या च ? फोकट का खाण वाळ ह्वे गेन जि यी कॉंग्रेसी कार्यकर्ता अर कार्यकर्ता काम नि करदन अर फिर फजीत हम नेसनल लेवल का नेताओं की हूंद। 
मि -एक बात बथावदी कि राइट टु फूड बिल क्या च ?  
भूतपूर्व कॉंग्रेसी मंत्री -यार मीन फ़ूड मिनिस्टर तैं रैबार बि दे छौ कि फ़ूड बिल कु संक्षिप्त (ब्रीफ ) रूप रेखा भेजी द्यावो पर सरकार मा बि त काण्ड लग्यां छा , आज तक भूतपूर्व खाद्य मंत्रीन फ़ूड बिलक जिस्ट (संक्षिप्त ) नि भेजि। टोटल कम्युनिकेसन गैप।  अब क्या बोलुं कि  गैप से हम बड़ा नेताओं तै बि हरण पोड़। 
मि -अब अग्वाड़ी क्या प्लान च ?
भूतपूर्व कॉंग्रेसी मंत्री -बस राजयसभा की सीट मिल जावो तो मजा से पांच साल कट जाल।  


Copyright@  Bhishma Kukreti  2/6/2014   
    

*कथा , स्थान व नाम काल्पनिक हैं।  
Garhwali Humor in Garhwali Language, Himalayan Satire in Garhwali Language , Uttarakhandi Wit in Garhwali Language , North Indian Spoof in Garhwali Language , Regional Language Lampoon in Garhwali Language , Ridicule in Garhwali Language  , Mockery in Garhwali Language, Send-up in Garhwali Language, Disdain in Garhwali Language,Hilarity in Garhwali Language, Cheerfulness in Garhwali Language
[गढ़वाली हास्य -व्यंग्य, सौज सौज मा मजाक  से, हौंस,चबोड़,चखन्यौ, सौज सौज मा गंभीर चर्चा ,छ्वीं;- जसपुर निवासी  द्वारा  जाती असहिष्णुता सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; ढांगू वालेद्वारा   पृथक वादी  मानसिकता सम्बन्धी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;गंगासलाण  वाले द्वारा   भ्रष्टाचार, अनाचार, अत्याचार पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य; लैंसडाउन तहसील वाले द्वारा   धर्म सम्बन्धी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;पौड़ी गढ़वाल वाले द्वारा  वर्ग संघर्ष सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; उत्तराखंडी  द्वारा  पर्यावरण संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;मध्य हिमालयी लेखक द्वारा  विकास संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;उत्तरभारतीय लेखक द्वारा  पलायन सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; मुंबई प्रवासी लेखक द्वारा  सांस्कृतिक विषयों पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य; महाराष्ट्रीय प्रवासी लेखकद्वारा  सरकारी प्रशासन संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; भारतीय लेखक द्वारा  राजनीति विषयक गढ़वाली हास्य व्यंग्य; सांस्कृतिक मुल्य ह्रास पर व्यंग्य , गरीबी समस्या पर व्यंग्य, आम आदमी की परेशानी विषय के व्यंग्य, जातीय  भेदभाव विषयक गढ़वाली हास्य व्यंग्य; एशियाई लेखक द्वारा सामाजिक  बिडम्बनाओं, पर्यावरण विषयों   पर  गढ़वाली हास्य व्यंग्य, राजनीति में परिवार वाद -वंशवाद   पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य; ग्रामीण सिंचाई   विषयक  गढ़वाली हास्य व्यंग्य, विज्ञान की अवहेलना संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य  ; ढोंगी धर्म निरपरेक्ष राजनेताओं पर आक्षेप , व्यंग्य , अन्धविश्वास  पर चोट करते गढ़वाली हास्य व्यंग्य, राजनेताओं द्वारा अभद्र गाली पर हास्य -व्यंग्य    श्रृंखला जारी  ] 

गढ़वाल -कुमाऊं के लोक खेल -भाग -1

Folk Games of Garhwal, Kumaon (Uttarakhand ) -1 




            संकलन - भीष्म कुकरेती (लोक साहित्य शोधार्थी ) 

                       खेल की परिभाषाएं 
    
खेल मानव का एक लक्षण है।  हर युग में लोक खेल परिमार्जित होते रहे हैं और भविष्य में भी लोक खेल मानव समाज में आते रहेंगे।  

खेल एक कार्य है जिसका उद्येस्य मनोरंजन या शिक्षा या दोनों होता है। खेल वास्तव में रचनात्मकता , कला निहित है जिसमे जिस्मानी शक्ति , मानसिक शक्ति व टीम भावना का समिश्रण होता है। 
खेल में समय और जगह आवश्यक कारक हैं।  
खेल का प्रतिफल अनजान है जो क्षेल को रोमांचक बना डालता है। 
लोक खेलों में खेल में उत्पादकशीलता नहीं होती है और कभी कभी जब खेल व्यसन का रूप ले ले तो अलाभकारी भी हो सकता है। 
खेल में नियम अवश्य होते हैं। 
खेल में प्रतियोगिता  निहित है किन्तु इसे युद्ध कदापि नही कहा जा सकता है।  
खेल में प्रतिद्वंदिता व प्रतियोगी, प्रतिरोध , प्रतिरोध समाधान आवश्यक हैं। 
खेल में गोल और खेल का आकार महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। 
खेल में आधुनिक तकनीक का समावेश भी होता जाता है जैसे आज वीडिओ गेम। या तीर कमान खेल में आधुनिक तकनीक का समय समय पर प्रयोग। 
खेल में कम से कम दो खिलाड़ियों का होना लाजमी है। जब एक खिलाड़ी किसी खेल में होता है तो वह एक विशेष तरह का खेल माना जाता है जैसे एक आदमी बाग़ बकरी का खेल दो खिलाड़ियों की तरफ से खेले। 
खेल खिलाड़ियों और दर्शकों को आनंद पूर्ति करता है। 
खेल में चुनौती , बातचीत , एक दूसरे को प्रभावित करना , मानसिक या शारीरिक संवाद भी आवश्यक हैं। 
खेल सदा से ही एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्रों में प्रसारित होते जाते हैं और बहुत से समय बदलाव के कारण क्षेत्रीय लोक खेल के रूप में प्रसिद्ध हो जाते हैं जैसे गंगासलाण , पौड़ी गढ़वाल में हॉकी को बदलकर एक नया खेल उत्पन्न हुआ जिसे हिंगोड़ कहते हैं और इसी तरह रग्बी ने हथगिंदी का रूप लिया।  युद्ध खेल ने गढ़वाल -कुमाऊं  में सरौं नृत्य रूप ले लिया।




