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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Wednesday, January 1, 2014

साम्प्रदायक ताकतों को दूर रखने के लिए कठोर सिंग और भानुमती केंद्रीय सरकार को समर्थन देते रहेंगे !

चुगनेर,चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती 


(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )

(ब्याळि आपन  पौढ़ बल शिक्षा मंत्रीन मिड डे मील का वास्ता स्कूल की अपनी पट्टी से ही स्थानीय अनाज खरीदणो अर राज्य प्रकाशन को काम मेरठ की जगा राज्य मा ही करणो आदेस सबि संबंधित विभागुं कुण भेज।  अर तीन बजे प्रेस कोंफेरेंस बि करि।  घ्याळ दान अपण न्यूज टीवी चैनेलुं मा देख त भौत हि पुळेन (खुश ह्वेन ). पण काम की व्यस्तता   का कारण ऊं तैं पता ही नि चौल कि उत्तर प्रदेश का कुसपा नेता कठोर सिंह अर कैकुसपा  की नेत्याणि भानुमति न केंद्रीय सरकार से  समर्थन वापस लीणै धमकी दे दे।  रात घ्याळ दा ड्यार पौंछ  त मुख्यमंत्रीक फोन आयि कि अब्याक अबि म्यार ऑफिस आवो। ")
 मुख्यमंत्री कार्यालय मा माणावाल जी अर आश्चर्य कि करम सिंग रावत जी पैलि बिटेन छा। मुख्यमंत्री व्यस्त छा।   चीफ मिनिस्टर कु डिकोरम सेक्रेटरी घ्याळ दा तैं एक कैबन मा लीग। 
उख पार्टी क उत्तराखंड राज्य कु केंद्रीय प्रभारी चौधरी बलबिन्दर सिंग पैल इ बिटेन बैठ्यां छा।  दगड़ मा पार्टीक राज्य महामत्री पन्ना लाल टमटा बि छा। चौधरी बलविंदर सिंह हरयाणा का मुख्य्मंत्री तैं  कारन तो पार्टीन बलविंदर सिंग तै उत्तराखंड अर मणिपुर का प्रभारी बणै।  चूँकि मणिपुर दूर च त बलविंदर सिंग जादातर देहरादून मा ही पड्यां रौंदन। 
चौधरी बलविंदर सिंग - घ्याळ दा ! तुम पार्टी का वास्ता एक गौळ का फोड़ा छंवां! 
पन्ना लाल टमटा -याने पार्टी का वास्ता एक मुसीबत !
घ्याळ दान गुस्सा रोकिक  ब्वाल - क्या मतबल ?
चौंधरी बलविंदर सिंगन सुबेरक द्वी सर्कुलर की कापी दिखैक जोर से ब्वाल - इ क्या च ?
घ्याळ दा - मिस्टर सिंह ! फर्स्ट ऑफ आल आइ  डिमांड रिस्पेक्ट फ्रॉम आल बिकॉज  आइ पे रिस्पेक्ट टु अदर्स टू।
चौंधरी बलविंदर सिंगन बौळेक ब्वाल - ये  क्या   बक रिया इंग्रेजी में ?
पन्ना लाल टमटा - चौधरी जी मै समझाता हूँ शिक्षा मंत्री जी को.
चौंधरी बलविंदर - काहेका शिक्षा मंत्री ! इन्ने तो केंद्रीय सरकार ही गिराने का काम कर रिया है। 
घ्याळ दा -व्हट ! मीन त उत्तराखंड कृषि विकास अर उत्तराखंड राज्य उत्पादन उत्थान का बान सर्वोचित निर्णय ले। 
पन्ना लाल टमटा - पण घ्याळ दा ! आपका निर्णय से केंद्रीय सरकार गिरण वाळ च। 
चौधरी बलविंदर सिंग -घ्याळ दा ! तुमे यो नीतिगत फैसला लेन्ने कौन बोल्ले है ?
घ्याळ दा -इखमा क्या च ? राज्य हित मा ही मेरो निर्णय च। 
चौधरी बलबिन्दर - पर थारे उत्तराखंड राज्य हित के निर्णय से  केंद्रीय सरकार गिरने वाली है उसका क्या ?
घ्याळ दा - सर ! इन आदेशों का केंद्रीय सरकार से क्या तालुकात ?
चौधरी बलबिन्दर सिंग - ये पन्ना लाल तू इ समजा इस मंत्री को !
पन्ना लाल टमटा -घ्याळ दा ! मिड डे मील का वास्ता जो अनाज अर दाळ की सप्लाइंग ऐजेंसी च ना ?
