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Sunday, January 1, 2012

सन २०१२ की बाक (भविष्यवाणी)

सन २०१२ की बाक (भविष्यवाणी )
 
    (Garhwali Humour, Garhwali Satire, Humour and Satire from Uttarakhandi Languages,
Satire and Humour in Himalayan Languages.)
                                                    
                      Bhishm Kukreti
              
                  अब जन कि रिवाज च नयो सम्बत्सर मा गौं का पंडित जी नै सालौ भविष्य बथान्द .
ए साल बान बि पन्डि जी न बाक बोली.
                      जन कि ये साल बि ह्यूंद मा हिमाला मा बर्फ़बारी ह्वेली अर मैदानी इलाका मा ठंड पोड़ली.
अमीर लोकुं कुणि कंपकंपी जड्डू आनंद दायक होलू. अमीर लोक अपण गरम कोट, गरम सुलार, गर्म पैंट
गरम मफलर, गरम स्वेटर, गरम दस्ताना , गरम डिसाण , हीटर , गीजर का प्रयोग जड्डू भगाणो बान कम कारल
पण यूँ चीजुं तैं अपण अमीरी दिखाणो बान जादा प्रयोग कारल.
गरीब लोक परेशान राला बल इन कर्करू जड्डू मा ज्यान बचाणो लारा कखन ल़ाण . राती आग तापणो लखड़ कखन
लाण !
                जड्डू मा अमीर लोक जड्डू खाणो कश्मीर, शिमला, मसूरी, नैनीताल जाला अर उख जड्डू अं मजा ल्याल.
ठनडन गरीब लोक मोरणा राला अर सरकार भर्वस अ हीटर चलाणी राली , गैर सरकारी दल विरोध का गरम बथौं
चलैक माहौल तैं गरम करणे कोशिश करणा राला. सबी राजनैतिक दल गरीबुं मरणो क आग मा अपण राजनैतिक
भड्डूअ दाळ पकाणा राल .
               पैथराँ सरकारी कुम्भकरणी निंद टुटली अर जड्डू निरोधक इन्तजामौ बान ठेकेदारूं खोज ह्वेली. टेंडर पास कराये
जाल. 
             इथगा मा रुड़ी ऐ जालो अर इना सरकारी ठेकेदार शीत निरोधक योजनौ पर काम शुरू कारल कि टी.वी. अर
प्रेस मीडिया से गैर सरकारी द्लूं तैं पता चौलल बल रूडी ऐ गे अर पारा पैंतालीस डिग्री तलक जाण बिसे गे . गैर सरकारी
द्लूं तैं टी.वी चैनलूं अर प्रेस मीडिया से इ पता चौलल बल ल़ू से सैकड़ाक लोख मोरी गेन. जनि गैर सरकारी द्लूं तैं
टी.वी. चैनल अर प्रेस से पता चौलल बल गौंऊँ मा शहरुं मा पाणी कि कमी ह्व़े गे, ग्रामी क बीमारी सौरणि(फ़ैलण )
त सबी राजौं क विरोधी दल मुख्य मंत्री से इस्तीफा मांगल तब हरेक राज्य का मंत्र्युं अर प्रशासन तैं पता चौलल बल
राज्य मा रुड़ी /गर्मी से कुहाल ह्व़े गे. बस दे दनादन रुड़ी निरोध का कथगा इ योजनौं बान जेठअ मैना मा ठेकेदार तैनात
ह्व़े जाला . उना जड्डू निरोधक का काम शुरू इ नि ह्व़े कि इख जेठ मैना क अंत मा ग्रीष्म निरोधक योजनौं का दस्ता गौं गौं ,
शहर शहर पौंची जाला .
             इना ग्रीष्म निरोधक ठेकेदार पाणी कनो बट्याण पर काम शुरू कारल कि तैबरां बरखा अर बाढ़ आई जैली . टी.वी अर
प्रेस से ही भादों -असूज मैना मा सरकार तैं पता चौलल बल बरखा से जन जीवन असत व्यस्त ह्व़े गे त बाढ़ रोको योजना
बौणली अर बाढ़ रोको योजना का ठेकेदार गौ-गौ अर शहर-शहर पौंची जाला . पण हे भगवान !
तैबारी जड्डू अपण प्रकोप फैलाण शुरू करी दयालो.
                     सरकार, सरकारी महकमा को काम करणो ढर्रा, फिलम कु ढर्रा अर चिलम पीणो ढर्रा मा बदलौ नि
होंद त पन्डि जी कि बाक (भविष्य बाणी ) बि झूट नि होंदी. सन द्वी हजार मा बि इनी ह्व़े छौ, सन २०११ मा बि इनी ह्व़े
त सन द्वी हजार बारा मा बि इनी होण . पन्डि जी झूट बोली नि सकदन किलैकि सरकार अर सरकारी महकमा अपण काम करणों
ढर्रा मा बदलाव लाण से रै त सब कुछ इन चलणो रालू .
               रघुकुल रीति सदा चलि आई , कुवां कि खुदाई बाढ़ को मौसम मा ही ह्वाई
                जड्डू भगाओ नीति तहत जेठ मा कमुळ बंट्याय़ी . हे भगवान क्या खज्यात आई
Garhwali Humour, Garhwali Satire, Humour and Satire from Uttarakhandi Languages,
Satire and Humour in Himalayan Languages to be continued in next issue....
 