 Copyright@ Bhishma Kukreti, 31/5/2014 
Contact ID -- bckukreti@gmail.com
  Notes on Defining Game or Sport in context    Traditional Games, Folk sport, Conventional Activities of Garhwal and Kumaon, Uttarakhand; Defining Game or Sport in context    Traditional Games, Folk Sport, Conventional Activities of Pauri Garhwal, Uttarakhand; Defining Game or Sport in context    Traditional Games, Folk Sport, Conventional Activities of Garhwal, Uttarakhand; Defining Game or Sport in context    Traditional Games, Folk Sport, Convention Activities of Chamoli Garhwal, Uttarakhand; Defining Game or Sport in context    Traditional Games, Folk Sport, Conventional Activities of Rudraprayag Garhwal, Uttarakhand; Defining Game or Sport in context   Traditional Games, Folk Sport, Conventional Activities of Tehri Garhwal, Uttarakhand; Defining Game or Sport in context    Traditional Games, Folk Sport, Conventional Activities of Uttarkashi Garhwal, Uttarakhand;  Defining Game or Sport in context    Traditional Games, Folk Sport, Conventional Activities of Dehradun Garhwal, Uttarakhand; Defining Game or Sport in context    Traditional Games, Folk Sport, Conventional Activities of Haridwar Garhwal, Uttarakhand; Defining Game or Sport in context    Traditional Games, Folk Sport, Conventional Activities of Pithoragarh Kumaon , Uttarakhand; Defining Game or Sport in context    Traditional Games, Folk Sport, Conventional Activities of Almora Kumaon , Uttarakhand; Defining Game or Sport in context    Traditional Games, Folk Sport, Conventional Activities of Bageshwar Kumaon , Uttarakhand;  Defining Game or Sport in context    Traditional Games, Folk Sport, Conventional Activities of Champawat Kumaon , Uttarakhand; Defining Game or Sport in context   Traditional Games, Folk Sport, Conventional Activities of Dwarhat Kumaon , Uttarakhand;  Defining Game or Sport in context    Traditional Games, Folk Sport, Conventional Activities of Nainital Kumaon , Uttarakhand; Defining Game or Sport in context    Traditional Games, Folk Sport, Conventional Activities of Udham Singh Nagar Kumaon , Uttarakhand;

भौं भौं राजनीतिज्ञों अगला सौ दिनौ अलग अलग प्राथमिकता

घपरोळया , हंसोड्या , चुनगेर ,चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती      

(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )

अचकाल सब्युं पर मोदीफिलेसिया (मोदी से प्यार ) सॉरी गे , इख तलक कि रोज सुबेर सेक्युलरिज्म नक्वळ (नास्ता )  खाण वाळ नेता अजकाल डेवलपमेंट का ब्रेकफास्ट करणा छन। इनि जब 27/5/2014s कुण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीन अपण मंत्र्युं कुण अगला सौ दिनूं प्राथमिकता बणानो ब्वाल त सरा भारत मा हरेक राजनीतिज्ञ अगला सौ दिनौ कुण अपणी  प्राथमिकता बणाण मा व्यस्त ह्वे गेन।
मीन स्वाच कि यदि मि विभिन्न नेताओं से मुखाभेंट करलु अर पुछलु कि -नेता जी आपक अगला सौ दिनौ कुण प्राथमिकता क्या च तो उत्तर इन ह्वाल -
बाबा रामदेव - में पर लग्यां कोर्ट केस खतम करण मेरी प्राथमिकता च अर अगला साठ मैना तलक  तक यही प्राथमिकता राली। 
डा मुरली मनोहर जोशी - बुड्यान्द दैं क्या प्राथमिकता ह्वे सकद ? एक महत्वपूर्ण मंत्रालय पाण और क्या ?
डा रमेश निशंक -कै बि तरांसे बीसी खंडूड़ी अर कोशियारी तैं मंत्री बणन से रुकण ही मेरी प्राथमिकता छे अर ताउम्र राली। 
सतपाल महाराज - बस कुछ विधयाको तैं कॉंग्रेस से दल बदलाण  अर हौर क्या ?
हरीश रावत - हरेक भाजपा विधायकों तैं ससंदीय सचिव बणाण मेरी प्राथमिकता च। 
महारष्ट्र कु कॉंग्रेसी - महराष्ट्र मा हमन आण वाळ विधान सभा चुनाव त जितण नी च त मेरी प्राथमिकता च कि इन बहाना खुजे जाव कि खुद हाइ कमांड मेकुण चुनाव नि लड़णो कमांड दे द्यावो। 
महारष्ट्र कु भाजपा नेता - मि तैं पता च कि अबै दैं भाजपा -शिव सेनान विधानसभा चुनाव जितण त  अगला सौ दिनौ कुण मेरि प्राथमिकता च कि भाजपा मा अपण  विरोध्युं सफाया करे जावु। 
सुशील कुमार शिंदे - अगला सौ दिन मा मि वुं महारष्ट्र का वुं कॉंग्रेस्यूं तैं एक्सपोज करुल , नंगा  करुल जौन पार्टीघात करिक मे तैं हरायी । 
अरविन्द केजरीवाल - अगला सौ दिन मा मि  सौ -द्वी सौ U -Turn लीणो प्लान बणानु छौं। 
मुलायम सिंह यादव - अगला सौ दिन तक मि अर लाल कृष्ण आडवाणी जी कै मानसिक चिकित्सालय की खोज मा रौला जख जैक हम द्वी प्रधान मंत्री बणनो भूत उतारणो इलाज करौला। 
हरयाणा कु मंत्री - अगला चुनाव तो हमन जितण नी च तो अगला सौ दिन मा मीम एकी प्राथमिकता च कि मि वूं फाइलुं तैं जळाणु रौल जैमा पकड्याणो डौर हो। 
कमल नाथ - मेरी त एकि प्राथमिकता च कि मि कनकैक बि मि लोकसभा मा लीडर ऑफ अपोजिसन बौण जौं। 
विजया राजे सिंधिया - कै बि तरां से अपण युवराज तैं केंद्रीय मंत्री बणवै द्यूं। 
यशवंत सिन्हा, कल्याण सिंह ,धुमाल , रमण  सिंह, रामविलास पासवान - हम सबकी अगला सौ दिन मा एकी प्राथमिकता राली कि हमर शहजादा केंद्रीय मंत्री बौण जावन !
जसवंत सिंह -अगला दिनों सौ मा मेरी एकी प्राथमिकता च कि " घर का बुद्धू लौंडे के साथ घर को लौट आया" कहावत तैं चरिथार्त करूँ । 
लालू प्रसाद यादव - कै बि तरांसे नीतेश कुमार का जड़नाश !
नीतेश कुमार - अपण कपाळ फोड़न और क्या ?
ममता बनर्जी - मै प्राथमिकता से नही हूँ बल्कि प्राथमिकता मेरे से है । 
करुणा निधि - कै बि तरांसे मेरी बेटी जेल जाण से रै जाव। 
 कॉंग्रेसी नेता - राहुल गांधी पर टिक्वा/टेक  लगाण कि जांसे वो नेता लैक व्यवहार करण लग  जावन। 
सोनिया गांधी - अपण नौनाक भविष्य की चिंता मा नींद नि आदि तो नींद आणो बान कैं दवाई की खोज मेरी प्राथमिकता च।