घ्याळ दा -हाँ ! डेप्राइव्ड पीपल वेलफेयर सोसाइटी बिजनौर। 
पन्ना लाल - अर उत्तराखंड प्रकाशन का काम कख हूंद 
घ्याळ दा - वीं कम्पनीक नाम च दीनहीन दुनिया प्रकाशन , मेरठ। 
बलबिन्दर -जाणे है डेप्राइव्ड पीपल वेलफेयर सोसाइटी, बिजनौर का मालिक कौन है ?
घ्याळ दा - नहीं 
पन्ना लाल - बहिन भानुमती जी की बहिन दयावती डेप्राइव्ड पीपल वेलफेयर सोसाइटी, बिजनौर की मालिकिन च 
घ्याळ दा - ये मेरी बवे !
पन्ना लाल -अर दीनहीन दुनिया प्रकाशन , मेरठ का मालिक कठोर सिंग जीकी समदण श्रीमती कौशल्या च। 
घ्याळ -औ अब आइ मेरि समज मा।  तो बहिन भानुमती और कठोर सिंह चाहते हैं कि उनके व्यापार में कोई छेड़ -छाड़ ना हो। 
बलबिन्दर -हाँ ! उनके पेट में लात मारोगे तो वो सरकार गिराएंगे ही !
घ्याळ दा -पण उत्तराखंड का हित भी  त  महत्वपूर्ण च। 
बलबिन्दर - पार्टी बचेगी तो ही उत्तराखंड का हित होगा कि नही ?
घ्याळ दा - अब क्या करण ?
बलबिन्दर -इस आदेस को अबि का अबि खारिज करना है। 
घ्याळ दा -पन्नालाल जी  ! ह्रदय से ब्वालो !   क्या यु सै च कि उत्तराखंड का हित की बलि चढ़ाये जाव ?
पन्ना लाल - अब दिल्ली मा पार्टी क सरकार बचाण त उत्तराखंड हित तैं कचरा पेटी मा डाळण ही पोड़ल। 
घ्याळ दा - ठीक च।  मिस्टर बलवबिन्दर जी ! आइ शयल टेक बैक दोज ऑर्डर्स बैक। 
बलबिन्दर -मै दिल्ली फोन करता हूँ। 
बलबिन्दर सिंह (फोन पर ) -महामंत्री जी ! बहिन भानुमती और कठोर सिंग जी के  पास  फिलर्स भेज दो कि उनके बिजिनेस पे कोई फर्क ना पड़  रिया है। हाँ हाँ आदेस वापस ले लिए हैं। कनि भर बी फिकर ना करो।  थैंक्स कोनो बात।  यो तो म्हारो काम है। 
बलबिन्दर - अब उन दोनों आदेशों को वापस लो।  भाई ओ दोनों सचिवों को भेजो
करम सिंह रावत अर माणावाल भितर आंदन। 
बलबिन्दर -घ्याळ दा मै जा रिया हूँ।  दोनों आदेस अबि वापस लो 
बलबिन्दर सिंग भैर जांद अर राज्य चीफ सेक्रेटरी भितर आंद ,
चीफ सक्रेटरी -मिस्टर रावत ! व्हट इज हैपेनिंग ? यू डोन्ट नो वी आर बाउंड बाइ रूल्स ऐंड रेगुलेशन्स 
रावत -सॉरी सर !आइ वाज ऑन लीव। 
चीफ सेक्रेटरी - व्हट अबाउट यू ?
माणावाल -सर ! मिस्टर मिनिस्टर इंसिस्टेड टु डु सो। 
चीफ सेक्रेटरी - इंसिस्टेड ! नॉनसेंस।  अब द्वी आदेस की कॉपी हरेक विभाग से वापस मंगवावो। मि मुख्यमंत्री जी से बोलि दींदु कि सुबेर  दस बजी तक सब आदेस वापस ह्वे जाल। 
(चीफ सेक्रेटरी भैर जांद )
करम सिंह रावत -माणावाल जी ! सी दैट द वर्क इज कंप्लीटेड बाइ टेन। 
माणावाल - सर एक गलती ह्वे गयाइ 
रावत -क्या ?
माणावाल - वु क्या च।  दिन भर विभागीय कम्प्यूटर अर प्रिंटर सब होल्ड ह्वे गे छा 
घ्याळ दा - तो ?
माणावाल - तो अबि तलक आदेस की एक कापी बि दुसर विभागों मा नि गे साक। 
घ्याळ - हे भगवान ! तीन बचै दे !
माणावाल - सौरी सर ! गलती ह्वे गे। 
घ्याळ दा - नै नै ! हम सब मनुष्य छंवां त हरेक से गलती होंदी च। 
रावत -एस मिनिस्टर !
माणावाल -जी मंत्री जी
उना मुख्यमंत्री टीवी मा  न्यूज दिखणा छा - ब्रेकिंग न्यूज - अभी अभी सूत्रों से पता चला है कि श्री कठोर सिंह और बहिन भानुमति ने सांप्रदायक ताकतों को बहार  रखने हेतु केंद्रीय सरकार को बाहर से समर्थन देते रहने का फैसला लिया है 