Copyright@ Bhishm Kukreti 

What a year 2011 was ! सन २०११ ई. क ल्याखा ज्वाखा

सन २०११ ई. क ल्याखा ज्वाखा (कुछ खास घटनाअं )
(Garhwali Satire, Garhwali Humour, Himalayan Language Satire, Satire from Uttarakhandi Languages)

                           भीष्म कुकरेती
उन त कै बि सालौ लेखा जोखा दीण कठण इ होंद. जन जन आँखी तन तन घटनाउं दिखण मा विवधता ह्व़े जांदी.
हमखुण ज्वा बात गौड़ बियाण जन महत्वपूर्ण होंदी हैंका कुण मूसी बियाण जन तुच्छ बात होंदी. मनमोहन सिंग सिद्धान्तुं
मा हींग हगण (गरीबी ) हटौणो बान सिरफ़ अमीरों तैं प्रश्रय दिए जांद त भारतीय कम्युनिस्टी निष्ठा मा अमीरुं अर अमीरी
क ईं धरती मा क्वी काम इ नी च. मनमोहन सिंह क सिधांत गरीब हटाण चान्दन अर अमीर ल़ाण चान्दन त भारतीय
कम्युनिस्टी निष्ठा अमीरुं तैं मिठाण चांदन. गरीबी हटौणे कौंळ द्वी जगा गवे इ लगाणि रौंदी अर इन मा गरीबी हटौणे
कौंळ द्वी जगा पैथर इ रै जांदी
                अब द्याखो ना भाजापाई मुंडअळी (हाई कमांड ) न डा रमेश पोखरियाळ तै मुख्य मंत्री क खुर्सी बिटेन धकये द्याई
अर भुवन चंद खंडूड़ी तैं मुख्य मंत्री क खुर्सी मा दुबर चिपकै द्याई. डा पोखरियाळ कु जाण अर खंडूड़ी क दुबर आण भारतीय
जनता पार्टी क दोगला पन की पोल खुल्दी. ये भै पैल त तुमन इमानदार मुख्यमंत्री हटायि अर फिर जब पोखरियाळ राज मा
जब तबादला उद्यम मा बढ़ोतरी, घूस -भ्रष्टाचार को राज ह्व़े अर जगा जगा भाजापाई सरकार की जग-हंसाई हूण लगी, चुनौ
नजीक आण लगीन त भाजापाई मुंडअळी (हाई कमांड ) न सर से रमेश पोखरियाळ की जगा खंडूड़ी तैं खुर्सी मा पतकै दे .
वाह ! भ्रष्टाचार, भ्रस्टाचार्युं तैं टिक्क्वा (सह, समर्थन) दीण अर दगड मा अपणि छवि बि बणे क रखण हैं ? इ द्वी चीज
कबि दगड़ी ह्व़े सकदन ? अच्छा ! भुवन चन्द्र तैं मुख्यमंत्री क खुर्सी मा बिसौण ( थक उतारने हेतु बैठना ) जन धौर त दे पण
जु कारिन्दा , मंत्री डा रमेश क दगड छ्या उंकी खुर्सी जन्या की तन्नी . य़ी भाजापाई वल़ा अबि बि जनता तैं सीधा साधा नि
समजदन बलकण निरपट लाटो , कालो , बेवकूफ समजणा छन, उंह ! क्या अबि बि २०११ मा जनता बेवकूफ च ? जु
भाजापा क दियीं भुवन चन्द्र खंडूड़ी नाम की खिळवणि/पिंपरी से बौगे जाली ?
                  डा मनमोहन सिंह क आर्थिक सिद्धांत की पोल त हौरी बि तब खुल जब प्लानिंग कमीसन न भारतीयुं तैं सन २०११ मा बताई बल
भारत मा गरीब तीन चार सौ रूप्या मा अपण घौर चलै सकद बल. वाह ! डा. मनमोहन सिंह क सिद्धांत ! वाह ! जख अम्बानी सरीखा