आजम खान - म्यार भैंसु देखभाल का वास्ता टिप टॉप -चुस्त पुलिस इंस्पेक्टर की खोज अर वैक अप्वाइंटमेंट करण मेरी प्राथमिकता च 
डिम्पल यादव - ससुर जीक समिण विरोध्युं तैं गाळी दीण सिखण मेरी प्राथमिकता च। 
मायवती (पर्ची मा पौढ़िक ) - उत्तर प्रदेश माँ हर रेप पर मि प्रेस कॉन्फ्रेंस करुल कि उत्तर प्रदेश मा राष्ट्र पति शासन लगावो। 
अखिलेश यादव - अगला सौ दिन मा बलात्कार केसुं कु विश्व रिकार्ड तुडन मेरी प्राथमिकता च। 



Copyright@  Bhishma Kukreti  31/5/2014   
    

*कथा , स्थान व नाम काल्पनिक हैं।  
Garhwali Humor in Garhwali Language, Himalayan Satire in Garhwali Language , Uttarakhandi Wit in Garhwali Language , North Indian Spoof in Garhwali Language , Regional Language Lampoon in Garhwali Language , Ridicule in Garhwali Language  , Mockery in Garhwali Language, Send-up in Garhwali Language, Disdain in Garhwali Language,Hilarity in Garhwali Language, Cheerfulness in Garhwali Language
[गढ़वाली हास्य -व्यंग्य, सौज सौज मा मजाक  से, हौंस,चबोड़,चखन्यौ, सौज सौज मा गंभीर चर्चा ,छ्वीं;- जसपुर निवासी  द्वारा  जाती असहिष्णुता सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; ढांगू वालेद्वारा   पृथक वादी  मानसिकता सम्बन्धी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;गंगासलाण  वाले द्वारा   भ्रष्टाचार, अनाचार, अत्याचार पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य; लैंसडाउन तहसील वाले द्वारा   धर्म सम्बन्धी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;पौड़ी गढ़वाल वाले द्वारा  वर्ग संघर्ष सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; उत्तराखंडी  द्वारा  पर्यावरण संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;मध्य हिमालयी लेखक द्वारा  विकास संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;उत्तरभारतीय लेखक द्वारा  पलायन सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; मुंबई प्रवासी लेखक द्वारा  सांस्कृतिक विषयों पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य; महाराष्ट्रीय प्रवासी लेखकद्वारा  सरकारी प्रशासन संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; भारतीय लेखक द्वारा  राजनीति विषयक गढ़वाली हास्य व्यंग्य; सांस्कृतिक मुल्य ह्रास पर व्यंग्य , गरीबी समस्या पर व्यंग्य, आम आदमी की परेशानी विषय के व्यंग्य, जातीय  भेदभाव विषयक गढ़वाली हास्य व्यंग्य; एशियाई लेखक द्वारा सामाजिक  बिडम्बनाओं, पर्यावरण विषयों   पर  गढ़वाली हास्य व्यंग्य, राजनीति में परिवार वाद -वंशवाद   पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य; ग्रामीण सिंचाई   विषयक  गढ़वाली हास्य व्यंग्य, विज्ञान की अवहेलना संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य  ; ढोंगी धर्म निरपरेक्ष राजनेताओं पर आक्षेप , व्यंग्य , अन्धविश्वास  पर चोट करते गढ़वाली हास्य व्यंग्य, राजनेताओं द्वारा अभद्र गाली पर हास्य -व्यंग्य    श्रृंखला जारी  ] 

भौं भौं राजनीतिज्ञों अगला सौ दिनौ अलग अलग प्राथमिकता

घपरोळया , हंसोड्या , चुनगेर ,चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती      

(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )

अचकाल सब्युं पर मोदीफिलेसिया (मोदी से प्यार ) सॉरी गे , इख तलक कि रोज सुबेर सेक्युलरिज्म नक्वळ (नास्ता )  खाण वाळ नेता अजकाल डेवलपमेंट का ब्रेकफास्ट करणा छन। इनि जब 27/5/2014s कुण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीन अपण मंत्र्युं कुण अगला सौ दिनूं प्राथमिकता बणानो ब्वाल त सरा भारत मा हरेक राजनीतिज्ञ अगला सौ दिनौ कुण अपणी  प्राथमिकता बणाण मा व्यस्त ह्वे गेन।
मीन स्वाच कि यदि मि विभिन्न नेताओं से मुखाभेंट करलु अर पुछलु कि -नेता जी आपक अगला सौ दिनौ कुण प्राथमिकता क्या च तो उत्तर इन ह्वाल -
बाबा रामदेव - में पर लग्यां कोर्ट केस खतम करण मेरी प्राथमिकता च अर अगला साठ मैना तलक  तक यही प्राथमिकता राली। 
डा मुरली मनोहर जोशी - बुड्यान्द दैं क्या प्राथमिकता ह्वे सकद ? एक महत्वपूर्ण मंत्रालय पाण और क्या ?
डा रमेश निशंक -कै बि तरांसे बीसी खंडूड़ी अर कोशियारी तैं मंत्री बणन से रुकण ही मेरी प्राथमिकता छे अर ताउम्र राली। 
सतपाल महाराज - बस कुछ विधयाको तैं कॉंग्रेस से दल बदलाण  अर हौर क्या ?
हरीश रावत - हरेक भाजपा विधायकों तैं ससंदीय सचिव बणाण मेरी प्राथमिकता च। 
महारष्ट्र कु कॉंग्रेसी - महराष्ट्र मा हमन आण वाळ विधान सभा चुनाव त जितण नी च त मेरी प्राथमिकता च कि इन बहाना खुजे जाव कि खुद हाइ कमांड मेकुण चुनाव नि लड़णो कमांड दे द्यावो। 
महारष्ट्र कु भाजपा नेता - मि तैं पता च कि अबै दैं भाजपा -शिव सेनान विधानसभा चुनाव जितण त  अगला सौ दिनौ कुण मेरि प्राथमिकता च कि भाजपा मा अपण  विरोध्युं सफाया करे जावु। 
सुशील कुमार शिंदे - अगला सौ दिन मा मि वुं महारष्ट्र का वुं कॉंग्रेस्यूं तैं एक्सपोज करुल , नंगा  करुल जौन पार्टीघात करिक मे तैं हरायी । 
अरविन्द केजरीवाल - अगला सौ दिन मा मि  सौ -द्वी सौ U -Turn लीणो प्लान बणानु छौं। 
मुलायम सिंह यादव - अगला सौ दिन तक मि अर लाल कृष्ण आडवाणी जी कै मानसिक चिकित्सालय की खोज मा रौला जख जैक हम द्वी प्रधान मंत्री बणनो भूत उतारणो इलाज करौला। 
हरयाणा कु मंत्री - अगला चुनाव तो हमन जितण नी च तो अगला सौ दिन मा मीम एकी प्राथमिकता च कि मि वूं फाइलुं तैं जळाणु रौल जैमा पकड्याणो डौर हो। 
कमल नाथ - मेरी त एकि प्राथमिकता च कि मि कनकैक बि मि लोकसभा मा लीडर ऑफ अपोजिसन बौण जौं। 
विजया राजे सिंधिया - कै बि तरां से अपण युवराज तैं केंद्रीय मंत्री बणवै द्यूं। 
यशवंत सिन्हा, कल्याण सिंह ,धुमाल , रमण  सिंह, रामविलास पासवान - हम सबकी अगला सौ दिन मा एकी प्राथमिकता राली कि हमर शहजादा केंद्रीय मंत्री बौण जावन !
जसवंत सिंह -अगला दिनों सौ मा मेरी एकी प्राथमिकता च कि " घर का बुद्धू लौंडे के साथ घर को लौट आया" कहावत तैं चरिथार्त करूँ । 
लालू प्रसाद यादव - कै बि तरांसे नीतेश कुमार का जड़नाश !
नीतेश कुमार - अपण कपाळ फोड़न और क्या ?
ममता बनर्जी - मै प्राथमिकता से नही हूँ बल्कि प्राथमिकता मेरे से है । 
करुणा निधि - कै बि तरांसे मेरी बेटी जेल जाण से रै जाव। 
 कॉंग्रेसी नेता - राहुल गांधी पर टिक्वा/टेक  लगाण कि जांसे वो नेता लैक व्यवहार करण लग  जावन। 
सोनिया गांधी - अपण नौनाक भविष्य की चिंता मा नींद नि आदि तो नींद आणो बान कैं दवाई की खोज मेरी प्राथमिकता च।

आजम खान - म्यार भैंसु देखभाल का वास्ता टिप टॉप -चुस्त पुलिस इंस्पेक्टर की खोज अर वैक अप्वाइंटमेंट करण मेरी प्राथमिकता च 
डिम्पल यादव - ससुर जीक समिण विरोध्युं तैं गाळी दीण सिखण मेरी प्राथमिकता च। 
मायवती (पर्ची मा पौढ़िक ) - उत्तर प्रदेश माँ हर रेप पर मि प्रेस कॉन्फ्रेंस करुल कि उत्तर प्रदेश मा राष्ट्र पति शासन लगावो। 
अखिलेश यादव - अगला सौ दिन मा बलात्कार केसुं कु विश्व रिकार्ड तुडन मेरी प्राथमिकता च। 