Copyright@ Bhishma Kukreti  28/12/2013 


[गढ़वाली हास्य -व्यंग्य, सौज सौज मा मजाक  से, हौंस,चबोड़,चखन्यौ, सौज सौज मा गंभीर चर्चा ,छ्वीं;- जसपुर निवासी  के  जाती असहिष्णुता सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; ढांगू वाले के  पृथक वादी  मानसिकता सम्बन्धी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;गंगासलाण  वाले के  भ्रष्टाचार, अनाचार, अत्याचार पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य; लैंसडाउन तहसील वाले के  धर्म सम्बन्धी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;पौड़ी गढ़वाल वाले के वर्ग संघर्ष सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; उत्तराखंडी  के पर्यावरण संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;मध्य हिमालयी लेखक के विकास संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;उत्तरभारतीय लेखक के पलायन सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; मुंबई प्रवासी लेखक के सांस्कृतिक विषयों पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य; महाराष्ट्रीय प्रवासी लेखक का सरकारी प्रशासन संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; भारतीय लेखक के राजनीति विषयक गढ़वाली हास्य व्यंग्य;सांस्कृतिक मुल्य ह्रास पर व्यंग्य , गरीबी समस्या पर व्यंग्य, आम आदमी की परेशानी विषय के व्यंग्य, जातीय  भेदभाव विषयक गढ़वाली हास्य व्यंग्य; एशियाई लेखक द्वारा सामाजिक  बिडम्बनाओं, पर्यावरण विषयों   पर  गढ़वाली हास्य व्यंग्य, राजनीति में परिवार वाद -वंशवाद   पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य; ग्रामीण सिंचाई   विषयक  गढ़वाली हास्य व्यंग्य, विज्ञान की अवहेलना संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य  ; ढोंगी धर्म निरपरेक्ष राजनेताओं पर आक्षेप , व्यंग्य , अन्धविश्वास  पर चोट करते गढ़वाली हास्य व्यंग्य    श्रृंखला जारी  ]

Rapture of Geographical Beauty or Nature’s Imagery (Prakriti) in Garhwali Folk Drama

गढवाली लोक नाटकों / लोक  गीतों में   प्रकृति रस

Review of Characteristics of Garhwali Folk Drama, Folk Theater/Rituals and Traditional Plays part -65

                                    Bhishma Kukreti

          There is no Prakriti Ras in Bharat’s Natya Shastra. However, many poetic and drama scholars added new raptures as Prakriti or rapture by geographical nature. The rapture by geographical beauty or nature is part of rapture of love.
 The poems or dramas or literature related to geographical nature that creates rapture is called rapture of geographical Beauty or imagery.

ग्वीराळ फूल फूलिगे म्यार भीना
(गढ़वाली लोक गीत)
संकलन डा. शिवा नन्द नौटियाल
इंटरनेट प्रस्तुति - भीष्म कुकरेती 

         ग्वीराळ फूल फूलिगे म्यार भीना
           माल़ू बेडा फ्यूलड़ी फूलिगे भीना
          झपन्याळी स्किनी फूलिगे भीना
          घरसारी लगड़ी फूलिगे भीना
          द्यूंळ-थान कुणजु  फूलिगे भीना
       गैरी गदनी तुसार फुलिगे भीना
         डांडयूँ फुलिगे बुरांस म्यार भीना
           डळ फूलों बसंत बौडिगे भीना
            बसंती रंग मा रंगदे भीना
            ग्वीराळ फुलिगे म्यारा भीना

 I this folk song and dance, there is description of blooming of various types of flowers and create rapture by natural geographical beauty .

Copyright@ Bhishma Kukreti 27/12/2013

Review of Characteristics of Garhwali Folk Drama, Community Dramas; Folk Theater/Rituals and Traditional to be continued in next chapter.