अमीर क तीन चार सौ कमरों क ड्यारौ खर्चा सालाना तीन चार सौ करोड़ रूप्या ह्वाऊ वख गरीब तीन चार सौ रुपया मा जिंदगी जी ल्यालु !
मनमोहन सिंह जी ! आग लगावा तै सिद्धांत पर, गुज्यर चुलाओ तैं सिद्धांत तैं.
                  गद्दाफी की हत्या अर मुबारक हुसैन को राज पाठ छोडिक जाण बथान्दन बल जब तलक अमेरिका जन डमडमो, स्वार्थी देश को
हाथ पैथर राओ त कुकर्मी, निर्दयी, नीच तानाशाह बि भौत सालों तक राज कॉरी सकद अर जै दिन अमेरिकी स्वार्थ पूर्ती बन्द ह्वाई ना
की प्रजातंत्र बहाली क नाम पर गद्दाफी की मौत होली अर मुबारक हुसैन तैं राज पाठ छुड़ण पोडल. कनी बि अमेरिका की गुलामी करण
आज एक परम, अटल सत्य च
                       अमेरिका क सेना क इराक बिटेन जाण बि ये साल की बडी घटना च अर अमेरिका की फ़ोकट की धौंस बाजी, रौबबाजी , हेकड़ी बाजी
को एक ज्वलंत उदारण च . अमेरिका तैं अपुण देस मा छोडिक प्रजातंत्र की कबि बि चिंता नि राई अमेरिका तैं त बस अपण स्वार्थ पूर्ति अर रौब दाब इ चयेणु च .
सन २००१ के अभिन्न घटना - टू जी स्कैम अर कॉमनवेल्थ गेम्स घुटाल़ा बथान्दन बल हर जुग मा धृतरास्ट्र काणो/अंधा राजा ही पैदा होन्दन. डा. मनमोहन सिंह तैं इमानदार
प्रधान मंत्री माने जांद पण म्यारो बुलण च मनमोहन सिंह से बड़ो काणो/नेत्रहीन /अंधा/स्वार्थी राजा (प्रधान मंत्री) आज तक भारत मा ह्वाई नी च . अरे
पाणी भर्युं घौड़ जरा सी बि फुटदो त आस पास हीलू ह्व़े जांद. अर हमारा दर्शन -न्याय/तर्क शास्त्र हिसाब से हम तैं पता चौली जांद बल घौड़ मा
पाणी छौ . त हे मनमोहन सिंह जी (जु इमानदार प्रधान मंत्री छन) ! तुम तैं पता इ नि चौल बल तुमर राज मा इतिहास जनक घोटाल़ा/घपला/गडबड/गोलमाल
होणा छन?वाह ! जनाब इमानदारी का पुतला ! तुम से बड़ो काणो राजा त धृतरास्ट्र बि नी ह्वाई. इमानदारी को द्यू /दिया मनमोहन सिंह जी ! धृतरास्ट्र त आँखों अंधा/काणो
छौ पण तुमन सिद्ध करी दे बल कन स्यूं आँखों का बि कन अंधा /काणो हुए सक्यांद अर जब भविष्य मा बच्चों तैं स्यूं आँखों का कन अंधा/काणो हुए जांद
का उदाहरण दिए जाला त बुले जालो बल डा. मनमोहन सिंह माने स्यूं आँखों काणो /अंधा मनिख. इमानदार मन मोहन सिंह जी ! आपन अर्थ शास्त्र मा डॉक्टरी कार
आप रिजर्ब बैंक का गबर्नर बि रैन त साब , त जनाब ! इमानदार प्रधान मंत्री जी ! अप बि जाणदा हवेला की मैंनेज्रियल अकौंटिबिलिटी अर रिस्पोंसिबिलिटी क हिसाब से त