Copyright@  Bhishma Kukreti  31/5/2014   
    

*कथा , स्थान व नाम काल्पनिक हैं।  
Garhwali Humor in Garhwali Language, Himalayan Satire in Garhwali Language , Uttarakhandi Wit in Garhwali Language , North Indian Spoof in Garhwali Language , Regional Language Lampoon in Garhwali Language , Ridicule in Garhwali Language  , Mockery in Garhwali Language, Send-up in Garhwali Language, Disdain in Garhwali Language,Hilarity in Garhwali Language, Cheerfulness in Garhwali Language
[गढ़वाली हास्य -व्यंग्य, सौज सौज मा मजाक  से, हौंस,चबोड़,चखन्यौ, सौज सौज मा गंभीर चर्चा ,छ्वीं;- जसपुर निवासी  द्वारा  जाती असहिष्णुता सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; ढांगू वालेद्वारा   पृथक वादी  मानसिकता सम्बन्धी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;गंगासलाण  वाले द्वारा   भ्रष्टाचार, अनाचार, अत्याचार पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य; लैंसडाउन तहसील वाले द्वारा   धर्म सम्बन्धी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;पौड़ी गढ़वाल वाले द्वारा  वर्ग संघर्ष सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; उत्तराखंडी  द्वारा  पर्यावरण संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;मध्य हिमालयी लेखक द्वारा  विकास संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;उत्तरभारतीय लेखक द्वारा  पलायन सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; मुंबई प्रवासी लेखक द्वारा  सांस्कृतिक विषयों पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य; महाराष्ट्रीय प्रवासी लेखकद्वारा  सरकारी प्रशासन संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; भारतीय लेखक द्वारा  राजनीति विषयक गढ़वाली हास्य व्यंग्य; सांस्कृतिक मुल्य ह्रास पर व्यंग्य , गरीबी समस्या पर व्यंग्य, आम आदमी की परेशानी विषय के व्यंग्य, जातीय  भेदभाव विषयक गढ़वाली हास्य व्यंग्य; एशियाई लेखक द्वारा सामाजिक  बिडम्बनाओं, पर्यावरण विषयों   पर  गढ़वाली हास्य व्यंग्य, राजनीति में परिवार वाद -वंशवाद   पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य; ग्रामीण सिंचाई   विषयक  गढ़वाली हास्य व्यंग्य, विज्ञान की अवहेलना संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य  ; ढोंगी धर्म निरपरेक्ष राजनेताओं पर आक्षेप , व्यंग्य , अन्धविश्वास  पर चोट करते गढ़वाली हास्य व्यंग्य, राजनेताओं द्वारा अभद्र गाली पर हास्य -व्यंग्य    श्रृंखला जारी  ] 

भौं भौं राजनीतिज्ञों अगला सौ दिनौ अलग अलग प्राथमिकता

घपरोळया , हंसोड्या , चुनगेर ,चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती      

(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )

अचकाल सब्युं पर मोदीफिलेसिया (मोदी से प्यार ) सॉरी गे , इख तलक कि रोज सुबेर सेक्युलरिज्म नक्वळ (नास्ता )  खाण वाळ नेता अजकाल डेवलपमेंट का ब्रेकफास्ट करणा छन। इनि जब 27/5/2014s कुण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीन अपण मंत्र्युं कुण अगला सौ दिनूं प्राथमिकता बणानो ब्वाल त सरा भारत मा हरेक राजनीतिज्ञ अगला सौ दिनौ कुण अपणी  प्राथमिकता बणाण मा व्यस्त ह्वे गेन।
मीन स्वाच कि यदि मि विभिन्न नेताओं से मुखाभेंट करलु अर पुछलु कि -नेता जी आपक अगला सौ दिनौ कुण प्राथमिकता क्या च तो उत्तर इन ह्वाल -
बाबा रामदेव - में पर लग्यां कोर्ट केस खतम करण मेरी प्राथमिकता च अर अगला साठ मैना तलक  तक यही प्राथमिकता राली। 
डा मुरली मनोहर जोशी - बुड्यान्द दैं क्या प्राथमिकता ह्वे सकद ? एक महत्वपूर्ण मंत्रालय पाण और क्या ?
डा रमेश निशंक -कै बि तरांसे बीसी खंडूड़ी अर कोशियारी तैं मंत्री बणन से रुकण ही मेरी प्राथमिकता छे अर ताउम्र राली। 
सतपाल महाराज - बस कुछ विधयाको तैं कॉंग्रेस से दल बदलाण  अर हौर क्या ?
हरीश रावत - हरेक भाजपा विधायकों तैं ससंदीय सचिव बणाण मेरी प्राथमिकता च। 
महारष्ट्र कु कॉंग्रेसी - महराष्ट्र मा हमन आण वाळ विधान सभा चुनाव त जितण नी च त मेरी प्राथमिकता च कि इन बहाना खुजे जाव कि खुद हाइ कमांड मेकुण चुनाव नि लड़णो कमांड दे द्यावो। 
महारष्ट्र कु भाजपा नेता - मि तैं पता च कि अबै दैं भाजपा -शिव सेनान विधानसभा चुनाव जितण त  अगला सौ दिनौ कुण मेरि प्राथमिकता च कि भाजपा मा अपण  विरोध्युं सफाया करे जावु। 
सुशील कुमार शिंदे - अगला सौ दिन मा मि वुं महारष्ट्र का वुं कॉंग्रेस्यूं तैं एक्सपोज करुल , नंगा  करुल जौन पार्टीघात करिक मे तैं हरायी । 
अरविन्द केजरीवाल - अगला सौ दिन मा मि  सौ -द्वी सौ U -Turn लीणो प्लान बणानु छौं। 
मुलायम सिंह यादव - अगला सौ दिन तक मि अर लाल कृष्ण आडवाणी जी कै मानसिक चिकित्सालय की खोज मा रौला जख जैक हम द्वी प्रधान मंत्री बणनो भूत उतारणो इलाज करौला। 
हरयाणा कु मंत्री - अगला चुनाव तो हमन जितण नी च तो अगला सौ दिन मा मीम एकी प्राथमिकता च कि मि वूं फाइलुं तैं जळाणु रौल जैमा पकड्याणो डौर हो। 
कमल नाथ - मेरी त एकि प्राथमिकता च कि मि कनकैक बि मि लोकसभा मा लीडर ऑफ अपोजिसन बौण जौं। 
विजया राजे सिंधिया - कै बि तरां से अपण युवराज तैं केंद्रीय मंत्री बणवै द्यूं। 
यशवंत सिन्हा, कल्याण सिंह ,धुमाल , रमण  सिंह, रामविलास पासवान - हम सबकी अगला सौ दिन मा एकी प्राथमिकता राली कि हमर शहजादा केंद्रीय मंत्री बौण जावन !
जसवंत सिंह -अगला दिनों सौ मा मेरी एकी प्राथमिकता च कि " घर का बुद्धू लौंडे के साथ घर को लौट आया" कहावत तैं चरिथार्त करूँ । 
लालू प्रसाद यादव - कै बि तरांसे नीतेश कुमार का जड़नाश !
नीतेश कुमार - अपण कपाळ फोड़न और क्या ?
ममता बनर्जी - मै प्राथमिकता से नही हूँ बल्कि प्राथमिकता मेरे से है । 
करुणा निधि - कै बि तरांसे मेरी बेटी जेल जाण से रै जाव। 
 कॉंग्रेसी नेता - राहुल गांधी पर टिक्वा/टेक  लगाण कि जांसे वो नेता लैक व्यवहार करण लग  जावन। 
सोनिया गांधी - अपण नौनाक भविष्य की चिंता मा नींद नि आदि तो नींद आणो बान कैं दवाई की खोज मेरी प्राथमिकता च।