                 References
1-Bharat Natyashastra
2-Steve Tillis, 1999, Rethinking Folk Drama
3-Roger Abrahams, 1972, Folk Dramas in Folklore and Folk life 
4-Tekla Domotor , Folk drama as defined in Folklore and Theatrical Research
5-Kathyrn Hansen, 1991, Grounds for Play: The Nautanki Theater of North India
6-Devi Lal Samar, Lokdharmi Pradarshankari Kalayen 
7-Dr Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand ka Itihas part 1-12
8-Dr Shiva Nand Nautiyal, Garhwal ke Loknritya geet
9-Jeremy Montagu, 2007, Origins and Development of Musical Instruments
10-Gayle Kassing, 2007, History of Dance: An Interactive Arts Approach
11- Bhishma Kukreti, 2013, Garhwali Lok Natkon ke Mukhya Tatva va Charitra, Shailvani, Kotdwara
12- Bhishma Kukreti, 2007, Garhwali lok swangun ma rasa ar Bhav , Chithipatri
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Rapture  of Natural Beauty or Geographical Beauty in Garhwali Folk Drama, Folk Rituals, Community Theaters and Traditional Plays; Rapture of Geographical Beauty or Nature’s Imagery in Garhwali Folk Drama, Folk Rituals, Community Theaters and Traditional Plays from Chamoli Garhwal, North India, South Asia; Rapture  of Geographical Beauty or Nature’s Imagery in Garhwali Folk Drama, Folk Rituals, Community Theaters and Traditional Plays from Rudraprayag Garhwal, North India, South Asia; Rapture of Geographical Beauty or Nature’s Imagery in Garhwali Folk Drama, Folk Rituals, Community Theaters and Traditional Plays from Pauri Garhwal, North India, South Asia; Rapture of Geographical Beauty or Nature’s Imagery in Garhwali Folk Drama, Folk Rituals, Community Theaters and Traditional Plays from Tehri Garhwal, North India, South Asia; Rapture of Geographical Beauty or Nature’s Imagery in Garhwali Folk Drama, Folk Rituals, Community Theaters and Traditional Plays from Uttarkashi Garhwal, North India, South Asia; Rapture of Geographical Beauty or Nature’s Imagery  in Garhwali Folk Drama, Folk Rituals, Community Theaters and Traditional Plays from Dehradun Garhwal, North India, South Asia; Rapture of Geographical Beauty or Nature’s Imagery in Garhwali Folk Drama, Folk Rituals, Community Theaters and Traditional Plays from Haridwar Garhwal, North India, South Asia;
गढवाली लोक नाटकों में  प्रकृति रस  टिहरी गढ़वाल के गढवाली लोक नाटकोंमें  प्रकृति रस;उत्तरकाशी गढ़वाल के गढवाली लोक नाटकों में   प्रकृति रस,हरिद्वार गढ़वाल के गढवाली लोक नाटकों में  प्रकृति रस;देहरादून गढ़वाल केगढवाली लोक नाटकों में  प्रकृति रस;पौड़ी गढ़वाल के गढवाली लोक नाटकों में प्रकृति रस;चमोली गढ़वाल के गढवाली लोक नाटकों में प्रकृति   रसरुद्रप्रयागगढ़वाल के गढवाली लोक नाटकों में प्रकृति   रस;

पर्यटन व्यवसाय में अन्तर्राष्ट्रीय पयटक स्थलों की जानकारियों का महत्व

 Importance of  Understanding Features of Worldwide Destinations in Tourism Development

(Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series--29) 
                                          उत्तराखंड में पर्यटन  आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग29   
                                                       लेखक : भीष्म कुकरेती     
                        
                                          (
विपणन  विक्री प्रबंधन विशेषज्ञ )