आपका प्रधानमंत्रित्व काल मा हुयां स्कैम का असली दोषी/पापी/कसूरवार/अभियुक्त/मुजरिम आप ही छन कि ना ? इमानदार प्रधानमंत्री जी ! क्या इमानदारूं मा
आत्मा/चेतना/अन्तःकरण/ब्रह्म/धर्म को सरासर ह्र्चंत ह्व़े जान्दो ?
                        सन २०११ की सबसे बडी घटना च अन्ना हजारे क भारतीय सामाजिक अर राजनैतिक अस्मान मा आण . पण अन्ना हजारे को आण अर फिर २८ दिसम्बर खुणी
हताशा मा अपण अनशन तोड़ी दीण कथगा इ सवाल छोड़ीगे. लोक सभा मा लोकायुक्त बिल पास हूण अर वी बिल राज्य सभा मा पास नि हूण बि अन्ना हजारे प्रकारण
को ही हिस्सा च .
                       अन्ना हजारे आन्दोलन से साबित ह्व़े बल राजनीति सिरफ़ स्वार्थी इ नी च बल्कण मा निर्दयी , कठोर बि च. पैलक रज्जा स्वार्थ बशीभूत अपण बुबा , अपण भयात तैं
ही मारी दीन्दी छया आज को प्रजातंत्र मा बि इनी होणु च . हाँ ! केवल हत्या जन बात दूर इ च पण राजनैतिक स्वार्थ का बान झूट तैं सच घोषित करण, सच तैं झूट
बणे दीण , अपण स्वार्थ का बान जनता क्या अपण बुबा तैं तैं सरेआम धोखा दीण, लम्पटगिरी, छाल-परपंच, आत्मा की हत्या, बेईमानी की पूजा, कर्म कुकर्म,
अपण गुनाहों तैं खुले आम दूसरों पर थोपण, चोर का चर्र चर्रा बोल, भ्रस्टाचार तैं ज्युंद रखणो बान भ्रष्टाचार तैं खूब गाळी दीण, सब कुछ हमन अन्ना हजारे आन्दोलन प्रकरण
मा खुले आम द्याख.
                अर एक हैंकि बात बि लोगुन नोटिस कार जब अन्ना हजारे तैं मीडिया अर लोगुं क अपार, अणथक जन समर्थन मील त अन्ना हजारे क टीम बि बेलगाम
घोर डिक्टेटर जन आचरण करण लगी गे छे . उ त मुंबई मा २७ दिसम्बर खुणी अन्ना हजारे क अनशन मा लोक नि ऐन त अन्ना हजारे अर हजारे क
टीम तैं अकल आई की जन आन्दोलन मा डिक्टेटरी भली नि होंदी, लोग सब जाणदा छन , लोग सब पछ्याणदा छन अर समौ पर ही बुल्दन, जनता समौ पर
इ अपण सक्यात/तागत दिखांदी
                 अन्ना हजारे अर हजारे की टीम तैं समजण चएंद बल महात्मा गाँधी तैं भारतीय इ ना हौरू लोगुं क समर्थन थौ पण गांधी जीन ब्रिटिशुं समणि तानाशाही
कबि बि नि दिखाई. अर कोंग्रेस तैं बि बिंगण चएंद बल बाबा रामदेव तैं भगाणो बान कोंग्रेस्युं तानाशाही क तेवर ठीक नि छया . बाबा राम देव तैं बि समजण चएंद
जनता क भलो बान लाठी-गोळी खाण इ पड़द . बाबा राम देव समजी त गेई होला बल पुलिस क डौर न स्टेज बिटेन फाळी मारिक भजण वालुं तैं भारतीय जन मानस
ना त गाँधी क च्याला माणदी ना ही महान ऋषि पातंजलि क शिष्य. डौरक भजण वाळ तैं ना त जोगी बुले जांद अर ना ही नेता वै तैं त डरख्वा ही बुले जांद.
 