आजम खान - म्यार भैंसु देखभाल का वास्ता टिप टॉप -चुस्त पुलिस इंस्पेक्टर की खोज अर वैक अप्वाइंटमेंट करण मेरी प्राथमिकता च 
डिम्पल यादव - ससुर जीक समिण विरोध्युं तैं गाळी दीण सिखण मेरी प्राथमिकता च। 
मायवती (पर्ची मा पौढ़िक ) - उत्तर प्रदेश माँ हर रेप पर मि प्रेस कॉन्फ्रेंस करुल कि उत्तर प्रदेश मा राष्ट्र पति शासन लगावो। 
अखिलेश यादव - अगला सौ दिन मा बलात्कार केसुं कु विश्व रिकार्ड तुडन मेरी प्राथमिकता च। 



Copyright@  Bhishma Kukreti  31/5/2014   
    

*कथा , स्थान व नाम काल्पनिक हैं।  
Garhwali Humor in Garhwali Language, Himalayan Satire in Garhwali Language , Uttarakhandi Wit in Garhwali Language , North Indian Spoof in Garhwali Language , Regional Language Lampoon in Garhwali Language , Ridicule in Garhwali Language  , Mockery in Garhwali Language, Send-up in Garhwali Language, Disdain in Garhwali Language,Hilarity in Garhwali Language, Cheerfulness in Garhwali Language
[गढ़वाली हास्य -व्यंग्य, सौज सौज मा मजाक  से, हौंस,चबोड़,चखन्यौ, सौज सौज मा गंभीर चर्चा ,छ्वीं;- जसपुर निवासी  द्वारा  जाती असहिष्णुता सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; ढांगू वालेद्वारा   पृथक वादी  मानसिकता सम्बन्धी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;गंगासलाण  वाले द्वारा   भ्रष्टाचार, अनाचार, अत्याचार पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य; लैंसडाउन तहसील वाले द्वारा   धर्म सम्बन्धी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;पौड़ी गढ़वाल वाले द्वारा  वर्ग संघर्ष सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; उत्तराखंडी  द्वारा  पर्यावरण संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;मध्य हिमालयी लेखक द्वारा  विकास संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;उत्तरभारतीय लेखक द्वारा  पलायन सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; मुंबई प्रवासी लेखक द्वारा  सांस्कृतिक विषयों पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य; महाराष्ट्रीय प्रवासी लेखकद्वारा  सरकारी प्रशासन संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; भारतीय लेखक द्वारा  राजनीति विषयक गढ़वाली हास्य व्यंग्य; सांस्कृतिक मुल्य ह्रास पर व्यंग्य , गरीबी समस्या पर व्यंग्य, आम आदमी की परेशानी विषय के व्यंग्य, जातीय  भेदभाव विषयक गढ़वाली हास्य व्यंग्य; एशियाई लेखक द्वारा सामाजिक  बिडम्बनाओं, पर्यावरण विषयों   पर  गढ़वाली हास्य व्यंग्य, राजनीति में परिवार वाद -वंशवाद   पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य; ग्रामीण सिंचाई   विषयक  गढ़वाली हास्य व्यंग्य, विज्ञान की अवहेलना संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य  ; ढोंगी धर्म निरपरेक्ष राजनेताओं पर आक्षेप , व्यंग्य , अन्धविश्वास  पर चोट करते गढ़वाली हास्य व्यंग्य, राजनेताओं द्वारा अभद्र गाली पर हास्य -व्यंग्य    श्रृंखला जारी  ] 

Friday, May 30, 2014

सार्क (दक्षेस ) देशों में एकीकृत पर्यटन विकास में क्षेत्रीयता का विश्लेषण व उद्द्येस्य

 Objectives of Regionalism in Tourism and Regional Integration among SAARC Countries

                     एकीकृत सार्क / दक्षेस  पर्यटन विकास  उत्तराखंड पर्यटन में सहायक हो सकता है भाग -2 


                 Tourism and Regional Integration among SAARC countries is  helpful to Uttarakhand part -2 


(Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series--73    )  
                                                      
उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग 73      
  
                              
                                                              लेखक : भीष्म कुकरेती  (विपणन व विक्रीप्रबंधन विशेषज्ञ )   




                                    