 आज पर्यटक व्यवसायी को जागतिक पर्यटक स्थलों  पर्यटन विपणन की मोटे तौर पर आवश्यक है। 
जागतिक पर्यटन संबंधी कुछ  जानकारियां इस प्रकार हैं -
कुछ स्थान दूसरे स्थलों के लिए पर्यटन द्वार होते हैं। जैसे  दक्षिण प्रशांत एसिया चीन अदि के लिए हांगकांग पर्यटन द्वार है।  जमनोत्री ,गंगोत्री , केदारनाथ व बद्रीनाथ हेतु ऋषिकेश प्रवेश द्वार है। 
प्रत्येक स्थान प्रत्येक पर्यटक के लिए सुलभ नही हो सकता है। या प्रत्येक पर्यटक स्थल की दूरी  व सुलभता अलग अलग होती है। जैसे तुंगनाथ जाने की सुलभता बद्रीनाथ से अलग व भिन्न है। 
कुछ पर्यटक स्थल दूसरे बराबरी के पर्यटक स्थल से अधिक पर्यटक रिझाने में समर्थ होता है।  जैसे हिमाचल गैर धार्मिक यात्रियों को आकर्षित करने में उत्तराखंड से अधिक सक्षम है। 
अफ्रीका व दक्षिण अमेरिका पर्यटकों को कम आकर्षित करते हैं जब कि ये महाद्वीप /उपमहाद्वीप अपने आप में विलक्षण हैं। 
एसिया की जनसंख्या अधिक होने के बाद भी दुनिया के सबसे व्यस्त 30 एयरपोर्टों में से एसिया के केवल पांच एयरपोर्ट ही हैं।
              विश्व में टाइम जोन  व जलवायु 
 विश्व का कोई भाग एक जैसा नही है।  उसमे विभिन्नताएं हैं।  एक कारण टाइम जोन का वैशिष्ठ्य भी है। जैसे यदि अभी भारत में  रहे हैं तो लंदन में समय कुछ और ही होगा और कनाडा मे  कुछ और। 
विश्व में समय मानक  ग्रीनविच मीन टाइम (GMT ) है।  
किस पर्यटक स्थल में किन  किन देसों के पर्यटक अधिक आते है  को ध्यान में रखकर पर्यटक व्यवसायी को टाइम जोन का ध्यान रखना होता है।  बहुत से देसों में समय मानक  साल में दो बार जाता है जैसे ब्रिटेन में दो बार मानक बदले जाते हैं। 
 इसी तरह अक्षांक  रेखाओं का ज्ञान भी कई पर्यटक व्यापारियों को होना आवश्यक है। जैसे 
सिंगापूर - इक्वेट्रल अक्षांस है 
हॉन्गकॉन्ग -टॉपिकल है 
मियामी -सब ट्रोपिकल है 
पेरिस -टेम्परेट है

                      जलवायु च समय 
जलवायु भी पर्यटन को प्रभावित करती है।  जैसे जाड़ों में गुजराती प्रवासी इंग्लैण्ड से भारत आते हैं। 
इक्वेट्रल जोन - जैसे ब्राजील -सभी मौसमों में ग्राम , वाष्पपूर्ण , आद्रतापूर्ण 
ट्रॉपिकल (उष्ण कट वंधीय ) - अफ्रिका या दक्षिण भारत  जहां जाड़ों का मौसम कम ही होता है। 
ट्रॉपिकल मानसून - जैसे भारत में 
ट्रॉपिकल डिजर्ट - ग्राम रेगिस्तान जैसे सहारा का रेगिस्तान 
वार्म टेम्परेट (गर्म )- गर्म गर्मी का मौसम , जड़ों में ठंड जैसे उत्तरी भारत व मध्येशिया 
कूल टेम्पेरेट - जैसे कनाडा आदि।  बद्रीनाथ भी इसी श्रेणी में आता है
आर्कटिक - स्कैंडीवियन देस (डेनमार्क , स्विट्जरलैंड , नॉर्वे आदि ) - जाड़ों में कड़ाके की ठंड पड़ती है 
ध्रुवीय जोन - बर्फीला स्थल जैसे ग्रीनलैंड
 इसी तरह वर्षा की मात्रा भी जलवायु परिवर्तित करती है और यही प्रतिवर्तन पर्यटन स्थल की विशेषता बन जाता  है 
 भारतीय महाद्वीप में जलवायु परिवर्तन वर्ष में छह बार होता है जो पर्यटन को प्रभावित करता है।  यदयपि दक्षिण भारत में जलवायु में परिवर्तन अधिक नही होता है किन्तु यहाँ पहाड़ियों में जलवायु परिवर्तन होता है।  
आद्रता भी जलवायु परिवर्तन की निसानी होती है।
जलवायु परिवर्तन से पर्यटक स्थल में सुविधाओं में परिवर्तन करना पड़ता है।  जैसे देहरादून के होटलों को जाड़ों में रूम हीटर की सुविधा देना व गर्मियों में ऐयरकुलिंग की सुविधा प्रदान करना ।  
जलवायु परिवर्तन पर्यटकों के आकर्षण व्यवहार में परिवर्तन लाते हैं।  जैसे प्रवासियों के बुजुर्ग माँ बाप जाड़ों में मैदानो में अपने बच्चों के साथ रहते हैं और गर्मियों में पहाड़ों में आ जाते हैं।  








