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Wednesday, August 5, 2015

प्रेम मा बिंडी व्यस्त छौं अचकाल

रचना --- हरीश जुयाल

वार -प्वार हुयां छौ अचकल्यूं ।
धार धार हुयां छौ अचकल्यूं ।।
पुछणा रंदन जात -थात ।
ग्वतराचार हुयां छौ अचकल्यूं ।।
वोट दीणा खुण अंग्वठाछाप ।
अधिकार हुयां छौ अचकल्यूं ।।
मिसकौल आणी छन धड़ाधड़ ।
मायादार हुयां छौ अचकल्यूं ।।
वूंका फंचा बोकिकि "जुयाळ "
रोजगार हुयां छौ अचकल्यूं ।।

Copyright@ Harish Juyal 2015

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