सन पचास  से ही  अंतर्राष्ट्रीय राजनीति , कूटनीति , आर्थिक रूपरेखा प्राप्ति हेतु क्षेत्रीय एकीकृत संगठन का महत्व प्रारंभ हो चुका है। अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति में एकीकृत क्षेत्रीय संगठन का पहला और नायब उदाहरण यूरोपीय देशों का संगठन है जिसने साठ के दशक में क्षेत्रीय सहकारिता शुरू किया। 
अस्सी -नब्बे के दशक में कूटनीति और वाणिज्य क्षेत्र में लैटिन अमेरिका , उत्तरी अमेरिका , दक्षिण पूर्व एशिया देशों के संगठनो ने पदार्पण किया। 
क्षेत्रीय सहकारिता संगठन में किसी प्रोजेक्ट  विकसित करने   में सभी देस या कुछ देस भागीदारी निभाते हैं जैसे यूरोप में यूरो करेंसी। क्षेत्र के लाभ हेतु किसी भी प्रोजेक्ट का संस्थानीकरण को क्षेत्रीकरण कहा जाता है। 
सार्क देशों ने भी क्षेत्रीय अस्मिता व क्षेत्रीय जनकल्याण हेतु संगठन बनाया किन्तु सार्क पर पाकिस्तान -हिन्दुस्तान के  द्विपक्षीय द्वेष की छाया सार्क संगठन को कमजोर करता आया है। आज आवश्यकता है कि सभी सार्क देस अपने द्वी पक्षीय समस्याओं को सार्क संगठन के उदेस्यों से अलग सुलझाएं और सार्क को मजबूती प्रदान करें। 
क्षेत्रीयता का उदेस्य होता है कि संगठन के सभी देस या कुछ देस किसी एक या अनेकों उदेस्यों की प्राप्ति हेतु एक साथ सहकारिता के सिद्धांतो के तहत कार्य करें जैसे नेपाल , भारत और बंगलादेश बाढ़ हानि रोकने व गर्मियों में पानी की किल्लत कम करने के लिए एकसाथ काम करें। 
एकीकृत क्षेत्रीयता वास्तव में एक जटिल प्रोसेस है जिसमे कई लड़ियाँ ओवरलैप होती रहती हैं। 
एकीकृत क्षेत्रीयता में पहले विशेष व आवश्यक उदेस्य -हित पुष्ट किये जाते हैं और फिर सीमाओं को कम महत्व दिया जाता है (यद्यपि यह अति आदर्श स्थिति है ), किन्तु सीमाओं व देशों के अपनी सीमाओं का पहले अध्ययन कर लिया जाता है और फिर सामूहिक उदेस्य निश्चित किये जाते हैं जिससे कि दो देशों के द्विपक्षीय संबंध ना बिगड़े। 
एकीकृत क्षेत्रीयता में उन उद्येस्यों को पहले पहल दूर रखा जाता है जो उदेस्य प्राप्ति साधन व विधि में रुकावट पैदा करते हैं।  जैसे आज सार्क देस   साझा रक्षा नीति पर कार्य नही कर सकते हैं क्योंकि पाकिस्तान और हिन्दुस्तान के रक्षा स्वार्थ इस साझा उद्येस्य में रोड़ा बन जाएंगे।  
सबसे पहले एकीकृत क्षेत्रीयता में उन उदेस्यों की प्राप्ति की जाती है जिनमे कम से कम जटिलता हो या कम से कम द्विपक्षीय स्वार्थ आड़े आते हों। 

सार्क देशों में पर्यटन विकास में द्विपक्षीय स्वार्थ अधिक आड़े नही आते है।  इसलिए पर्यटन विकास में एकीकृत क्षेत्रीयता का आगमन सरल है। 
पर्यटन की दृस्टि से एकीकृत क्षेत्रीयता में क्षेत्रीय छवि को बढ़ावा दिया जाता है और पर्यटन विकास के लिए कुछ विशेष उद्येस्य निहित किये जाते हैं  और उन विशेष पर्यटन संबंधी विशेष उद्येस्यों की प्राप्ति हेतु सभी देस एक साथ कार्य करते हैं। एकीकृत क्षेत्रीय पर्यटन विकास में क्षेत्र के लिए एक ख़ास छवि व पहचान को उदेस्य बनाया जाता है . इस विशेष छवि व पहचान प्राप्ति के लिए क्षेत्रीय राजनीतिक सुरक्षा , सामजिक -सांस्कृतिक धरातल आवश्यक कारक हैं। 


बचा हुया साहित्य एकीकृत सार्क / दक्षेस  पर्यटन विकास  उत्तराखंड पर्यटन में सहायक हो सकता है भाग -3 में पढ़ें  …………। 

Copyright @ Bhishma Kukreti  30  /5/2014  

Contact ID bckukreti@gmail.com
Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series to be continued ...

उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन श्रृंखला जारी …

                                   
 References

1 -
भीष्म कुकरेती, 2006  -2007  , उत्तरांचल में  पर्यटन विपणन परिकल्पना , शैलवाणी (150  अंकों में) , कोटद्वार , गढ़वाल
xx 


Objectives of Regionalism in Tourism and Regional Integration among SAARC Countries in context Travel, Tourism and Hospitality Industry Development Concepts in Uttarakhand; Objectives of Regionalism in Tourism and Regional Integration among SAARC Countries in context Travel, Tourism and Hospitality Industry Development Concepts in Haridwar Garhwal, Uttarakhand; Objectives of Regionalism in Tourism and Regional Integration among SAARC Countries in context Travel, Tourism and Hospitality Industry Development Concepts in Pauri Garhwal, Uttarakhand; Objectives of Regionalism in Tourism and Regional Integration among SAARC Countries in context Travel, Tourism and Hospitality Industry Development Concepts in Dehradun Garhwal, Uttarakhand; Objectives of Regionalism in Tourism and Regional Integration among SAARC Countries in context Travel, Tourism and Hospitality Industry Development Concepts in Uttarkashi Garhwal, Uttarakhand; Objectives of Regionalism in Tourism and Regional Integration among SAARC Countries in context Travel, Tourism and Hospitality Industry Development Concepts in Tehri Garhwal, Uttarakhand; Objectives of Regionalism in Tourism and Regional Integration among SAARC Countries in context Travel, Tourism and Hospitality Industry Development Concepts in Rudraprayag Garhwal, Uttarakhand; Objectives of Regionalism in Tourism and Regional Integration among SAARC Countries in context Travel, Tourism and Hospitality Industry Development Concepts in Chamoli Garhwal, Uttarakhand; Objectives of Regionalism in Tourism and Regional Integration among SAARC Countries in context Travel, Tourism and Hospitality Industry Development Concepts in Udham Singh Nagar Kumaon, Uttarakhand; Objectives of Regionalism in Tourism and Regional Integration among SAARC Countries in context Travel, Tourism and Hospitality Industry Development Concepts in Nainital Kumaon, Uttarakhand; Objectives of Regionalism in Tourism and Regional Integration among SAARC Countries in context Travel, Tourism and Hospitality Industry Development Concepts in Almora Kumaon, Uttarakhand; Objectives of Regionalism in Tourism and Regional Integration among SAARC Countries in context Travel, Tourism and Hospitality Industry Development Concepts in Champawat Kumaon, Uttarakhand; Objectives of Regionalism in Tourism and Regional Integration among SAARC Countries in context Travel, Tourism and Hospitality Industry Development Concepts in Bageshwar Kumaon, Uttarakhand; Objectives of Regionalism in Tourism and Regional Integration among SAARC Countries in context Travel, Tourism and Hospitality Industry Development Concepts in Pithoragarh Kumaon, Uttarakhand;

History Review of Khantudua or Bhail-Bhailo Festival initiation in Kumaon and Garhwal

History of Uttarakhand (Garhwal, Kumaon and Haridwar) -353 

                       By: Bhishma Kukreti (A History Research Student)

              People celebrate Khantudua or Bhail-Bhailo Festival on Ashuj month Sankrant in Kumaon and Garhwal as well.
  Both regions have their own folklore and reasons for celebrating this festival. However, Lakshmi Chand is common factor in celebrating Khantudua or Bhail-Bhailo Festival.