Copyright @ Bhishma Kukreti 1 /1/2014 
Contact ID bckukreti@gmail.com 
Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series to be continued ...
उत्तराखंड में पर्यटन  आतिथ्य विपणन प्रबंधन श्रृंखला जारी 

                                   
 References

1 -
भीष्म कुकरेती, 2006  -2007  , उत्तरांचल में  पर्यटन विपणन परिकल्पना ,शैलवाणी (150  अंकों में ) कोटद्वार गढ़वाल 

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Friday, December 27, 2013

Parakram Shah as Mukhtyar or Representative of Pradyuman Chandra in Kumaon

  (History of Kumaon from 1000-1790 AD)
                          
                     (History of Panwar Dynasty Rule in Kumaon)
History of Uttarakhand (Garhwal, Kumaon, Haridwar) - Part 228

                                              ByBhishma Kukreti
                 When Jaya Kirti Shah had to flee from Devalgarh due to attack of Joshi brothers, Pradyuman Chandra (presently Kumaon King) came to Shrinagar.
  Pradyuman sent his younger brother Parakram to Almora. Parakram Shah was representing Pradyuman in Kumaon. In 1780, Parakram was called to Almora from Shrinagar.
 Garhwal administrators as Ajab Ram Negi advised him to become Garhwal king in place of Jaya Kirti Shah. Parakram was also ambitious to take Kumaon Kingdom. However, Joshi brothers did not encourage him. Joshi brothers did not like Parakram Shah. Parakram Shah started making friends the supporters of Mohan Chandra (who was in exile) in Almora.  Parakram was administrating Kumaon kingdom. However, Parakram was proved as weak administrator and he was also not liked by the people.
   Parakram never wanted the Kumaon Kingdom. He was more interested in getting crown of Garhwal. When Pradyuman Chandra returned to Almora from Shrinagar, Parakram Shah started his journey to Shrinagar. Before, reaching Shrinagar by Parakram Shah, Jaya Kirti Shah recaptured Shrinagar Garhwal. As per advice of Parakram Shah, Ajab Ram started making strategy to dislodge Jaya Kirti Shah.
             Jaya Kirti Shah sent Dhani Ram Dobhal for getting army from Sirmaur. Parakram went to Almora for taking advices from Pradyuman Shah.

Copyright@ Bhishma Kukreti -bckukreti@gmail.com 27/12/2013

                                      References

Dr. Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand ka Itihas Bhag 10, Kumaon ka Itihas 1000-1790
Badri Datt Pande, 1937, Kumaon ka Itihas, Shri Almora Book Depo Almora
Devidas Kaysth, Itihas Kumaon Pradesh
Katyur ka Itihas, Pundit Ram Datt Tiwari
Oakley and Gairola, Himalayan Folklore
Atkinson, History of District Gazette
Menhadi Husain, Tuglak Dynasty
Malfujat- E Timuri
Tarikh -e-Mubarakshahi vol 4
Kumar Suresh Singh2005, People of India
Justin Marozzi, 2006, Tamerlane: Sword of Islam
Bakshsingh Nijar, 1968, Punjab under Sultans 1000-1526 
The Imperial Gazetteer of India, Volume 13 page 52 
Bhakt Darshan, Gadhwal ki Divangit Vibhutiyan
Mahajan V.D.1991, History of Medieval India
Majumdar R.C. (edited) 2006, The Sultanate
Rizvi, Uttar Taimur Kalin Bharat
Tarikhe Daudi
Vishweshara nand , Bharat Bharti lekhmala
Aine-e Akbari
Akbari Darbar
Tareekh Badauni
Eraly Abraham, 2004 The Mogul Throne
The Tazuk-i-Jahangiri
Maularam- Gadh Rajvansh Kavya
Ramayan Pradeep
Annatdev’s Smriti-Kaustubh
Sarkar, History of Aurangzeb
Jadunath Sarkar, History of Aurangzeb
Sarkar, fall of Mogul Empire
Sailendra Nath Sen, 2010, An Advanced History of Modern India
(The History of Garhwal, Kumaon, Haridwar write up is aimed for general readers)
                           
History of Garhwal – Kumaon-Haridwar (Uttarakhand, India) to be continued… Part -230  
History of Kumaon (1000-1790) to be continued….
Himalayan, Indian History of Chand Dynasty rule in Kumaon to be continued…
  (Himalayan, Indian History (740-1790 AD to be continued…)
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Notes on History of Kumaon, Himalaya; History of Pithoragarh Kumaon, Himalaya; History of Champawat Kumaon, Himalaya; History of Bageshwar Kumaon, Himalaya; History of Nainital Kumaon, Himalaya; History of Almora Kumaon, Himalaya; History of Udham Singh Nagar Kumaon, Himalaya; History of Kumaon, Himalaya, North India; History of Kumaon, Himalaya, South Asia;

जब उत्तराखंड उत्पादन समर्थन का कारण दिल्ली सरकार खतरा मा पोड़ !