बाबा रामदेव जी ! जनता सब जाणदी च सब पछ्याणदी च अर समौ पर ही अपण हथियार निकाल्दी. जनता तुमर जन हर समय बक बक नि करदी.
Garhwali Satire, Garhwali Humour, Himalayan Language Satire, Satire from Uttarakhandi Languages to be continued in next issue
Copyright@ Bhishm Kukreti     

Payali : A Garhwali Folk Song in Pandav Nrity Geet


Payali :  A Garhwali Folk Song in Pandav Nrity Geet

( Himalayan Traditional Dance-Song, Folk Dance-Songs of Uttarakhand, Garhwali Folk Dance and Folk Songs)
                                           Bhishm Kukreti
     Pandav Nrity-Geet/Pandaun Dance-Song is very popular dance-song sequence for all Garhwalis and Kumauni. In Pandau nrity-geet , the story narrators (aujees) sing the stories of Pandavas of Mahabharata and dancers (Pashwa) dance on the music and song.
   The main musicians and singers of Pnadau/Pandav nrity-geet , Pandoli nach-gan/Pandav Dance-Song are Aujees who play Dhol and Damau (drums) and Aujee sing song for Pandav nrity too.
  When there is dance-song going on , in between the dancers take rest for the time being. At the such interval, a Pandouli (who dance or is part) comes to the Das/Aujees and request for a new Pandav story or new music of Pandav Nrity-Geet.  The request maker keeps one hand on his ear and by one hand the request maker does performance by indicating the hands to Aujees and sing the following type of song.
The requesting song is in figurative language and with exaggerating words
               पयाळी : एक पंडौ गीत

                   मै छयो मेरा दामी निंदरा भुल्युं
                   अर म्यारो दामीमै छयो सियूँ -
                   झलाकार्या बिस्तरा , घुंघराळयाँ चारपाई
                   अब मेरा दामी , त्वेन लगाए मैं पराज
                    ढोल का शब्द , नगाड़ू की गूंज
                    मै आयूँ यख , धारु रड़ीकगाडू बौगीक
                     अमर रयाँ भुला , तेरी पंदर पच्चीसी
                     आज मेरा दामी , तू मैकू
                     फूल सी    खिलै दे -भौंर सा उडै दे

O! Dami (who plays drum)! I was in deep sleep and had forgotten everything.
I was sleeping on a fine bed sheet and the bed with small bells. In deep sleep I was senseless or unconscious.
My Dami (music player) ! The words of Dhol and music of Damau reminded me  Pandau song.
I came from hill trembling from hills, came crossing the rivers.
My younger brother! You be always young (age of fifteen-twenty five ).
Hey my dami!
You make me happy as bloomed flower and as bee flies (by singing and playing new music.)
In Payali, the requesting person sings the song and Aujees play Dhol-Damau in slow rhythm   . 

Source: Dr Shiva Nand Nautiyal, Garhwal ke Lok Nrity Geet.
Garhwali Folk Dance and Folk Songs, Himalayan Traditional Dance-Song, Folk Dance-Songs of Uttarakhand to be continued……
Copyright@ Bhishm Kukreti, Mumbai  

Why Doesn't Crow Bite ? कवा झूट बुलण वाळ तैं किलै नि काटदो ?

 कवा झूट बुलण वाळ तैं किलै नि काटदो ?
(Garhwali Satire, Garhwal Humorous essays, Satire in Uttarakahndi Languages, Himalayan Languages Satire and Humour )
                           भीष्म कुकरेती
                  पैलो जमानो भलो छौ जब झूट बुलण वाळ तैं कवा काटदो छौ. बस झूठ ब्वालो अर कवा अपण ड्यूटी खुणि तयार.
लोक बुल्दन बल युधिस्ठिर धर्मराज को रूप छौ अर तबी युधिस्ठिर झूठ नि बोल्दो थौ. पण महाभारत मा इन बि त नि लिख्युं च
बल दुर्योधन न बि कबि झूट ब्वाल. जी नही! दुर्योधन बि झूठ नि बोल्दो थौ. अरे झूठ कनकै बोलणो थौ चाहे ओ युधिस्ठिर ह्वाऊ
या दुर्योधन ह्वाओ द्वी झूठ बोली नि सकदा छा. वै जमानो मा जनि क्वी बि झूट बोल्दो थौ सर से कवा काटणो ऐ जांदा छया.
जनि झूठ बुले ग्याई तनी कवा कांव कांव करदा झूट बुलेंदर का मूंड पर चूंचै कचांग मारी दीन्दा होला. इन मा युधिस्ठिर त जाणि
द्याओ वैका मंत्री संतरी बि झूट नि बोली सकदा छा.
पैलो जमानो भलो थौ तबी त वकील नाम को भयंकर सामाजिक जानवर वै टैम पर नि पाए जान्दो थौ. वै टैम पर वकील अर वकालतनामा
क जरोरात इ नि छे. कोर्ट मा जनि क्वी मुवक्किल, मुद्दई या गवाह क्वी बि झूट बोल्दु रैं होलू झट से कवा ऐका पछ्याणक करदा होला बल
झूट क्वा बुलणु च अर न्यायाधीस तैं कुछ करणे जर्वत इ नी छै. कवा न्याय का पंछी छया . सैत च वैबारी लोक कोर्ट मा नि जांदा छया .
कवा न्याय करी लीन्दा छया
 