                 Lakshmi Chand performing Mantra Sadhana for winning Garhwal

   The Champawat Court priest or Raj Guru offered confidence to Lakshmi Chandra that he would win Garhwal by performing a specific mantra-Tantrik process. Guru or court priest went to Bengal for performing that specific winning Mantra. Raj Guru returned from Bengal after a year and Lakshmi Chandra attacked eighth time on Garhwal. Before attack in 1602, Lkashmi Chand performed Puja in Bageshwar and Jageshwar temples. On that time Khantuda Singh was regional commander of Garhwal army and he fought the battle with force. However, Lakshmi Chand army commander Gaida was able to kill Khantudva Singh. The win was on tine region of Garhwal. Lakshmi Chandra kept grass piles on hill tops and order was for army that when Khantuduva Singh was killed grass piles should be ignited so that message is reached to Champawat. Though, the win was mere tiny, army lit the grass piles. King Lakshmi Chandra ordered to people of Kumaon for celebrating Khantuduva by burning grass piles in night and singing Bhail-Bhailo –
Bhailo ji Bhailo ! Bhailo Khantuduva
Gainda Ki Jit , Khatad kee Har  
Gaida Padyu Shyel, Khantud pade Bhel !
 The frequent battles between Kumaon and Garhwal Kingdoms at border disturbed the villages both the sides. There was peace after the last battle.

Copyright@ Bhishma Kukreti Mumbai, India, bckukreti@gmail.com30/5/2014
History of Garhwal – Kumaon-Haridwar (Uttarakhand, India) to be continued… Part -354
                                                              
                                      References

1-Dr. Shiv Prasad Dabral, 1971, Uttarakhand ka Itihas Bhag-4, Veer Gatha Press, Dogadda, Pauri Garhwal, India 
2-Harikrishna Raturi, Garhwal ka Itihas
3-Dr. Patiram, Garhwal Ancient and Modern
4-Rahul Sankrityayan, Garhwal
5- Oakley and Gairola, Himalayan Folklore
6- Bhakt Darshan, Garhwal ki Divangit Vibhutiyan
7-Foster, Early Travels in India William Finch
8-Upadhyaya, Shri Shankaracharya
9-Shering, Western Tibet and British
10-H.G. Walton, Gazetteer of British Garhwal
11-B.P.Kamboj, Early Wall Paintings of Garhwal
12-H.g Walton, Gazetteer of Dehradun
13- Vimal Chandra, Prachin Bharat ka Itihas
14-Meera Seth, Wall Paintings of Western Himalayas 
15-Furar, Monumental Antiquities
16-Haudiwala, Studies in Indo-Muslim History
17- Rahul Khari 2007, Jats and Gujjar Origin, History and Culture
18- Upendra Singh, 2006, Delhi: Ancient History, Barghahan Books
19- B.S. Dahiya, 1980, Jats the Ancient Rulers (A Clan Study) , Sterling Publications
20- Maithani, Bharat –Gotrapravardeepika
21 Prem Hari Har Lal, 1993, The Doon Valley Down the Ages
22-Dashrath Sharma, Early Chauhan Dynasties
23- Shailndra Nath Sen, Ancient History and Civilization
24-H.M Elliot, 1867, The History of India as told by its Own Historians
25- Jaswant Lal Mehta, 1979, Advance Study in Medieval India
26- Nau Nihal Singh, 2003, The Royal Gurjars: their contribution to India, Anmol Publications 
27- H. Blochmann, 1873,  Aine e- Akbari Translation
(The History of Garhwal, Kumaon, Haridwar write up is aimed for general readers)
History of Garhwal from 1223-1804 to be continued in next chapter          
Notes on South Asian Medieval History of Garhwal;  SouthAsian Medieval History of Pauri Garhwal;  Medieval History of Chamoli Garhwal;  South Asian Medieval History of Rudraprayag Garhwal;  South Asian Medieval History of Tehri Garhwal;  Medieval History of Uttarkashi Garhwal;  South Asian Medieval History of Dehradun, Garhwal;  Medieval History of Haridwar ;  South Asian Medieval History of Manglaur, Haridwar;  South Asian Medieval History of Rurkee Haridwar ;  South Asian Medieval History of Bahadarpur Haridwar ; South Asian History of Haridwar district to be continued
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History Review of Khantudua or Bhail-Bhailo Festival initiation in Kumaon and Garhwal; History Review of Khantudua or Bhail-Bhailo Festival initiation in Kumaon and Garhwal in context History of Pauri Garhwal; History Review of Khantudua or Bhail-Bhailo Festival initiation in Kumaon and Garhwal in context History of Chamoli Garhwal; History Review of Khantudua or Bhail-Bhailo Festival initiation in Kumaon and Garhwal in context History of Rudraprayag Garhwal; History Review of Khantudua or Bhail-Bhailo Festival initiation in Kumaon and Garhwal in context History of Tehri Garhwal; History Review of Khantudua or Bhail-Bhailo Festival initiation in Kumaon and Garhwal in context History of Uttarkashi Garhwal; History Review of Khantudua or Bhail-Bhailo Festival initiation in Kumaon and Garhwal in context History of Dehradun Garhwal; History Review of Khantudua or Bhail-Bhailo Festival initiation in Kumaon and Garhwal in context History of Haridwar Garhwal;