  चुगनेर,चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती 

(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )
                      जब घ्याळ दा कुछ नि छा तो  गढ़वाली अर प्रवास्यूं तरां  घ्याळ दा बि पहाड़ी गाउँ मा घटदी खेती से उद्वेलित रौंद छा। आम गढ़वाली या प्रवासी तरां घ्याळ दा  तैं बि चिंता छे कि यद्यपि पहाड़ी अनाज -दाल की भारी मांग च किन्तु पहाडूं मा रोज खेत बांज पड़ना ही छन।  अब जब घ्याळ दा शिक्षा मंत्री बौण गेन त आम पहाड़ी नेतौ तरां प्रशासन, दिन मा दस मीटिंगुंमा  शिरकत करण अर भाषण दीण मा व्यस्त ह्वे गेन। एक दिन वूंम बच्चों वास्ता मिड डे मील की   फ़ाइल आयि अर तब पता लग कि मिड डे मील मा स्थानीय खाद्य पदार्थ कु जिकर ही  नि छौ . घ्याळ दान सोचि कि यदि मिड डे मील तैं स्थानीय कृषि उत्पादन से जुड़े जावो तो कुछ ना सै तो  स्कूल का आस -पास का गांउं  मा द्वी चार मौ  तो ग्युं -सट्टी अर दाळ उगाण शुरू कौर द्याल।
                       वै दिन ही शिक्षा विभाग मा  व्यवस्था अर सरकारी किताबुं प्रकाशन संबंधित फ़ाइल ऐन।  घ्याळ दा खौंळे गेन कि शिक्षा मंत्रालय का सबि प्रकाशन मेरठ बिटेन हूंद।  जब कि उधम सिंग नगर , हरिद्वार अर देहरादून का इंडस्ट्रियल जोन मा मॉडर्न प्रेस छन जो अंतररास्ट्रीय प्रकाशन कम्पन्युं किताब छ्पदन। घ्याळ दा तैं बि इखमा उत्तराखंड उद्यम विकास की  किरण नजर आयि।
      