           अब यू रिवाज ख़तम ह्व़े ग्याई .कुज्याण भगवान् न कवों शक्ति किलै कम करी दे होलू , भगवान् इ जाणल़ू . पण जु बि ह्वाई
ठीक इ ह्व़े होलू.
 
               अब ज़रा घड्यावदी, जरा स्वाचदी, जरा विचार कारो त आप बि बोलिला बल ठीक इ ह्व़े जु झूट बुळण वाळऊँ तैं कवा नि कटदो.
अच्काल झूठ बोलण वालूँ तैं कवा काटदो त भारत मा इ द्वी चार सौ करोड़ कवों जर्वत होंदी. कुज्याण कु कखम झूठ बोली दीन्दो
त वै हिसाब से हरेक भारतीय क पैथर औसतन द्वी कवा त चयेणा इ छया की ना?
अब ज़रा घड्यावदी/स्वाचदी की आप रासन कार्ड ऑफिस मा जयां छंवां अर आप चपड़सी तैं पुछणा छंवां बल "साब कख छन ?"
चपड़सी क जबाब होंदु , " साब एक जरुरी मीटिंग मा व्यस्त छन ." . अर इना चपड़सी न झूट ब्वाल ना की उना कवा ऐका चपड़सी
क मूंड कच्याण बिसे जालो. कवा क्वी मनिख त छ नि अपण काम मा लापरवाही कारलु. जथगा समय भगवान् न झूट बुलण वाळ तै
ठैरायुं होलू/नियत कर्युं कवा उथगा तैं त ल्यालो की ना ? इथगा मा वी चपड़सी फोन पर साब की बीबी मा बोल्दु, " हाँ मेम साब ! साब ओफिसियल काम मा
भौत व्यस्त छन" अर फिर कवा की जरोरात होली की ना किलैकि साब त अपण सेक्रेटरी दगड चा -पाणी पीण मा व्यस्त छन .
इन मा चपड़सी पर चूंच मारणो या काटणो द्वी कवा ओफिसियाली व्यस्त ह्व़े जाला अर जब आप झूठ बोलिल्या बल आप की
आमदनी मिड्डल इनकम ग्रुप मा ना लोअर इनकम ग्रुप मा च त आप तैं काटणो एक कवा चयेंद अर फिर आपक ड्यारम त चार इ आदिम छन अर
बोलणा छंवां बल आपक परिवार मा छै आदिम छन त आप तैं काटणो हैंक कवा चएंद की ना ?
 
       अच्काल चार मोबाईल फोन अर जण चारेक गर्ल फ्रेंड रखण जरुरी ह्व़े गे. इ द्वी जरोरात बि छन अर स्टेटस सिम्बल बि छन.
अब आप एक गर्ल फ्रेंड तैं लेकी कै बढिया सी जगा मा शराब की चुस्की ल़ीणा छंवां , कैंडल डिन्नर की तैयारी होणि इ च कि आपक
बीबी क फोन आये अर आप एक मोबाइल पर बुलणा छंवां, " ए भै ! मी जरा एक महत्व पूर्ण फोरेन क्लाइंट क दगड डिन्नर करणु छौं .."
अर इथगा मा आप तैं काटणो कवा तैयार पण आप हैंको फोन पर दूसरी गर्ल फ्रेंड क दगड बचळयाणा छंवां, " स्वीट हार्ट आज मी
जरा अपण साब क दगड बैठ्युं छौं .." आप तैं कटणो हैंको कवा तैयार अर इनी द्वी हौरी गर्ल फ्रेंडू फोन आलो अर आप तैं झूट इ बुलण
पोड़ल अर खाली आपक इ वास्ता चार कावों जर्वत ह्व़े जाली जो आप पर कचांग लगाला.
 