             चूँकि आजकल  करम सिंह रावत जी छुटि पर  छा तो घ्याळ दा पर ब्रिटिश रूल , अमेंडेड रूल, अलण रूल -फलण रूल कु  बोझ नि छौ।  
 घ्याळ दान माणावाल जी तैं बुलाइ कि सबि संबंधित विभागुं कुण आदेस भेजो कि तुरंत मिड डे मील का वास्ता  केवल स्कूल की पट्टी में उत्पादित अनाज -दाळ ही उपयोग होना चाहिए।  घ्याळ दान दुसर आदेस भिजणो आदेस दे कि उत्तराखंड में शिक्षा विभाग का प्रकाशन का कार्य उत्तराखंड मा कार्यरत प्रेसों को ही  दिया जाय।  दूसरे प्रदेशों में प्रकाशन कार्य केवल विशेष तकनीकी फायदे की स्तिथि मे ही दिया जाय। 
                  माणावाल जीन घ्याळ दा तैं कथगा इ  समझाइ कि मिड डे मील यद्यपि शिक्षा विभाग का अंतर्गत आंद पण इकमा केंद्रीय सरकार , राज्य सरकार कु  पब्लिक डिस्ट्रीब्यूसन विभाग आदि अन्य विभाग बि शामिल छन तो इकतरफा आदेस उचित नी च।  इनी शिक्षा विभाग का प्रकाशन मा केवल शिक्षा विभाग ही सम्मलित नी च बलकण मा स्टेट परचेज डिपार्टमेंट , वित्त विभाग व ऑडिट जन विभाग शामिल छन।  पण आज घ्याळ दा पर पहाड़ कृषि विकास अर उत्तराखंड उद्यम विकास कु डौंड्या नरसिंग चड्युं  छौ तो घ्याळ दान माणावाल जीक नि सूण।  
 माणावाल जी एक घंटा का अंदर द्वी सर्कुलर लै गेन।  घ्याळ दा तैं आश्चर्य ह्वे कि मिड डे  मील मा अनाज -दाळ -मसाला खरीदी मा बारा अलग अलग विभाग अर तेतालीस उप विभाग सम्मलित छा।  इनि शिक्षा प्रकाशन मा त्याइस विभाग अर तिहत्तर उप विभाग शामिल छा।  याने कि एक किताब छपण मा तिहत्तर उप विभागुं तैं कै ना कै रूप मा क्रियाशील हूण पोड़द।
   घ्याळ दान सर्कुलर मा दस्तखत करिन अर माणावाल जी तैं आदेस दे कि सर्कुलर आज ही सब जगह पौंच जाण चयेंद। 
  माणावाल -  एस मिनिस्टर ! बट  मिनिस्टर !
घ्याळ दा - क्या ?
माणावाल -एस मिनिस्टर याने आप तै सम्बोधन 
घ्याळ -अर बट  ?
माणावाल - सर ! नीतिगत विषय पर शिक्षा मुख्य सचिव की सहमति लीण  आवश्यक च । 
घ्याळ दा -रावत जीन नितरसि प्रशासन का मुख्य कार्य का बारा मा क्या बोल छौ ?
माणावाल - कि प्रशाशनिक अधिकार्युं काम राजनैतिक नीतियुं पर  कार्यवाही करण च ना कि नीति बणाण।
घ्याळ - तो यूं द्वी सर्कुलरुं तैं सबि विभागुंम भिजणा इंतजाम कारो।   अर तीन बजे एक प्रेस कोंफेरेंस का इंतजाम बि कारो। 
माणावाल -हाँ मंत्री जी ! किन्तु मंत्री जी ?
घ्याळ -प्रेस कोंफेरेंस का इंतजाम 
माणावाल जी -एस मिनिस्टर। 
तीन बजे प्रेस कल्ब देहरादून मा शिक्षा मंत्री की प्रेस कोंफेरेंस ह्वे। शिक्षा मंत्रीन पहाड़ी खेती सुधार -विकास का वास्ता मिड डे मील मा  क्षेत्रीय -अनाज दाळ -मसालों की आवश्यकता अर अपण निर्देश अर प्रदेस मा प्रकाशन उद्योग तैं बढ़ावा दीणो बान शिक्षा विभाग का प्रकाशन उत्तराखंड मा हूण चयेंद पर व्याख्यान ही नि दे अपण आदेस की भी बात कार। घ्याळ दाक हिसाब से प्रेस कॉन्फ्रेंस सफल छे।  पत्रकारुं हिसाब से कोंफेरेंस  बेकार टैम पर छे।  रात हूंद त दारु -सारु बि चल जांद। 
खैर चूंकि हिंदी टीवी चैनेलों मा तीन बजी से सात बजी तक कुछ ख़ास विषय नि होंदन त द्वी चैनेलूंन ब्रेकिंग न्यूज मा बोलि दे कि उत्तराखंड में उद्योग विकास अर कृषि विकास हेतु शिक्षा विभाग की पहल! अर देखा देखि पांच छै चैनलूंन बि इनि  न्यूज तैं ब्रेकिंग न्यूज बणै दे। 
अर सात बजी आंद आंद उत्तरप्रदेश -उत्तराखंड संबंधित चैनेलुँ मा या न्यूज मुख्य न्यूज बणी गे। 
 आठ बजी सबि क्षेत्रीय अर रास्ट्रीय समाचार चैनेलों मा ब्रेकिंग न्यूज आयि कि उत्तर प्रदेस की दो मुख्य पार्टियों कुसपा अर कैकुसपा द्वारा केंद्रीय सरकार को समर्थन न देने का ऐलान और शायद कल कुसपा के कठोर सिंह और कैकुसपा  की भानुमति महामहिम रास्ट्रपति से मिल सकते हैं।   
नौ बजे घ्याळ दा घौर पौंछिन।  आज अपण निर्णय से घ्याळ दा अति खुस छौ ।  दगड़मा घ्याळ दा और बि खुश छा कि टीवी चैनेलों मा उत्तराखंड का समाचार ऐ। 
साढ़े नौ बजि , घ्याळ दान पैलो गफा डाळि इ छौ कि मुख्यमंत्री क ऑफिस बिटेन मुख्यमंत्रीक फोन आयि , " घ्याळ जी ! यी क्या च ? तुमर कारण दिल्ली मा हमर पार्टीक सरकार खतरा मा ऐ गे।  तुम तुरंत म्यार कार्यालय पंहुचो। "


** कल पढ़ें कि घ्याळ दा के निर्णय से दिल्ली सरकार क्यों खतरे में पड़ी ?



Copyright@ Bhishma Kukreti  27/12/2013 


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