            अर ज़रा घड्यावदी, जरा स्वाचदी, जरा विचार कारो की पार्लियामेंट अर विधान सभा मा कथगा कवों जरुरत ह्वेली ! ए मेरी ब्व़े !
जख नेता लोक पल पल मा झूट बुलणा रौंदन उख त कव्वों की फ़ौज बि कम पोड़ळी . अर फिर चुनावूं टैम पर त नेता, नेताओं चमचा,
अखबार नबीस , खबररशां ( पत्रकार ), बिचौलिया, चुनौ फंड दीण वाळ अर फंड ल़ीण वाळ अर इख तलक की वोटर बि झूठ इ बुळणा रौंदन
त चुनाव क टैम पर भगवान् इथगा कवा कखन ल्हालो?
 
         फिर चलो ! भगवान् कावों इंतजाम करी बि द्यालों पण कवों कु खाणो इंतजाम कखन होलू. अच्काल त मनिख कवों तैं घी घुसीं रुट्टी
नमकीन वगैरा दीणा रौंदन पण जब कवा झूट बुलण वालुं तैं काटल त कै मनिख न दीण कवा तैं खाणक ?
भगवान् बि हमारो इ त च. इलै भगवान न ये जमानो मा झूठ बुलण पर कवा काटणो रिवाज बन्द करे दे . चलो ठीक इ ह्व़े .
Satire in Uttarakahndi LanguagesGarhwali Satire, Garhwal Humorous essays, , Himalayan Languages Satire and Humour
to be continued in next issue....
Copyright @ Bhishm Kukreti  

Real Reason of Battle of Mahabharata


Mahabharat Judh k  Jad Chaam k Dali Nach –Gan:  The Garhwali Folk song Specifying Reason of Mahabharat Battle

(Folk Dance -Song of Garhwal, Traditional Dance Songs from Uttarakhand, Himalayan Folk Dance-Songs)

                                               Bhishm Kukreti
                    Mahabharata has influenced Garhwal well before Mahabharata was actually created because the stories of Mahabharata were there in the form of folk literature in Garhwal too.
  There is one folk dance-song of Ravain region about the reasoning of great battle Mahabharata between Pandavas and Kauravas. This old song states that the reason of greatest of great battles –Mahabharata between Pandavas and Kauravas was a tree ‘Cham’. The story is very interesting and tells us that most of the time the conflict begins by petty matter than very important matters as song states:
          महाभारत युद्ध का करण बतलाता लोक गीत


            डाळी बडी स्वरीग नैगीडाळी बडी स्वरिग नैगी
             कौरों बोद डाळी हमारि , कौरों बोद डाळी हमारि
            पंडो बोद डाळी हमारि , पंडो बोद डाळी हमारि
             कौरों पंडो को झगड़ा लैगीकौरों पंडो को झगड़ा लैगी
            डाळी होली कौरों कीखून लग्या धारी
            डाळी होली पंडो कीदूध भर्याँ पारी
            डाळी दूखु लैगीं तोणणडाळी दूखु लैगीं तोणण
            डाळी लेगी दूध की धारी , डाळी लेगी दूध की धारी
            पंडो बोद डाळी हमारि , पंडो बोद डाळी हमारि
            कौरों -पंडो को जुद्ध लैगी , कौरों -पंडो को जुद्ध लैगी
            The Cham tree is touching the high sky. Kaurav claims that the tree belongs to them. Pandavas claim that Cham tree is their property.  Kaurav and Pandavas started fighting.  It was decided that if the Cham tree belongs to Kauravas , it will  ooze blood and tree belongs to Pandavas , the Cham tree will ooze milk.  Both started plucking leaves of Cham tree. The Cham tree started oozing milk. On the oozing milk, Pandavas claimed about tree Cham but Kauravas started claiming about Cham tree and the battle between Pandavas and Kauravas started battling.

Source: Dr shiva Nand Nautiyal ; Garhwal ke Lok Nrity-Geet
Himalayan Folk Dance-Songs, Folk Dance -Song of Garhwal, Traditional Dance Songs from Uttarakhand, series to be continued in next part
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